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वाराणसी में बीमार पड़ते हैं प्रभु जगन्नाथ, 14 दिन चलता है गुप्त काढ़े का इलाजधर्म
3 जुल॰ 2026, 8:46 am (44 दिन पहले)· 3

वाराणसी में बीमार पड़ते हैं प्रभु जगन्नाथ, 14 दिन चलता है गुप्त काढ़े का इलाज

काशी के जगन्नाथ धाम में हर साल आषाढ़ माह में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा बीमार पड़ते हैं और 14 दिन तक पुजारी गुपचुप तरीके से तैयार आयुर्वेदिक काढ़े से उनका इलाज करते हैं, जिसका प्रसाद लेने भक्तों की भीड़ लगती है।

वाराणसी में गंगा किनारे बसा प्रभु जगन्नाथ का धाम देश का दूसरा सबसे प्राचीन जगन्नाथ मंदिर माना जाता है। इस धाम की सबसे अनोखी परंपरा है वह चमत्कारी काढ़ा, जो हर साल प्रभु जगन्नाथ को बीमारी के दौरान चढ़ाया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में पुजारी बेहद गोपनीय तरीके से इस काढ़े को तैयार करते हैं और इसी से बीमार पड़े प्रभु का इलाज किया जाता है।

14 दिन की बीमारी और एकांतवास

आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा से चतुर्दशी तिथि तक, यानी पूरे 14 दिनों तक प्रभु जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ बीमार रहते हैं। इस दौरान तीनों को स्वस्थ्य करने के लिए रोज आयुर्वेदिक काढ़े का भोग लगाया जाता है। प्रभु इन 14 दिनों तक पूरी तरह एकांतवास में रहते हैं और मंदिर का कपाट भी बंद कर दिया जाता है। इसके बावजूद भक्त इस काढ़े वाले प्रसाद को पाने के लिए मंदिर पहुंचना नहीं छोड़ते।

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चमत्कारी काढ़े का राज

मंदिर के प्रधान पुजारी राधेश्याम के मुताबिक, मान्यता है कि जो भक्त पूरे 14 दिनों तक लगातार यह काढ़ा पीता है, उसे हर तरह के शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिल जाती है और वह पूरे साल निरोग यानी बीमारियों से दूर रहता है। यही कारण है कि हर शाम काढ़े का प्रसाद लेने के लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। पुजारी बताते हैं कि प्रभु जगन्नाथ का यह काढ़ा औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसे लौंग, इलायची, काली मिर्च, तेजपत्ता, गुड़, तुलसी और मुलेठी सहित कई अन्य चीजों से तैयार किया जाता है। इसे बनाते समय पवित्रता का खास ध्यान रखा जाता है और सिर्फ पुजारी ही इसे गुपचुप तरीके से बनाकर प्रभु जगन्नाथ को भोग लगाते हैं।

परवल के जूस से स्वस्थ्य होकर निकलती है रथयात्रा

14 दिनों तक लगातार काढ़ा पीने के बाद आखिरी दिन प्रभु जगन्नाथ परवल का जूस पीकर पूरी तरह स्वस्थ्य हो जाते हैं। इसके बाद मनफेर की रस्म के तहत वो डोली में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। नगर भ्रमण के अगले ही दिन रथयात्रा निकाली जाती है। इसके बाद तीन दिनों तक प्रभु जगन्नाथ भक्तों के बीच ही रहते हैं और उनकी मुरादें सुनते हैं।

सवाल-जवाब

प्रभु जगन्नाथ कितने दिनों तक बीमार रहते हैं?
आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा से चतुर्दशी तिथि तक, यानी पूरे 14 दिनों तक प्रभु जगन्नाथ बीमार रहते हैं।
इस दौरान प्रभु के साथ और कौन बीमार रहता है?
प्रभु जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी इन 14 दिनों में बीमार रहते हैं।
काढ़ा किन चीजों से बनाया जाता है?
पुजारी के मुताबिक इसे लौंग, इलायची, काली मिर्च, तेजपत्ता, गुड़, तुलसी और मुलेठी सहित अन्य चीजों से तैयार किया जाता है।
काढ़ा कौन तैयार करता है और कैसे?
मंदिर के गर्भगृह में सिर्फ पुजारी ही पवित्रता का ध्यान रखते हुए गुपचुप तरीके से इस काढ़े को तैयार करते हैं।
काढ़ा पीने से भक्तों को क्या लाभ मिलने की मान्यता है?
मान्यता है कि जो भक्त पूरे 14 दिनों तक काढ़ा पीता है, उसे हर तरह के शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और वह पूरे साल निरोग रहता है।
14 दिनों के बाद प्रभु कैसे स्वस्थ्य होते हैं?
14वें दिन प्रभु जगन्नाथ परवल का जूस पीकर स्वस्थ्य हो जाते हैं, जिसके बाद वे डोली में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं।
नगर भ्रमण के बाद क्या होता है?
नगर भ्रमण के अगले दिन रथयात्रा निकाली जाती है और उसके बाद तीन दिनों तक प्रभु जगन्नाथ भक्तों के बीच रहकर उनकी मुरादें सुनते हैं।
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