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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी और भौम प्रदोष व्रत का संपूर्ण दैनिक पंचांगधर्म
7 सित॰ 2026, 11:13 pm (1 घंटे पहले)· 2

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी और भौम प्रदोष व्रत का संपूर्ण दैनिक पंचांग

8 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि, पुष्य नक्षत्र और परिघ योग के साथ भौम प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। साथ ही जैन समुदाय के पर्युषण पर्व की शुरुआत भी इसी दिन से हो रही है।

पंचांग गणनाओं के अनुसार 8 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और मंगलवार का पवित्र दिन रहेगा। धार्मिक दृष्टि से इस दिन कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व एक साथ पड़ रहे हैं, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस दिन दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक द्वादशी तिथि का प्रभाव रहेगा, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। इसके अलावा इस पूरे दिन और रात्रि में विभिन्न योगों और नक्षत्रों का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा, जिनकी पूरी जानकारी ज्योतिषीय गणना के माध्यम से समझी जा सकती है।

8 सितंबर 2026 के प्रमुख योग और नक्षत्र

पंचांग के जानकारों के अनुसार मंगलवार को रात 12 बजकर 41 मिनट तक परिघ योग अपनी स्थिति बनाए रखेगा। नक्षत्रों की बात करें तो शाम 4 बजकर 40 मिनट तक पुष्य नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसे ज्योतिष में बेहद शुभ माना जाता है। इस तिथि पर अजा एकादशी व्रत का पारण भी किया जाना है। इसके साथ ही जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी यह दिन विशेष है क्योंकि मंगलवार से ही जैनियों के चतुर्थी पक्ष के पर्युषण पर्व का शुभारंभ हो रहा है, जबकि पंचमी पक्ष का पर्युषण पर्व ठीक अगले दिन यानी 9 सितंबर से शुरू होगा।

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व्रत पारण और प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त

जो श्रद्धालु अजा एकादशी का व्रत रख रहे हैं, वे 8 सितंबर को सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 53 मिनट के बीच अपना व्रत खोल सकते हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि पारण तिथि के दिन द्वादशी तिथि दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। वहीं भौम प्रदोष व्रत के लिए त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 9 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय शाम 6 बजकर 47 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 07 मिनट तक का रहेगा।

दिनभर के शुभ समय और अभिजित मुहूर्त

दिन की शुरुआत में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से सुबह 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, जबकि प्रातः सन्ध्या सुबह 5 बजकर 15 मिनट से सुबह 6 बजकर 25 मिनट तक चलेगी। दिन के मध्य में महत्वपूर्ण कार्यों को शुरू करने के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 01 मिनट तक उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से दोपहर 3 बजकर 29 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट से शाम 7 बजकर 11 मिनट तक, सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 47 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक और अमृत काल सुबह 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।

प्रमुख शहरों में राहुकाल की स्थिति

ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल के दौरान किसी भी नए या मांगलिक कार्य को शुरू करने की मनाही होती है। मंगलवार को विभिन्न बड़े शहरों में राहुकाल का समय अलग-अलग रहेगा। दिल्ली में दोपहर बाद 3 बजकर 27 मिनट से शाम 5 बजकर 01 मिनट तक राहुकाल रहेगा। मुंबई में यह समय दोपहर बाद 3 बजकर 42 मिनट से शाम 5 बजकर 14 मिनट तक, चंडीगढ़ में दोपहर बाद 3 बजकर 29 मिनट से शाम 5 बजकर 03 मिनट तक, लखनऊ में दोपहर बाद 3 बजकर 11 मिनट से शाम 4 बजकर 45 मिनट तक, भोपाल में दोपहर बाद 3 बजकर 24 मिनट से शाम 4 बजकर 58 मिनट तक और कोलकाता में दोपहर 2 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 14 मिनट तक राहुकाल का प्रभाव रहेगा।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

इस दिन सूर्योदय प्रातःकाल 6 बजकर 02 मिनट पर होगा, जबकि दिन का समापन यानी सूर्यास्त शाम को 6 बजकर 34 मिनट पर तय किया गया है। इन दोनों समय के बीच की अवधि में सभी दैनिक धार्मिक अनुष्ठान और पूजन कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। इस विशेष पंचांग से जुड़ी अन्य धार्मिक जानकारियों के तहत आप हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी के संशय से जुड़ी खबरें भी देख सकते हैं।

सवाल-जवाब

8 सितंबर 2026 को कौन सा प्रमुख व्रत है?
इस दिन भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा और अजा एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा।
अजा एकादशी व्रत का पारण किस समय किया जा सकता है?
पारण का समय 8 सितंबर 2026 को सुबह 6 बजकर 25 मिनट से सुबह 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
प्रदोष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?
प्रदोष पूजा का मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट से रात 9 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।
दिल्ली में राहुकाल का समय क्या रहेगा?
दिल्ली में राहुकाल दोपहर बाद 3 बजकर 27 मिनट से शाम 5 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।
इस दिन कौन सा नक्षत्र प्रभावी रहेगा?
शाम 4 बजकर 40 मिनट तक पुष्य नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।
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