स्कूल से लौटते ही बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने और उनके करीब आने के लिए रोज पूछें 5 खास बातेंईरानी एयरलाइन के सपोर्ट नेटवर्क पर अमेरिकी चाबुक, भारत समेत चार देशों की संस्थाओं पर लगा बैनआनंद नगर और कुंदा नगर में मरीज मिलते ही खरगोन स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 1.90 लाख मकान खंगाले गएअमेज़न प्राइम वीडियो के शो द ट्रेटर्स 2 का हिस्सा बनीं शाहनील गिल, स्क्रीन पर माइंड गेम खेलती आएंगी नजरलंका प्रीमियर लीग में 22 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए विजय शंकर ने खेली 5 डॉट बॉल, अंतिम गेंद पर गंवाया विकेटबिटकॉइन 50-दिवसीय EMA के करीब पहुंचा, एथेरियम में सुस्ती और XRP 1.07 डॉलर के स्तर पर मजबूतजापान की क्वांटम सॉल्यूशंस ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेचे $1.9 Million के एथेरियमनए शो द ट्रेटर्स सीजन 2 के ऐलान संग श्वेता तिवारी की पहली प्रतिक्रिया, भरोसा करने पर लिखा क्रिप्टिक नोटसूरज बड़जात्या की नई फिल्म 'यह प्रेम मोल लिया' की शूटिंग संपन्न, भावुक होकर अनुपम खेर ने की निर्देशक की सराहनाअगस्त 2026 मासिक राशिफल: 12 राशियों पर ग्रहों के गोचर का प्रभाव और संपूर्ण भविष्यफल
तेलंगाना की पहाड़ी पर बिखरे 101 दिव्य शिवलिंग, जानिए रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर की पौराणिक गाथाधर्म
29 जुल॰ 2026, 5:20 pm (2 दिन पहले)· 0

तेलंगाना की पहाड़ी पर बिखरे 101 दिव्य शिवलिंग, जानिए रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर की पौराणिक गाथा

हैदराबाद के पास स्थित कीसरागुट्टा रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां पहाड़ी पर खुले आसमान के नीचे सैकड़ों शिवलिंग स्थापित हैं।

तेलंगाना राज्य में हैदराबाद से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक शांत पहाड़ी पर एक अत्यंत पवित्र और अनोखा शिव धाम स्थित है, जिसे दुनिया श्री रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से जानती है। आम तौर पर देश भर के शिव मंदिरों के गर्भगृह में केवल एक या दो शिवलिंग ही स्थापित देखे जाते हैं। हालांकि, कीसरागुट्टा की इस पावन पहाड़ी पर नजारा बिल्कुल अलग और विहंगम है। यहाँ मुख्य मंदिर परिसर से बाहर चारों ओर पहाड़ी की चट्टानों पर खुले आसमान के नीचे सैकड़ों शिवलिंग बिखरे हुए नजर आते हैं। यह दुर्लभ दृश्य श्रद्धालुओं को गहराई से आकर्षित करता है और यहाँ हर दिन दूर-दराज से भक्तों का तांता लगा रहता है।

त्रेतायुग और लंका विजय से जुड़ा पौराणिक इतिहास

इस मंदिर की स्थापना और इसकी मान्यता का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। स्थानीय लोक मान्यताओं और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस स्थान का सीधा संबंध त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के आगमन से है। लंकापति रावण का संहार करने के पश्चात भगवान राम पर ब्रह्महत्या का गंभीर दोष लगा था। इस महापाप के निवारण और भगवान शिव की भक्ति में लीन होने के लिए उन्होंने इसी शांत पहाड़ी को चुना। श्रीराम ने निर्णय लिया कि वे यहाँ एक पवित्र शिवलिंग की स्थापना करके देवों के देव महादेव का अनुष्ठान करेंगे।

ये भी पढ़ें

काशी से 101 शिवलिंग लाने का हनुमान जी का सफर

स्थानीय पुजारी लिंगा स्वामी बताते हैं कि अनुष्ठान के लिए शिवलिंग लाने का कार्य भगवान राम ने अपने परम भक्त हनुमान जी को सौंपा था। प्रभु की आज्ञा पाकर हनुमान जी तुरंत काशी के लिए रवाना हो गए। जब वे काशी पहुंचे, तो वहाँ कई अद्भुत और दिव्य शिवलिंगों को देखकर धर्मसंकट में पड़ गए कि प्रभु राम के अनुष्ठान के लिए कौन सा शिवलिंग सबसे श्रेष्ठ रहेगा। इसी उधेड़बुन और उलझन में हनुमान जी ने काशी से 101 शिवलिंग उठा लिए और उन्हें लेकर तेजी से वापस लौटने लगे।

स्वयंभू शिवलिंग का प्राकट्य और मंदिर का नामकरण

दूसरी तरफ, पहाड़ी पर शिवलिंग स्थापना का तय शुभ मुहूर्त बीता जा रहा था और हनुमान जी समय पर नहीं पहुंच सके थे। जब मुहूर्त हाथ से निकलता दिखाई दिया, तो स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए। महादेव ने भगवान श्रीराम की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें एक स्वयंभू शिवलिंग प्रदान किया। प्रभु राम ने बिना किसी विलंब के उस स्वयंभू शिवलिंग को पहाड़ी पर स्थापित कर पूजा-अर्चना संपन्न की। चूंकि इस पावन शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान राम ने की थी, इसीलिए इस मंदिर का नाम श्री रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर प्रसिद्ध हुआ।

हनुमान जी का वैराग्य, राम जी का वरदान और केसरीगिरी का नामकरण

जब हनुमान जी काशी से 101 शिवलिंग लेकर पहाड़ी पर पहुंचे, तब तक स्थापना का कार्य पूर्ण हो चुका था। यह देखकर हनुमान जी अत्यंत व्यथित और उदास हो गए। निराशा के भाव में उन्होंने अपने साथ लाए सभी 101 शिवलिंगों को उसी पहाड़ी पर छोड़ दिया। अपने अनन्य भक्त को दुखी देखकर भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को प्रेमपूर्वक गले से लगाया और एक विशेष वरदान दिया। श्रीराम ने कहा कि यहाँ आने वाला कोई भी श्रद्धालु मुख्य मंदिर में दर्शन करने से पहले पहाड़ी पर हनुमान जी द्वारा लाए गए इन शिवलिंगों की पूजा करेगा, तभी उसकी यात्रा और पूजा सफल मानी जाएगी। हनुमान जी के पिता केसरी के नाम पर इस पहाड़ी का नाम शुरुआत में केसरीगिरी रखा गया था, जो कालक्रम में बदलकर कीसरागुट्टा हो गया। आज भी श्रद्धालु पहले पहाड़ी पर बिखरे इन शिवलिंगों का नमन करते हैं, जो हनुमान जी की अनन्य भक्ति और श्रीराम के वरदान की जीवंत गवाही देते हैं।

सवाल-जवाब

कीसरागुट्टा रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर कहां स्थित है?
यह पावन मंदिर तेलंगाना राज्य में हैदराबाद शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक शांत पहाड़ी पर स्थित है।
मंदिर परिसर के बाहर पहाड़ी पर सैकड़ों शिवलिंग क्यों बिखरे हुए हैं?
हनुमान जी काशी से 101 शिवलिंग लाए थे। शुभ मुहूर्त बीतने के कारण जब वे देरी से पहुंचे, तो उन्होंने निराश होकर उन शिवलिंगों को पहाड़ी पर ही छोड़ दिया था।
इस मंदिर का नाम श्री रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर कैसे पड़ा?
भगवान शिव द्वारा दिए गए स्वयंभू शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी, इसीलिए इसका नाम श्री रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर पड़ा।
कीसरागुट्टा आने वाले श्रद्धालुओं को कौन सी विशेष परंपरा निभानी होती है?
भगवान राम के वरदान के अनुसार, श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर में पूजा करने से पहले पहाड़ी पर बिखरे हनुमान जी द्वारा लाए गए शिवलिंगों के दर्शन करने होते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR