भगवान भोलेनाथ को संतुष्ट करने के लिए शिवभक्त विभिन्न प्रकार की चीजें अर्पित करते हैं, जिनमें शमी के फूल और पत्तों का स्थान बेहद खास माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग पर शमी के पौधे के पुष्प और पत्र अर्पित करने से शिवजी बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं। विशेष तौर पर सावन के पावन माह के दौरान जो श्रद्धालु शिवलिंग पर शमी पत्र और फूल चढ़ाते हैं, उन्हें उनकी इच्छा के अनुरूप फल की प्राप्ति होती है।
धतूरे के फूल का विशेष महत्व
आम तौर पर यह देखा जाता है कि धतूरे का पुष्प सावन के सीजन में अत्यधिक फलता-फूलता है और खिलता है। धतूरे का यह फूल भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय होता है। ऐसा माना जाता है कि इसे अर्पित करने से मनुष्यों की प्रत्येक मनोकामना कम समय में ही पूरी हो जाती है। इस विषय में जानकार बंशीधर झा का कहना है कि धर्मशास्त्र के मुताबिक समुद्र मंथन के वक्त उत्पन्न हुए विष को महादेव ने ही पिया था। इसी वजह से उनके शरीर पर विष का प्रभाव सावन के दिनों में बढ़ जाता है। यही कारण है कि सावन का मास सबसे महत्वपूर्ण होता है और इस अवधि में शिव के उपासक शिवलिंग पर धतूरे के पुष्प चढ़ाते हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि धतूरे का फूल अर्पित करने से भगवान शिव पर विष का प्रभाव घटता है। इसके अलावा शिवलिंग पर धतूरे का फूल चढ़ाने से महादेव संतुष्ट होते हैं और अपने चाहने वालों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करते हैं।
भांग के पत्ते और नकारात्मकता का नाश
सावन के दौरान शिवलिंग पर कई वस्तुएं अर्पित की जाती हैं लेकिन इस बीच भांग के पत्ते चढ़ाने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वास्तव में ऐसा कहा जाता है कि भांग के पत्र अर्पित करने से इंसानों के जीवन में मौजूद नकारात्मकता सहज ही समाप्त हो जाती है। इसके अलावा आयुर्वेद के दृष्टिकोण से भी भांग के अंदर कई प्रकार के औषधीय तत्व पाए जाते हैं। शिवलिंग पर भांग के पत्ते चढ़ाने से मनुष्यों के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है, ऐसी धार्मिक मान्यता है।
बेलपत्र के बिना अधूरी है पूजा
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से महादेव अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके तीन पत्र ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों ऊर्जाओं के प्रतीक माने जाते हैं। इसे अर्पित करने से शिव के भक्तों पर भगवान की विशेष अनुकंपा बनी रहती है। बेलपत्र को कई सारे औषधीय गुणों का भंडार भी कहा जाता है। बेलपत्र के पेड़ इंसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं। यह मानव जाति को सबसे अधिक शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करता है। शिव जी की आराधना में यदि बेलपत्र शामिल न हो तो उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है। ऐसे में इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि शिव जी की उपासना करते वक्त शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। हालांकि कभी भी कटा-फटा या खंडित बेलपत्र शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए।
दूर्वा घास चढ़ाने के लाभ
शिवलिंग पर दूर्वा घास अर्पित करना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। ऐसा बताया जाता है कि दूर्वा भगवान शिव को बहुत पसंद है। दूर्वा चढ़ाने से भोलेनाथ संतुष्ट होते हैं और अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करते हैं। दूर्वा अर्पित करने से इंसानों के जीवन में आने वाली तमाम प्रकार की बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हमेशा बना रहता है। दूर्वा का रंग हरा होता है और इससे लोगों के जीवन में हमेशा हरियाली व खुशहाली बनी रहती है।



















