परीक्षा नजदीक आते ही ज्यादातर स्टूडेंट्स के मन में एक ही सवाल घूमने लगता है, मेहनत तो कर रहे हैं लेकिन नतीजा क्या होगा. इसी बेचैनी का जवाब कैंची धाम के संत नीम करोली महाराज के सरल विचारों में मिलता है. उनकी बातें किसी मोटी किताब का दर्शन नहीं थीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली सीधी-सादी सच्चाइयां थीं, जिन्हें आज भी लाखों लोग अपनी मुश्किलों का हल मानते हैं.
कौन थे कैंची धाम के ये संत
नीम करोली महाराज को 20वीं सदी का महान संत और हनुमान जी का अवतार माना जाता है. उनका आश्रम उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसा है और कैंची धाम के नाम से मशहूर है. इस आश्रम की शांति और महाराज जी के बताए रास्ते ने सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसी दुनिया की बड़ी हस्तियों को भी गहरे तौर पर प्रभावित किया है. यही वजह है कि परीक्षा के तनाव, करियर की एंग्जायटी और कॉम्पिटीशन के दबाव से जूझ रहे स्टूडेंट्स के लिए उनके विचार आज भी उतने ही असरदार माने जाते हैं.
पहली सीख, नतीजे की नहीं मेहनत की चिंता करो
स्टूडेंट्स की सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है कि पढ़ाई करते वक्त भी दिमाग रिजल्ट में उलझा रहता है. महाराज जी कहते थे कि इंसान का काम सिर्फ पूरी ईमानदारी से मेहनत करना है, फल की चिंता उसका काम नहीं. जब परिणाम की फिक्र छोड़कर सिर्फ अपने कर्म पर ध्यान लगाया जाए, तो दिमाग पूरी तरह एकाग्र हो जाता है और सफलता खुद-ब-खुद रास्ता बनाती चली जाती है.
दूसरी सीख, दूसरों की भलाई में अपनी भलाई देखो
पढ़ाई के दौरान साथी छात्रों से जलन, होड़ या नफरत पालना मानसिक ऊर्जा को खत्म कर देता है. नीम करोली महाराज जी सिखाते थे कि दोस्तों और सहपाठियों के प्रति हमेशा सेवा और प्रेम का भाव रखना चाहिए. ग्रुप स्टडी करना या अपने नोट्स दूसरों के साथ बांटना सिर्फ मदद भर नहीं है, बल्कि इससे अपनी समझ भी दोगुनी गहरी होती है.
तीसरी सीख, सच का रास्ता चुनो तो डर खुद खत्म हो जाएगा
परीक्षा का डर ज्यादातर तभी सताता है जब तैयारी में ईमानदारी की कमी रह जाती है. महाराज जी कहते थे कि सच में बहुत बड़ी ताकत होती है. अगर कोई खुद से यह सच कह सकता है कि उसने अपना सबसे अच्छा वक्त पढ़ाई को दिया, तो असफलता का कोई डर उसके मन पर हावी नहीं हो सकता.
चौथी सीख, धैर्य ही असली साधना है
नीट (NEET), यूपीएससी (UPSC) या जेईई (JEE) जैसी मुश्किल परीक्षाओं की तैयारी में बरसों लग जाते हैं और इस दौरान कई उम्मीदवार हिम्मत हारने लगते हैं. नीम करोली महाराज जी का कहना था कि हर पौधे में फल सही समय पर ही आता है. इसलिए धैर्य बनाए रखना, रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ते रहना और अपनी निरंतरता को टूटने न देना ही असली मेहनत है.
पांचवीं सीख, जिंदगी को उलझाओ मत, सादा रखो
आजकल स्टूडेंट्स एक साथ ढेर सारी किताबों, सोशल मीडिया की भटकन और ओवरथिंकिंग में उलझ जाते हैं. महाराज जी का जीवन संदेश था, सादा जीवन और उच्च विचार. पढ़ाई का तरीका सरल रखना, सीमित संसाधनों से बार-बार रिवीजन करना और डिजिटल डिटॉक्स अपनाकर अपनी एकाग्रता बचाए रखना ही सही रास्ता है.
कैंची धाम से मिली दो खास सीखें
कैंची धाम का डिजिटल डिटॉक्स नियम कहता है कि पढ़ाई के दौरान दिन में कम से कम 2 घंटे स्मार्टफोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाई जाए और इसे अपनी ध्यान साधना जैसा माना जाए. इसके अलावा 3-S फॉर्मूला भी बेहद कारगर बताया जाता है, यानी सिंपल यानी सादा जीवन जीना, सिंसियर यानी पढ़ाई में ईमानदार रहना और साइलेंट यानी अपनी तैयारी का शोर मचाए बिना शांति से मेहनत करते रहना.



















