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निर्जला एकादशी 2026: बिना अन्न और जल वाले इस कठिन व्रत की संपूर्ण विधि, संकल्प से लेकर पारण तक हर कदम आसान भाषा मेंधर्म
24 जून 2026, 9:33 am (46 दिन पहले)· 3

निर्जला एकादशी 2026: बिना अन्न और जल वाले इस कठिन व्रत की संपूर्ण विधि, संकल्प से लेकर पारण तक हर कदम आसान भाषा में

साल का सबसे कठिन माना जाने वाला निर्जला एकादशी व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए यहां दशमी की तैयारी से लेकर अगले दिन पारण तक की पूरी विधि स्टेप बाय स्टेप दी गई है।

सालभर में पड़ने वाली सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे बड़ा और सबसे कठिन व्रत माना जाता है। इस व्रत की खास बात यह है कि इसमें पूरे 24 घंटे न तो अन्न खाया जाता है और न ही पानी की एक बूंद पी जाती है। इसी कठिनाई की वजह से धार्मिक मान्यताओं में इसे 'व्रतों का राजा' कहा गया है। इस साल यह व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जा रहा है। अगर आप पहली बार यह व्रत रखने का मन बना रहे हैं, तो आपके मन में कई सवाल उठना स्वाभाविक है, जैसे व्रत की शुरुआत कैसे करें, क्या सच में पानी बिल्कुल नहीं पीना है और अगले दिन पारण किस तरह किया जाता है। नीचे हर कदम को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि कोई कन्फ्यूजन न रहे।

व्रत की तैयारी एक दिन पहले से

निर्जला एकादशी की तैयारी असल में एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही शुरू हो जाती है। इस दिन सिर्फ सात्विक भोजन ही करें। खासकर दशमी की रात को प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा जैसी तामसिक चीजों से पूरी तरह दूर रहें। कोशिश करें कि इस दिन का खाना हल्का और सादा हो, ताकि अगले दिन व्रत आसानी से निभाया जा सके।

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एकादशी की सुबह क्या करें

व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले ही उठ जाएं और स्नान कर लें। अगर संभव हो तो नहाने के बाद पीले रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर दिन की शुरुआत करें।

संकल्प कैसे लें

  • स्नान के बाद पूजा स्थल पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
  • फिर हाथ में थोड़ा गंगाजल, अक्षत और फूल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। इसी समय मन की मनोकामना भी भगवान से कहें। संकल्प पूरा होने पर हाथ में ली गई यह सामग्री भगवान के चरणों में चढ़ा दें।

दिनभर पानी और आचरण का नियम

  • ध्यान रहे, संकल्प लेने के बाद अगले दिन सूर्योदय तक पानी नहीं पीना है।
  • पूजा के दौरान सिर्फ तीन बार आचमन की छूट होती है, यानी हथेली में नाममात्र का जल लेकर पीना। लेकिन यह पानी सिर्फ कंठ तक रहना चाहिए, पेट तक नहीं जाना चाहिए। इसीलिए आचमन में जल की सिर्फ कुछ बूंदें ही ली जाती हैं।
  • इस दिन गुस्से से बचें, किसी का अपमान न करें और झूठ बोलने से दूर रहें। पूरे दिन मन ही मन भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करते रहें।

शाम की पूजा और रात्रि जागरण

  • शाम के समय भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें और निर्जला एकादशी की कथा सुनें।
  • कथा के बाद भगवान की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।
  • चाहें तो इस मौके पर विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।
  • इस व्रत में रात को जागकर भक्ति करने का खास महत्व है। हो सके तो पूरी रात भजन-कीर्तन करें या धार्मिक किताबें पढ़ें।

अगले दिन पारण की विधि और शुभ समय

  • व्रत के अगले दिन शुभ मुहूर्त में ही पारण करना चाहिए।
  • 26 जून 2026 को एकादशी व्रत के पारण का शुभ समय सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच रहेगा।
  • पारण से पहले स्नान करके भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करें।
  • इसके बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को जल से भरा घड़ा, अनाज, मौसमी फल, हाथ का पंखा और दक्षिणा दान करें।
  • दान करने के बाद ही अपना व्रत खोलें।

सवाल-जवाब

निर्जला एकादशी व्रत 2026 में कब है?
यह व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जा रहा है।
क्या इस व्रत में सच में पानी नहीं पी सकते?
हां, संकल्प के बाद अगले दिन सूर्योदय तक पानी नहीं पीना होता। सिर्फ पूजा के समय तीन बार आचमन में जल की कुछ बूंदें कंठ तक ली जा सकती हैं।
व्रत का पारण कब और किस समय करें?
अगले दिन 26 जून 2026 को सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच शुभ समय में पारण करना चाहिए।
व्रत की तैयारी कब से शुरू करनी चाहिए?
एक दिन पहले दशमी तिथि से ही तैयारी शुरू हो जाती है, जिसमें सात्विक भोजन करना और तामसिक चीजों से दूर रहना जरूरी है।
इस दिन किस मंत्र का जाप करना चाहिए?
पूरे दिन मन ही मन भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करना चाहिए।
पारण के समय क्या दान करना चाहिए?
किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को जल से भरा घड़ा, अनाज, मौसमी फल, हाथ का पंखा और दक्षिणा दान करनी चाहिए, और दान के बाद ही व्रत खोलना चाहिए।
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