देवघर में जब किसी व्यक्ति की कुंडली पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव पड़ता है, तो उसका पूरा जीवन समस्याओं और कठिनाइयों से घिर जाता है। वैदिक ज्योतिष में इन कष्टदायक प्रभावों से बचने के लिए कई तरह के उपाय सुझाए गए हैं। वर्तमान में सावन का पवित्र महीना चल रहा है और 9 अगस्त, शनिवार को सावन पूर्णिमा के अवसर पर सावन मास का समापन हो रहा है। इस आखिरी दिन पर कुछ विशिष्ट उपाय करने से शनि के दोषों से काफी हद तक राहत हासिल की जा सकती है। देवघर के एक जाने-माने ज्योतिषाचार्य ने इन विशेष उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
देवघर के ज्योतिषाचार्य की सलाह
देवघर के पागल बाबा आश्रम के अंतर्गत आने वाले मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने एक बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि सावन का अंतिम दिन 9 अगस्त और शनिवार के दिन पड़ रहा है। इस पावन अवसर पर यदि विधि-विधान के साथ भगवान शिव की आराधना की जाए, तो पूरे वर्ष भक्त की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही जीवन से तमाम प्रकार के दुख, दरिद्रता, बीमारियां और भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं। इस विशेष दिन पर यदि कुछ खास अनुष्ठान और उपाय कर लिए जाएं, तो शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के बुरे प्रभावों से भी तुरंत मुक्ति मिल जाती है।
सावन के अंतिम दिन करने योग्य अचूक उपाय
ज्योतिषाचार्य का मार्गदर्शन है कि यदि आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दुष्प्रभावों से लगातार परेशान चल रहे हैं, तो सावन के आखिरी दिन यानी 9 अगस्त, शनिवार के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय उसमें थोड़ा सा तिल जरूर मिलाएं। इसके अलावा, पास के किसी शनि मंदिर में जाकर शनिदेव को सरसों के तेल से स्नान कराएं। मंदिर में सरसों के तेल का एक दीपक प्रज्वलित करें और वहीं बैठकर शनि चालीसा का पाठ करें। यह अचूक और प्रभावी उपाय न केवल आपको शनि के साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से राहत दिलाएगा, बल्कि आपके सभी प्रकार के कर्जों, मानसिक तनाव और गंभीर बीमारियों से भी हमेशा के लिए छुटकारा दिला देगा।

















