भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए वैज्ञानिकों ने एंटीमैटर के एक कण को महीनों तक सफलतापूर्वक कैद करके रखा है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसकी संरचना को लेकर लंबे समय से कई सवाल बने हुए हैं। सिद्धांत रूप में एंटीमैटर को हर जगह मौजूद होना चाहिए था, क्योंकि गणितीय मॉडल बताते हैं कि हर साधारण कण का एक प्रतिकण होता है। हालांकि हमारे आसपास की दुनिया पूरी तरह सामान्य मैटर से बनी हुई है और इन दोनों के बीच का यह असंतुलन आज भी विज्ञान के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है।
कणों को कैद करने की बड़ी चुनौती
प्रयोगशालाओं में एंटीमैटर का निर्माण करना संभव है, लेकिन इसका अध्ययन करना बेहद कठिन काम है। एंटीमैटर जब भी किसी सामान्य मैटर के संपर्क में आता है, तो दोनों तुरंत नष्ट हो जाते हैं और भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। प्रयोगशालाओं को सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक वैक्यूम चैंबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल करते हैं, जो इन कणों को बिना छुए हवा में लटकाए रखते हैं। इसके बावजूद क्वांटम स्तर पर इन कणों के व्यवहार का अध्ययन करना वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का प्रयोग
इस बार के प्रयोग में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रॉनों के एंटीमैटर रूप यानी पॉजिट्रॉन को कैद किया। जेराल्ड गेब्रिएलसे के नेतृत्व में शोध टीम ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया जिसे सिंगल पॉजिट्रॉन क्वांटम साइक्लोट्रॉन कहा जाता है। इस उपकरण ने विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से पॉजिट्रॉन को शून्य के करीब तापमान पर एक वैक्यूम के भीतर स्थिर रखा। इस स्थिति में एंटीमैटर कण अपनी न्यूनतम ऊर्जा अवस्था में था, जिससे वैज्ञानिकों को उसके क्वांटम व्यवहार में नियंत्रित बदलाव करने का मौका मिला। इस विधि से कण नष्ट नहीं हुआ, जिसके चलते शोधकर्ताओं ने इस अकेले प्रतिकण को महीनों तक सुरक्षित रखा और बार-बार माप ली।
मैटर और एंटीमैटर की तुलना
एंटीमैटर कणों पर नियंत्रण पाने से विज्ञान को क्या नया सीखने को मिल सकता है? वैज्ञानिक यह जानते हैं कि मैटर और एंटीमैटर के गुण काफी हद तक एक जैसे होते हैं। उदाहरण के लिए, एक इलेक्ट्रॉन और एक पॉजिट्रॉन का द्रव्यमान बिल्कुल समान होता है, हालांकि उनके विद्युत आवेश एक-दूसरे से विपरीत होते हैं। इसके बावजूद यह सवाल अभी भी कायम है कि दोनों में कितनी समानताएं हैं और क्या कोई सूक्ष्म अंतर ऐसा भी है जो अब तक के प्रयोगों में पकड़ में नहीं आया है।
चुंबकीय गुणों की सटीक माप
इन सवालों के जवाब के लिए शोधकर्ता दोनों कणों के चुंबकीय गुणों की आपस में तुलना करना चाहते हैं। भौतिकविदों ने पहले ही इलेक्ट्रॉनों के साथ बेहद सटीक माप कर ली है, लेकिन पॉजिट्रॉन के मामले में वैसी सटीकता हासिल करना बेहद मुश्किल साबित हुआ था। अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी के अनुसार, यह नया उपकरण एंटीमैटर कणों की ऐसी माप संभव बना सकता है जो पहले की तुलना में लगभग 30 गुना अधिक सटीक होगी।
भविष्य के वैज्ञानिक नियम
अब तक के इस प्रयोग में दोनों कणों के बीच कोई भी अप्रत्याशित अंतर सामने नहीं आया है। शोधकर्ताओं की असल उपलब्धि एंटीमैटर कणों में इन भेदों का पता लगाने की उनकी क्षमता में सुधार होना है। यदि भविष्य के मापों में यह साबित हो जाता है कि पॉजिट्रॉन चुंबकीय क्षेत्रों पर इलेक्ट्रॉन से अलग प्रतिक्रिया देता है, तो वैज्ञानिकों को मैटर और एंटीमैटर के व्यवहार को समझाने वाले कुछ स्थापित नियमों में संशोधन करना पड़ सकता है।



















