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जालोर के दुदवा गांव की अनोखी दास्तान: जहां बाबा रामदेवजी के नाम पर खुदे ट्यूबवेल से फूटा मीठा पानी और बस गया 'मिनी रामदेवरा'धर्म
14 जून 2026, 4:49 pm (90 दिन पहले)· 0

जालोर के दुदवा गांव की अनोखी दास्तान: जहां बाबा रामदेवजी के नाम पर खुदे ट्यूबवेल से फूटा मीठा पानी और बस गया 'मिनी रामदेवरा'

राजस्थान के जालोर स्थित दुदवा गांव में बाबा रामदेवजी के धाम से जुड़ा मीठे पानी का चमत्कार लोगों की आस्था का केंद्र बन गया है, जहां हर साल भादवा शुक्ल पक्ष में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

राजस्थान की मिट्टी में आस्था, चमत्कार और लोकविश्वास की जड़ें गहरी हैं, और इन्हीं कहानियों की एक मिसाल बना हुआ है जालोर इलाके का दुदवा गांव। आज यह छोटा-सा गांव दूर-दूर तक 'मिनी रामदेवरा' के नाम से पहचाना जाता है। यहां आस्था सिर्फ मन का भाव नहीं, बल्कि गांववालों के जीवन का आधार बन चुकी है।

जाळ के पेड़ तले बसा सिद्धपीठ

गांव के ठीक बीचों-बीच एक प्राचीन जाळ का पेड़ खड़ा है और इसी के साये में बाबा रामदेवजी का पवित्र धाम स्थित है। मान्यता है कि इसी जगह बाबा रामदेवजी ने अपने भक्त रामाजी रेबारी को साक्षात दर्शन देकर पर्चा प्रदान किया था। इसी घटना के बाद यह स्थान सिद्धपीठ के रूप में पूजा जाने लगा और इसकी ख्याति धीरे-धीरे आसपास के इलाकों से होते हुए दूर तक फैलती चली गई।

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20 साल पहले की पानी की पीड़ा

लेकिन इस धाम की सबसे बड़ी पहचान आस्था की उस कसौटी से जुड़ी है, जिसने पूरे क्षेत्र की सोच पलट दी। करीब 20 साल पहले यह इलाका पानी की भीषण किल्लत से जूझ रहा था। ग्रामीणों ने कई-कई बार ट्यूबवेल खुदवाए, मगर नतीजा हर बार निराशा ही रहा। कहीं खारा पानी निकलता तो कहीं बूंद तक नहीं आती। गांव में मायूसी छा गई थी, फिर भी लोगों के मन में श्रद्धा की लौ बुझी नहीं थी।

बाबा के नाम पर खुदा ट्यूबवेल, फूटा मीठा पानी

इसी अटूट भरोसे के सहारे गांववालों ने एक बार फिर हिम्मत जुटाई और इस बार बाबा रामदेवजी के नाम से ट्यूबवेल खुदवाने का संकल्प लिया। इसके बाद जो हुआ, उसी ने दुदवा की तकदीर लिख दी। स्थानीय श्रद्धालु चतराराम ने TrendKia को बताया कि करीब 20 साल पहले यहां मीठा पानी नहीं था, कई ट्यूबवेल खोदे गए पर पानी नहीं निकला, लेकिन जब बाबा रामदेवजी के नाम से खुदाई की गई तो मीठा पानी निकलने लगा। बाबा के इस कथित चमत्कार की खबर आसपास के गांवों में आग की तरह फैली और तभी से इस जगह को 'मिनी रामदेवरा' पुकारा जाने लगा।

जो पानी कभी सबसे बड़ी समस्या था, वही अब आस्था का प्रसाद बन चुका है। आज भी उसी ट्यूबवेल का जल श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

भादवा शुक्ल पक्ष का भव्य मेला

हर साल भादवा के शुक्ल पक्ष में यहां भव्य मेला सजता है। द्वितीया से एकादशी तक चलने वाले इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से पैदल चलकर पहुंचते हैं। कई जातरु तो रामदेवरा की यात्रा से पहले यहां धोक लगाना जरूरी मानते हैं। मंदिर परिसर में भजन, जागरण और प्रसादी का सिलसिला चलता रहता है। ग्रामीण और मंदिर समिति मिलकर श्रद्धालुओं के लिए भोजन, विश्राम और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाएं भी संभालते हैं।

आस्था से आगे, समरसता का प्रतीक

समय के साथ यह धाम केवल एक धार्मिक स्थल भर नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और जनसहयोग का जीता-जागता प्रतीक बन गया है, जहां पानी की एक कहानी ने पूरे गांव को आस्था और एकजुटता के सूत्र में पिरो दिया।

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