जापान का केंद्रीय बैंक दिसंबर में बढ़ा सकता है ब्याज दरें, अर्थशास्त्रियों के नए सर्वेक्षण में बड़े नीतिगत बदलाव के संकेतकच्चे तेल में भारी उछाल के बीच डब्ल्यूटीआई 100 डॉलर के पार, वैश्विक समुद्री मार्गों पर गहराया संकटसैमसंग ने फिर हासिल किया पहला स्थान पर भारतीय स्मार्टफोन बाजार में आई दशक की सबसे बड़ी मंदीजापानी येन पर बना दबाव, अमेरिकी डॉलर 158.50 के स्तर के पास मजबूत स्थिति मेंअमेरिकी डॉलर में सुस्ती से स्विस फ्रैंक मजबूत, क्या 0.8225 का अहम सपोर्ट तोड़ पाएगा यूएसडी सीएचएफरक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं, भाई की कलाई पर रक्षासूत्र सजाने से पहले करें यह विशेष पूजनदिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण पर सख्त एक्शन प्लान, बिना वैध पीयूसीसी नहीं मिलेगा ईंधन और पुरानी बाहरी गाड़ियों का प्रवेश बंदभिवाड़ी के सांथलका में पैकेजिंग इकाई आग की चपेट में आई, कर्मचारियों की सूझबूझ से बचीं जानेंरिश्ता तय होने के बाद टूटने पर शादी की तैयारियों में डूबी रकम की कानूनी वसूली कैसे संभव हैडीग के बड़ेसरा में चारे के ढेर में मिले 13 साल के जुड़वा भाइयों के शव, सिर पर गंभीर चोटों के बाद जांच तेज
21 अक्टूबर को लगेगा चंद्र ग्रहण दोष, जानिए आपकी मानसिक स्थिति पर क्या पड़ेगा असर और उपायधर्म
21 अक्तू॰ 2026, 4:56 am (2 घंटे पहले)· 2

21 अक्टूबर को लगेगा चंद्र ग्रहण दोष, जानिए आपकी मानसिक स्थिति पर क्या पड़ेगा असर और उपाय

21 अक्टूबर 2026 को चंद्रमा और राहु की युति से चंद्र ग्रहण दोष बनेगा, जो मन और भावनाओं को प्रभावित कर सकता है। ज्योतिष शास्त्र में इसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के साथ बचाव के उपाय बताए गए हैं।

वैदिक ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, भावनाओं और मन का प्रतिनिधित्व करने वाले चंद्रमा का मिलन भ्रम पैदा करने वाले राहु से होने जा रहा है। आगामी 21 अक्टूबर 2026 की सुबह चंद्रमा और राहु की युति बनेगी, जिसे ज्योतिषीय भाषा में चंद्र ग्रहण दोष के रूप में जाना जाता है। इस खगोलीय और ज्योतिषीय घटना के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर दोनों तरह के असर देखने को मिल सकते हैं, जिन्हें लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं।

कुंभ राशि में ग्रहों का मिलन

निर्धारित समय के अनुसार 21 अक्टूबर की सुबह लगभग 7 बजे चंद्रमा कुंभ राशि के भीतर गोचर करेंगे। इस विशेष राशि में राहु पहले से ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराए हुए हैं। दोनों ग्रहों के एक ही राशि में आने से चंद्र ग्रहण दोष का निर्माण होता है। ज्योतिषीय आकलनों के अनुसार, किसी जातक की जन्मकुंडली में इन दोनों ग्रहों की मूल स्थिति के आधार पर इसके प्रभावों में भिन्नता आ सकती है।

ये भी पढ़ें

जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत

इस युति को लेकर ऐसा माना जाता है कि यह व्यक्ति को अपनी वर्तमान परिस्थितियों का अवलोकन एक नए दृष्टिकोण से करने की ऊर्जा दे सकती है। इस अवधि के दौरान लोगों में किसी भी महत्वपूर्ण फैसले पर पहुँचने से पहले उसके दूरगामी परिणामों का आकलन करने तथा तार्किक सोच के आधार पर आगे बढ़ने का रुझान बढ़ सकता है। इसके अलावा, अटके हुए या दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ पूरा करने के लिए प्रेरित महसूस किया जा सकता है।

संभावित नकारात्मक परिणाम और मानसिक प्रभाव

दूसरी तरफ, इस युति के नकारात्मक पहलुओं में अत्यधिक बेचैनी, मन की घबराहट, भावनाओं में उतार-चढ़ाव और निर्णय लेने में दुविधा की स्थिति उत्पन्न होना शामिल माना जाता है। कुछ धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अंतर्गत इसे सिरदर्द या नींद न आने जैसी समस्याओं से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, इन शारीरिक लक्षणों को केवल ग्रहों की चाल तक सीमित रखना ठीक नहीं है और किसी भी लगातार स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सीय परामर्श लेना आवश्यक होता है।

चंद्रमा के दोष को शांत करने की प्रक्रिया

ज्योतिषीय परंपराओं में चंद्रमा से जुड़े कष्टों और अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए कुछ विशेष विधान सुझाए गए हैं।

  • शिव आराधना और दान: भगवान शिव की नियमित पूजा-अर्चना करने, अपनी माता की सेवा करने तथा जल और दूध का दान करने से लाभ मिलता है।
  • मंत्र और सफेद वस्तुएं: 'ऊं चंद्राय नमः' मंत्र का सविधि जाप करने के साथ सफेद रंग की वस्तुओं का दान करना मन में शांति का भाव उत्पन्न करता है।

राहु के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति के उपाय

राहु ग्रह के कारण उत्पन्न होने वाले मानसिक तनाव या बाधाओं को शांत करने के लिए भी कई उपाय बताए गए हैं।

  • देव आराधना: राहु के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए 'ऊं रां राहवे नमः' मंत्र का उच्चारण करने के साथ माँ दुर्गा, भगवान भैरव और देवी सरस्वती की पूजा करने की परंपरा है।
  • शनिवार के अनुष्ठान: शनिवार के दिन जरूरतमंद लोगों की सहायता करने के साथ-साथ काले तिल, सूखा नारियल और उड़द की दाल का दान करना उत्तम माना जाता है।
  • रत्न धारण करने की चेतावनी: गोमेद या मोती जैसे रत्नों को कभी भी बिना किसी योग्य ज्योतिषीय सलाह के सीधे धारण नहीं करना चाहिए।

सवाल-जवाब

चंद्र ग्रहण दोष कब बनेगा?
यह दोष 21 अक्टूबर 2026 की सुबह चंद्रमा और राहु की युति के कारण बनेगा।
यह युति किस राशि में बन रही है?
चंद्रमा और राहु की यह युति कुंभ राशि में बनेगी।
इस युति के क्या नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं?
इसके नकारात्मक प्रभावों में बेचैनी, चिंता, भावनात्मक अस्थिरता और निर्णय लेने में भ्रम शामिल हैं।
चंद्रमा के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
भगवान शिव की पूजा, माता की सेवा, जल व दूध का दान और ऊं चंद्राय नमः का जाप करना चाहिए।
राहु के प्रभाव को शांत करने के कौन से उपाय हैं?
ऊं रां राहवे नमः का जाप, माँ दुर्गा और भगवान भैरव की पूजा तथा शनिवार को जरूरतमंदों की सेवा करना शामिल है।
क्या गोमेद या मोती रत्न अपनी मर्जी से पहन सकते हैं?
गोमेद या मोती जैसे रत्न बिना ज्योतिषीय सलाह के धारण नहीं करने चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·52 मिनट पहले

पिछली बार जब ऐसा योग बना था, तब मेरा पूरा हफ्ता बिना सिरदर्द के नहीं बीता था। इस बार पहले से ही थोड़ा संभल कर चलना पड़ेगा।

Ananya Iyer@ananya-iyer·52 मिनट पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है! पिछली बार जब ऐसा योग बना था, तब मेरे एक दोस्त को भी लगातार सिरदर्द और अजीब सी बेचैनी हुई थी।

Rohan Gupta@rohan-gupta·1 घंटे पहले

कुंभ राशि में सुबह सात बजे चंद्रमा और राहु का मिलना थोड़ा अजीब है, वैसे भी आजकल नींद पूरी न होने की समस्या वैसे ही आम हो गई है।

Kavya Nair@kavya-nair·1 घंटे पहले

रोहन, नींद की बात सही है, पर कुंभ राशि वाला चक्कर थोड़ा ज़्यादा ही लग रहा है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp