एथेंस के पास सालामिना द्वीप पर भड़की भीषण आग, 2 की मौत के बाद समुद्र के रास्ते रेस्क्यू ऑपरेशन शुरूअंबेडकरनगर में IPS अधिकारी की 94 वर्षीय मां की संदिग्ध मौत पर अखिलेश यादव ने राज्य सरकार को घेरादुनिया के कई देशों में बोतलबंद पानी से भी सस्ती क्यों मिलती है बीयर, जानिए वजह और कतर जैसा उलटा हालखतरों के खिलाड़ी 15 के सेट पर पानी-हवा वाले स्टंट के दौरान जैस्मिन भसीन को लगा सिर में झटका, कंकशन की वजह से कुछ समय के लिए खो बैठीं याददाश्ततेजस्वी प्रकाश संग पुरानी अनबन पर सुरभि चंदना ने तोड़ी चुप्पी, रिश्ते और पेशेवर एकता पर कही बड़ी बातहोर्मुज की खाड़ी में 75 दिन मौत के साये में बिताकर लौटे कैप्टन रमन कपूर, मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा पर उठाई आवाजस्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद सियासी घमासान: पी. चिदंबरम की टिप्पणी पर रविशंकर प्रसाद का करारा हमलागुवाहाटी और आसपास के इलाकों में 17 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्टNTA का बड़ा फैसला: UGC NET जून 2026 के तीन विषयों की पुन: परीक्षा सितंबर में, देखें पूरा शेड्यूलराजस्थान के 15 जिलों में 5,755 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत, अमित शाह और भजनलाल शर्मा ने निंबाहेड़ा से दिया तोहफा
पुरी की रथ यात्रा में मटके फोड़कर बहाया जाता है यह रहस्यमयी भोग, जानें क्यों कोई इंसान इसे छू भी नहीं सकताधर्म
17 जुल॰ 2026, 8:57 am (31 दिन पहले)· 5

पुरी की रथ यात्रा में मटके फोड़कर बहाया जाता है यह रहस्यमयी भोग, जानें क्यों कोई इंसान इसे छू भी नहीं सकता

ओडिशा के पुरी में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में मिट्टी के घड़ों में भरकर एक खास भोग रथों पर रखा जाता है और फिर जानबूझकर तोड़ दिया जाता है, लेकिन यह प्रसाद कोई इंसान ग्रहण नहीं कर सकता। इस परंपरा को अधर पना कहा जाता है और इसके पीछे अदृश्य शक्तियों से जुड़ी गहरी मान्यता है।

ओडिशा के पुरी में हर साल निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। यात्रा के दौरान मिट्टी के बड़े-बड़े घड़ों में एक खास भोग भरकर उन्हें जानबूझकर फोड़ दिया जाता है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि यह प्रसाद न तो कोई पुजारी खाता है और न ही यात्रा में शामिल कोई श्रद्धालु। आखिर ऐसा क्यों किया जाता है और इस अनोखी रस्म के पीछे कौन सी मान्यता छिपी है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

अधर पना नाम की इस परंपरा का राज़

रथ यात्रा के दौरान प्रसाद गिराने वाली इस परंपरा को अधर पना कहा जाता है, और यह पूरी यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। यह खास रस्म हर साल आषाढ़ महीने की त्रयोदशी तिथि को निभाई जाती है। इस दिन मिट्टी से बनाए गए बर्तनों में एक विशेष पेय पदार्थ भरा जाता है, जिसका रंग सफेद होता है। इस पेय को दूध, पनीर, चीनी, केला, तुलसी, दालचीनी, जायफल जैसी कई सुगंधित चीजों को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसे मिट्टी के बड़े बर्तनों में भरने के बाद अदृश्य शक्तियों को अर्पित कर दिया जाता है। मान्यता है कि इस यात्रा में सिर्फ इंसान ही शामिल नहीं होते, बल्कि अदृश्य और पवित्र शक्तियां भी इसमें भाग लेती हैं। इन्हीं शक्तियों को तृप्त करने के लिए रथों पर रखे गए इस विशेष भोग के घड़ों को तोड़ा जाता है।

ये भी पढ़ें

कैसे निभाई जाती है यह खास रस्म

इस परंपरा के तहत मिट्टी के तीन बड़े-बड़े बर्तनों में यह खास शरबत भरा जाता है। इसके बाद इन तीनों बर्तनों को तीनों रथों पर इस तरह रखा जाता है कि इनकी ऊंचाई भगवान के होंठों के पास हो। पूजा-अर्चना पूरी होने के बाद इन घड़ों को तोड़ दिया जाता है, जिससे सारा प्रसाद बहकर रथ के चारों ओर फैल जाता है। यह जगन्नाथ धाम का एक ऐसा महाप्रसाद है, जिसे न तो कोई भक्त ग्रहण कर सकता है और न ही मंदिर का कोई पुजारी। इस पूरी प्रक्रिया में हर कदम पर एक खास विधि-विधान का पालन किया जाता है, ताकि यह भोग सही तरीके से उन शक्तियों तक पहुंच सके, जिनके लिए यह तैयार किया गया है।

आखिर इंसान इस भोग को क्यों नहीं खा सकते

शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, यह भोग उन सूक्ष्म जीवों, आत्माओं और पारलौकिक शक्तियों के लिए तैयार किया जाता है, जो भगवान के दर्शन करने के लिए इस यात्रा में शामिल होती हैं। यही वजह है कि इस प्रसाद को इंसानों के छूने की सख्त मनाही है। मान्यता है कि यदि कोई मनुष्य इस भोग को ग्रहण करने की कोशिश करता है, तो इसे अदृश्य शक्तियों के अधिकार में सीधा हस्तक्षेप माना जाता है। यही कारण है कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा में आज भी पूरी सावधानी के साथ इस नियम का पालन किया जाता है और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह पुजारी हो या श्रद्धालु, इस भोग को छूने की हिम्मत नहीं करता।

सवाल-जवाब

अधर पना क्या है?
यह जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान निभाई जाने वाली एक परंपरा है, जिसमें मिट्टी के घड़ों में भरे एक खास भोग को रथों पर रखकर तोड़ दिया जाता है।
अधर पना कब निभाया जाता है?
यह रस्म हर साल आषाढ़ महीने की त्रयोदशी तिथि को निभाई जाती है।
अधर पना में कौन-कौन सी चीजें डाली जाती हैं?
इसमें दूध, पनीर, चीनी, केला, तुलसी, दालचीनी और जायफल समेत कई सुगंधित चीजें मिलाई जाती हैं।
यह प्रसाद इंसान क्यों नहीं खा सकते?
मान्यता है कि यह भोग सूक्ष्म जीवों, आत्माओं और पारलौकिक शक्तियों के लिए होता है, इसलिए इंसानों को इसे छूने की मनाही है।
घड़ों को रथ पर किस तरह रखा जाता है?
तीनों घड़ों को तीनों रथों पर इस तरह रखा जाता है कि इनकी ऊंचाई भगवान के होंठों के पास हो।
घड़े तोड़ने के बाद प्रसाद का क्या होता है?
घड़े तोड़ने के बाद सारा प्रसाद बहकर रथ के चारों ओर फैल जाता है।
क्या मंदिर के पुजारी यह प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं?
नहीं, यह महाप्रसाद न तो कोई भक्त ग्रहण कर सकता है और न ही मंदिर का कोई पुजारी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR