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नवरात्रि में ठेले पर पहुंची बजरंगबली की प्रतिमा, जानें उत्तर प्रदेश के इस पावन धाम की महिमाधर्म
6 अग॰ 2026, 11:15 am (10 दिन पहले)· 0

नवरात्रि में ठेले पर पहुंची बजरंगबली की प्रतिमा, जानें उत्तर प्रदेश के इस पावन धाम की महिमा

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां पिछले नवरात्रि में ठेले पर आई बजरंगबली की मूर्ति को वैदिक रीति से स्थापित किया गया था।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा का एक मुख्य केंद्र बना हुआ है। माना जाता है कि इस पावन स्थल पर सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले हर भक्त की मुराद जरूर पूरी होती है। इसी अटूट विश्वास के कारण गोंडा समेत आसपास के कई जिलों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग भगवान हनुमान के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

ठेले पर मंदिर पहुंची थी बजरंगबली की दिव्य मूर्ति

इस पवित्र स्थान से जुड़ी एक बेहद अनोखी घटना की जानकारी देते हुए मंदिर के महंत राजन महाराज ने बताया कि पिछले नवरात्रि के समय एक बेहद दिलचस्प वाकया हुआ था। एक व्यक्ति सुबह-सुबह ठेले पर भगवान हनुमान जी की एक सुंदर प्रतिमा लेकर मंदिर परिसर में आया था। उस व्यक्ति ने मंदिर प्रबंधन को बताया कि यह मूर्ति पहले एक गांव में स्थापित की गई थी, लेकिन वहां उचित व्यवस्था न होने के कारण नियमित रूप से पूजा-अर्चना नहीं हो पा रही थी। इसी वजह से उस प्रतिमा को किसी ऐसे स्थान पर स्थापित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जहां नियमित सेवा हो सके।

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वैदिक विधि-विधान से की गई थी प्राण-प्रतिष्ठा

जब वह व्यक्ति प्रतिमा लेकर पहुंचा तो मंदिर परिसर में ही उसे स्थापित करने का फैसला लिया गया। इसके बाद महंत राजन महाराज और उनके पिता ने मिलकर पूरी श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ बजरंगबली की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई। इस मूर्ति को मंदिर परिसर के भीतर ही स्थित शीतला माता मंदिर के ठीक नीचे स्थापित कर दिया गया। स्थापना के बाद से ही मंदिर में भक्तों का आना-जाना और अधिक बढ़ गया है और नियमित पूजा का सिलसिला जारी है।

विशेष तिथियों पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

हर हफ्ते मंगलवार और शनिवार के दिन मंदिर में भक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिलती है। तड़के से ही श्रद्धालु कतारों में लगकर बजरंगबली की आराधना में लीन हो जाते हैं। भक्तजन यहां बैठकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। इसके अलावा सावन के महीने, हनुमान जयंती और बड़े मंगल जैसे बड़े धार्मिक पर्वों पर तो पूरा मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आता है। राजन महाराज के अनुसार जो भी इंसान सच्चे हृदय से यहां आता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। यहां का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को एक अनोखी आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

पूजा सामग्री और भंडारे की परंपरा

मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्त भगवान हनुमान को सिंदूर, चमेली का तेल, नारियल और मोदक या लड्डू अर्पित करते हैं। मनोकामनाएं पूरी होने की खुशी में कई श्रद्धालु मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन भी कराते हैं, जिसमें आम लोगों को प्रसाद वितरित किया जाता है। दिनभर परिसर में 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के गूंजते जयकारे माहौल को दिव्य बनाते हैं। गोंडा ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से भी श्रद्धालु इस पावन धाम में शीश नवाने आते हैं।

सवाल-जवाब

गोंडा का प्राचीन हनुमान मंदिर कहां स्थित है और इसकी क्या मान्यता है?
यह पावन मंदिर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मंदिर में हनुमान जी की नई प्रतिमा कैसे पहुंची थी?
पिछले नवरात्रि में एक व्यक्ति ठेले पर भगवान हनुमान की प्रतिमा लेकर मंदिर आया था, क्योंकि उसके गांव में प्रतिमा की नियमित पूजा नहीं हो पा रही थी।
हनुमान जी की प्रतिमा की स्थापना मंदिर में किसके द्वारा की गई?
महंत राजन महाराज और उनके पिता ने विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा करके प्रतिमा को शीतला माता मंदिर के नीचे स्थापित किया।
मंदिर में किन दिनों और पर्वों पर विशेष भीड़ उमड़ती है?
हर मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ रहती है। इसके अलावा सावन, हनुमान जयंती और बड़े मंगल पर मंदिर परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
श्रद्धालु भगवान हनुमान को क्या सामग्री अर्पित करते हैं?
भक्तजन हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, नारियल और लड्डू अर्पित करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर भंडारा भी कराते हैं।
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