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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कोषाध्यक्ष का बड़ा बयान, चंपत राय पर आज भी भरोसा बरकरारधर्म
7 जुल॰ 2026, 11:34 am (39 दिन पहले)· 2

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कोषाध्यक्ष का बड़ा बयान, चंपत राय पर आज भी भरोसा बरकरार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने चढ़ावा चोरी मामले पर पहली बार खुलकर बात की और SBI तथा IAS अफसरों की लापरवाही को इसकी वजह बताया।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हलचल मच गई है। सोमवार को हुई अहम बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया, यानी अब दोनों राम मंदिर से जुड़ा कोई काम नहीं देखेंगे। इस पूरे विवाद पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने खुलकर अपनी बात रखी और साफ कहा कि तय मानक संचालन प्रक्रिया यानी SoP का सख्ती से पालन न होने की वजह से ही यह चोरी हो पाई।

तिजोरी की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी

गोविंद देव गिरि ने अपनी भूमिका साफ करते हुए कहा कि कोषाध्यक्ष के तौर पर उनका काम कोष में जमा राशि की सुरक्षा करना और उसके आय व्यय का हिसाब रखना है, रोजाना आने वाले चढ़ावे पर नजर रखना उनके दायरे में नहीं आता। उन्होंने बताया कि चढ़ावे की निगरानी की जिम्मेदारी मंदिर परिसर में रहने वाले लोगों की थी, और इस काम की मुख्य जवाबदेही अनिल मिश्रा के पास थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गोपाल राव न तो ट्रस्ट में थे और न ही ट्रस्टी थे। कर्मचारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI की थी और ट्रस्ट ने पूरा भरोसा SBI पर छोड़ रखा था। उनका कहना था कि SBI की तरफ से बरती गई ढिलाई की वजह से ही चढ़ावे में चोरी हो सकी, क्योंकि चढ़ावे में आ रही कमी को लेकर उन्हें कभी सचेत नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें समय पर इसकी जानकारी दी गई होती तो वे तुरंत कार्रवाई करते, लेकिन वे हर दिन या हर महीने का हिसाब खुद नहीं देखते और अपने साथियों पर भरोसा किया गया।

चंपत राय पर आज भी भरोसा, लेकिन निगरानी में चूक

गोविंद देव गिरि ने ट्रस्ट के खर्च का पूरा ब्योरा भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि अब तक 2 हजार 370 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि ट्रस्ट के पास कुल 3 हजार 264 करोड़ रुपये की राशि आई थी। 30 जून तक ट्रस्ट के पास 1800 करोड़ रुपये शेष बचे हुए हैं। इसी साल ट्रस्ट ने 20 करोड़ 16 लाख 7 हजार 50 रुपये की जमीन भी खरीदी है। इन आंकड़ों के बीच उन्होंने साफ कहा कि चंपत राय पर आज भी उन्हें पूरा भरोसा है और चंपत राय ने कोई गबन नहीं किया है। उनके मुताबिक चंपत राय से बस इतनी चूक हुई कि उन्होंने निगरानी नहीं की, और जिन लोगों पर उन्होंने भरोसा किया, उन्हीं लोगों ने चोरी को अंजाम दिया। गोविंद देव गिरि ने इसे अति निर्भरता का नतीजा बताया और कहा कि इसी भाव की वजह से चंपत राय से गलतियां हुईं।

SBI के नाम पर भरोसा, IAS अफसरों पर भी सवाल

कोषाध्यक्ष ने बताया कि ट्रस्ट में SoP को लेकर कभी कोई चर्चा ही नहीं हुई। उन्हें बताया गया था कि पूरा ऑपरेशन SBI देख रही है, और सिर्फ SBI का नाम होने की वजह से ट्रस्ट ने बिना सवाल किए भरोसा कर लिया। उन्होंने आशंका जताई कि अनिल मिश्रा की नियुक्ति उन्हीं की सिफारिश पर हुई हो सकती है, और अगर SBI ने अनिल मिश्रा की सिफारिश को बिना जांचे लागू कर दिया तो यह SBI की गलती है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रस्ट में शामिल 4 IAS अफसरों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन IAS अफसरों को भी इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन उनकी तरफ से भी ढिलाई बरती गई। गोविंद देव गिरि ने याद दिलाया कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के मकसद से ही IAS अफसरों को ट्रस्ट में शामिल किया गया था, इसलिए ट्रस्ट को समय रहते आगाह करना उनकी भी जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में शामिल IAS अफसर इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

चंपत राय की छवि पर आंच नहीं

गोविंद देव गिरि ने चंपत राय के बचाव में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि चंपत राय अब ट्रस्ट और न्यासी पद, दोनों से मुक्त हो चुके हैं और फिलहाल कोई भूमिका नहीं निभाएंगे, हालांकि वे अभी भी अयोध्या में ही मौजूद हैं। उन्होंने चंपत राय को निर्मल, सत्य के अन्वेषी और निष्कलंक व्यक्ति बताया और कहा कि वे पिछले 32 वर्षों से उन्हें जानते हैं। उनके मुताबिक चंपत राय हमेशा एक समर्पित प्रचारक के तौर पर काम करते रहे हैं, और उनके त्याग व समर्पण को कम करके नहीं आंका जा सकता। गोविंद देव गिरि ने कहा कि चंपत राय के लिए उन्हें बहुत आदर है और उनकी सज्जनता पर उन्हें कोई शक नहीं, हालांकि कभी-कभी सज्जन व्यक्ति से भी गलती हो जाती है।

नई नियुक्तियां और आगे की राह

कोषाध्यक्ष ने बताया कि ट्रस्ट अपना पुराना भरोसा फिर से हासिल करने की कोशिश करेगा और नई नियुक्तियों को लेकर तीन लोगों से चर्चा की जाएगी। ये तीन नाम हैं, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेद और उद्योगपति व शिरडी साईं संस्थान के प्रमुख सुरेश हावरे। ये तीनों जिन लोगों के नाम सुझाएंगे, उन्हीं की नियुक्ति की जाएगी। गोविंद देव गिरि ने यह भी कहा कि चंपत राय खुद भी एक साधु हैं, इसलिए यह गड़बड़ी हो पाई, क्योंकि साधु संत तो भजन कीर्तन में ही मन लगाते हैं। उन्होंने SIT यानी विशेष जांच दल की जांच पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि विपक्ष हिंदू समाज को तोड़ना चाहता है। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि कारसेवकों पर गोली चलाने वाले लोग आज रामभक्त कैसे बन गए, और लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील की। उन्होंने अंत में कहा कि वे रामराज्य लाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध हैं।

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सवाल-जवाब

चढ़ावा चोरी के बाद ट्रस्ट में किन लोगों का इस्तीफा मंजूर हुआ?
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर किया गया, अब दोनों राम मंदिर का काम नहीं देखेंगे।
स्वामी गोविंद देव गिरि के मुताबिक चोरी क्यों हुई?
उनके अनुसार तय SoP का सख्ती से पालन न होने और SBI की ढिलाई की वजह से चढ़ावे में चोरी हुई।
चढ़ावे की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?
गोविंद देव गिरि के मुताबिक निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी अनिल मिश्रा और मंदिर में रहने वाले लोगों की थी, जबकि कर्मचारियों की नियुक्ति SBI करती थी।
ट्रस्ट के पास अब तक कितनी राशि आई और कितनी खर्च हुई?
ट्रस्ट के पास कुल 3264 करोड़ रुपये आए, जिसमें से 2370 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और 30 जून तक 1800 करोड़ रुपये शेष हैं।
क्या चंपत राय पर गबन का आरोप है?
गोविंद देव गिरि के मुताबिक चंपत राय ने कोई गबन नहीं किया, उनसे सिर्फ निगरानी न करने की चूक हुई।
ट्रस्ट में नई नियुक्तियों को लेकर किन लोगों से चर्चा होगी?
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेद और उद्योगपति सुरेश हावरे से चर्चा कर नई नियुक्तियां की जाएंगी।
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