हैदराबाद से थोड़ी ही दूरी पर, पड़ोसी राज्य की सीमा में स्थित कम्बलीपुरा आज लाखों श्रद्धालुओं की असीम श्रद्धा का मुख्य केंद्र बन चुका है। यहां मौजूद श्री काटरम्मा देवी मंदिर, जिसे श्री क्षेत्र अम्मा वारी शक्ति पीठम के नाम से भी जाना जाता है, अपनी अद्भुत धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। इस पूरे मंदिर परिसर में सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करता है एक विशालकाय और लगभग 300 वर्ष पुराना बरगद का पेड़। यह ऐतिहासिक वट वृक्ष महज़ एक पेड़ नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों के अटूट विश्वास का सबसे बड़ा आधार है। इस पावन परिसर में प्रवेश करते ही एक अनोखा दृश्य दिखाई देता है। पेड़ की लंबी जटाओं और पुरानी टहनियों पर चारों तरफ लाखों लाल रंग के कपड़े बंधे हुए हैं। स्थानीय मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं में इन लाल रंग की पोटलियों को 'मुडुपू' यानी मन्नत की पोटली कहा जाता है, जो भक्तों की अनगिनत प्रार्थनाओं और उम्मीदों का प्रतीक हैं।
लाल पोटली से मुराद पूरी होने की मान्यता
मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के मन में यह अटूट विश्वास है कि यदि पूरी पवित्रता और सच्ची श्रद्धा के साथ इस 300 साल पुराने बरगद के पेड़ पर मन्नत की पोटली बांधी जाए, तो जीवन के सभी बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं। इस अनुष्ठान के तहत भक्त एक नारियल को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर पेड़ पर बांधते हैं। इस पवित्र स्थान की ख्याति विशेष रूप से उन विवाहित दंपतियों के बीच एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जो लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं। लोगों का मानना है कि श्री काटरम्मा माता के दरबार में मत्था टेकने और इस प्राचीन वट वृक्ष की जटाओं पर मुडुपू बांधने से सूनी गोद भर जाती है। इसी चमत्कारी मान्यता के चलते केवल कम्बलीपुरा के स्थानीय निवासी ही नहीं, बल्कि हैदराबाद, सिकंदराबाद और पूरे तेलंगाना राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में लोग यहां खिंचे चले आते हैं। मन्नत मांगने वालों के साथ साथ यहां वो भक्त भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, जिनकी मुराद पूरी हो चुकी होती है और वे माता का आभार व्यक्त करने आते हैं। मंदिर में हर रविवार, मंगलवार और शुक्रवार को आस्था का एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
अन्नदानम से लेकर नशामुक्ति तक की सेवाएं
श्री क्षेत्र अम्मा वारी शक्ति पीठम की महिमा सिर्फ मन्नत की पोटली और चमत्कारिक पेड़ तक ही सीमित नहीं है। यह मंदिर अपनी निस्वार्थ सेवा भावना के लिए भी जाना जाता है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन आयोजित होने वाला मुफ्त अन्नदानम कार्यक्रम इस सेवा भाव का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां आने वाले हर भक्त को प्रसाद ग्रहण करने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही, परिसर के भीतर ही एक विशाल गौशाला भी संचालित की जाती है, जो इस स्थान की आध्यात्मिकता को और बढ़ाती है। मंदिर में आने वाले लोगों को अन्य कई तरह की मदद भी मिलती है। जो लोग बुरी नजर या नकारात्मक ऊर्जा से परेशान होते हैं, उनके लिए यहां विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। इतना ही नहीं, यह स्थान नशामुक्ति के प्रयासों के लिए भी काफी मशहूर हो रहा है, जहां बुरी लत के शिकार लोगों को छुड़ाने के लिए विशेष पारंपरिक और जड़ी-बूटियों से बनी दवाएं भी दी जाती हैं।
आकार ले रही है 252 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा
लगातार बढ़ती लोकप्रियता और देश भर से उमड़ते श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए, श्री काटरम्मा देवी मंदिर के स्वरूप को और भी ज्यादा भव्य बनाया जा रहा है। वर्तमान में मंदिर परिसर के भीतर ही काटरम्मा माता की एक बेहद विशाल प्रतिमा का निर्माण कार्य काफी तेजी से चल रहा है। बताया जा रहा है कि यह मूर्ति लगभग 252 फीट ऊंची होगी, जो अपने आप में एक अद्भुत स्थापत्य का नमूना होगी। एक तरफ तीन सदी पुराना ऐतिहासिक मन्नत का पेड़ और दूसरी तरफ निर्माणाधीन यह गगनचुंबी भव्य संरचना, दोनों मिलकर आने वाले समय में कम्बलीपुरा को एक बेहद प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यहां की आध्यात्मिकता और चमत्कारिक कहानियां हर दिन नए श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।




















