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लैब के जानवरों की सुरक्षा पर उठे सवाल, नए ड्राफ्ट नियमों को लेकर चिंताएंविज्ञान
28 अक्तू॰ 2026, 9:11 pm (1 घंटे पहले)· 0

लैब के जानवरों की सुरक्षा पर उठे सवाल, नए ड्राफ्ट नियमों को लेकर चिंताएं

भारत सरकार द्वारा प्रयोगशालाओं में जानवरों के इस्तेमाल को लेकर लाए गए नए ड्राफ्ट नियमों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे जानवरों की सुरक्षा कमजोर हो सकती है और छूट का दायरा बढ़ सकता है।

भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान के दौरान इस्तेमाल होने वाले जानवरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। सरकार ने प्रयोगशालाओं में पशुओं के प्रयोग को लेकर कुछ नए नियमों का मसौदा पेश किया है, जिसे आम जनता की प्रतिक्रिया के लिए 6 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया था। इस ड्राफ्ट में कुछ सकारात्मक पहल भी नजर आती हैं, जैसे कि अनुसंधान में पशुओं के स्थान पर अन्य आधुनिक विकल्पों को प्राथमिकता देना और परीक्षणों के दौरान उन्हें होने वाली पीड़ा को कम करना। हालांकि, इसमें कई ऐसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं जो पशु कल्याण, उनकी आपूर्ति के स्रोतों और स्वतंत्र निगरानी तंत्र को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं। इन प्रस्तावित संशोधनों पर जनता और विशेषज्ञों द्वारा 5 नवंबर तक अपनी आपत्तियां व सुझाव दर्ज कराने का प्रावधान रखा गया था।

पशुओं की खरीद और स्रोतों का दायरा

सामान्य तौर पर यह अपेक्षा की जाती है कि प्रयोगशालाएं केवल रजिस्टर्ड प्रजनकों और व्यापारियों से ही जानवरों की खरीद करें, ताकि उनके मूल स्रोतों की पूरी पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन नए मसौदे में कुछ विशेष परिस्थितियों के तहत ऐसे अपवाद जोड़े गए हैं जो इन स्रोतों के दायरे को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। यदि अनुसंधान के लिए आवश्यक कुछ विशिष्ट पालतू पशु, कृषि से जुड़े जानवर, पक्षी या मछलियां किसी अधिकृत आपूर्तिकर्ता के पास उपलब्ध नहीं होती हैं, तो ऐसी स्थिति में प्रयोगशालाएं बिना पंजीकरण वाले संस्थानों या सीधे खुले बाजारों से भी इनकी खरीद कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए संस्थागत एथिक्स कमेटी की औपचारिक अनुमति, आवश्यक दस्तावेज और किसी योग्य पशु चिकित्सक द्वारा प्रमाणित क्वारंटीन की शर्तें पूरी करना अनिवार्य किया गया है।

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इसके अलावा, यह ड्राफ्ट जंगली जीवों के इस्तेमाल को लेकर भी कुछ विशेष छूट की अनुमति देता है, विशेषकर तब जब प्रयोगशाला में पाले गए जानवर अनुसंधान के उद्देश्यों को पूरा करने में असमर्थ साबित हों। हालांकि संरक्षित वन्यजीवों के मामले में कड़े प्रतिबंध और अनुमतियों का प्रावधान जारी रहता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह से इस दायरे से बाहर नहीं किया गया है। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि मसौदा अधिकारियों को उन सुरक्षा उपायों से भी छूट देने का अधिकार देता है जिनका उद्देश्य पकड़े जाने के दौरान या उसके बाद घायल या बीमार पाए गए जंगली जीवों की तकलीफ को कम करना होता है, बशर्ते इसके समर्थन में कोई वैज्ञानिक तर्क स्वीकार कर लिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुसंधान के लिए जानवरों का चयन करते समय उनके स्रोतों का सटीक रिकॉर्ड होना चाहिए और प्राकृतिक आवासों से जीवों को उठाने की प्रथा से बचना चाहिए।

आवारा और कम्युनिटी पशुओं की स्थिति

प्रस्तावित नियमों के तहत सड़कों पर घूमने वाले और बिना मालिक के रहने वाले बेसहारा जानवरों पर सीधे प्रयोग करने की सामान्य तौर पर मनाही की गई है। इसके बावजूद, कुछ विशेष परिस्थितियों में इस नियम से छूट दी जा सकने का प्रावधान है। इन अपवादों में जानवरों की अपनी सेहत या भलाई से जुड़ी कोई अत्यंत आवश्यक जरूरत, अथवा पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य या अन्य जीवों के लिए पैदा होने वाला कोई गंभीर खतरा शामिल है। इस तरह के प्रयोग करने वाले शोधकर्ताओं को यह साबित करना होगा कि उनका उद्देश्य किसी बेसहारा जानवर का उपयोग किए बिना किसी अन्य वैकल्पिक विधि से पूरा क्यों नहीं किया जा सकता है।

भले ही ये शर्तें सुरक्षा कवच के रूप में जोड़ी गई हों, लेकिन इनका यह अर्थ कतई नहीं है कि ऐसे जीवों पर परीक्षण की संभावनाओं पर पूरी तरह से विराम लग गया है। कम्युनिटी डॉग्स और बिल्लियों को अक्सर उनके आसपास रहने वाले लोग नियमित रूप से भोजन कराते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और कई बार उनका टीकाकरण भी करवाते हैं। ये जानवर उस स्थानीय समुदाय की दैनिक जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा होते हैं जिनके बीच वे पलते-बढ़ते हैं। इसलिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रयोगशालाओं में इनके उपयोग की अनुमति ऐसे लचीले अपवादों के जरिए नहीं दी जानी चाहिए, जिन्हें अन्य सुरक्षित तरीकों से टाला जा सके। यदि आवारा और कम्युनिटी पशुओं को इस प्रकार के परीक्षणों से पूरी तरह और स्पष्ट रूप से मुक्त कर दिया जाए, तो इस विषय पर बनी अनिश्चितता हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है।

निगरानी व्यवस्था और संस्थागत समितियां

नए मसौदे में परीक्षणों को मंजूरी देने वाली प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अंतर्गत, किसी भी प्रयोगशाला की अपनी आंतरिक एथिक्स कमेटी, जिसे इंस्टीट्यूशनल एनिमल एथिक्स कमेटी के रूप में जाना जाता है, हल्के या मध्यम श्रेणी के प्रयोगों को सीधे अपनी मंजूरी दे सकती है। इस प्रक्रिया में बड़े जानवरों पर किए जाने वाले कुछ चुनिंदा परीक्षण भी शामिल हैं। इसके लिए केंद्रीय नियामक संस्था यानी CCSEA की पूर्व अनुमति प्राप्त करना हर बार अनिवार्य नहीं होगा।

हालांकि गंभीर प्रकृति के प्रयोगों को हरी झंडी दिखाने का अधिकार केंद्रीय समिति के पास ही सुरक्षित रहेगा। इसके साथ ही, ऐसे परीक्षणों के लिए भी केंद्रीय निकाय की अनुमति आवश्यक होगी जिनमें प्रयोग समाप्त होने के बाद जानवर को पुनः होश में नहीं आने दिया जाता है, जिसे नॉन-रिकवरी एक्सपेरिमेंट कहा जाता है। यह प्रावधान चूहों और खरगोशों से बड़े आकार के जीवों पर होने वाले परीक्षणों पर लागू होगा। हालांकि संस्थागत समितियों में बाहरी सदस्यों को शामिल करने का नियम है, लेकिन किसी संस्थान की अपनी आंतरिक समिति से हरी झंडी मिलना और केंद्रीय स्तर पर स्वतंत्र निष्पक्ष जांच होना दोनों में काफी अंतर होता है। इसके अलावा, केंद्रीय नियामक की निरीक्षण टीमें जब पूर्व सूचना देकर किसी संस्थान का दौरा करती हैं, तो प्रयोगशालाओं को तैयारी करने का पर्याप्त अवसर मिल जाता है, इसलिए बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक होने वाले निरीक्षणों की व्यवस्था को भी प्रभावी रूप से बनाए रखना आवश्यक है।

गंभीर दर्द और प्रताड़ना का जोखिम

प्रस्तावित नियमों में उन परीक्षणों को गंभीर श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है जिनमें जानवरों को ऐसे असहनीय बिजली के झटके दिए जाते हैं जिनसे वे चाहकर भी बच नहीं सकते, या फिर सामाजिक स्वभाव वाले जीवों को लंबे समय तक पूरी तरह अकेले रखा जाता है। ड्राफ्ट उन प्रयोगों पर सैद्धांतिक रोक लगाता है जिनमें भारी दर्द, गहरी पीड़ा या ऐसा मानसिक तनाव उत्पन्न होने की आशंका हो जो लंबे समय तक बना रहे और जिसे किसी भी तरह कम करना संभव न हो।

तथापि, इस सैद्धांतिक प्रतिबंध का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि गंभीर श्रेणी में आने वाले प्रत्येक प्रकार के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत इनमें से कई परीक्षणों को उचित अनुमति के बाद अब भी जारी रखने की छूट मिल सकती है। चूंकि ऐसे मामलों में जीवों को अत्यधिक यातना मिलने का गंभीर खतरा निरंतर बना रहता है, इसलिए परीक्षणों की समीक्षा और संस्वीकृति देने वाली प्रक्रिया का अत्यधिक पारदर्शी और मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। अंतिम रूप से तैयार होने वाले नियमों में गंभीर दर्द की स्पष्ट परिभाषा और सीमाएं तय होनी चाहिए, तथा ऐसे किसी भी संवेदनशील प्रयोग को अनुमति देने से पहले उसकी कड़ी एवं स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बेहतर विज्ञान और पशु सुरक्षा का मार्ग

इस पूरी बहस का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधानों की गति को रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पशुओं का इस्तेमाल केवल तभी किया जाए जब इसके पीछे कोई अकाट्य वैज्ञानिक आवश्यकता हो। इस दिशा में यह आवश्यक है कि जानवरों की पीड़ा को न्यूनतम रखा जाए और उनकी सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून जमीनी स्तर पर पूरी तरह प्रभावी साबित हों। अंतिम नियमों में स्वतंत्र निगरानी का एक मजबूत ढांचा होना चाहिए, जंगल से या गैर-पंजीकृत बाजारों से जीवों को लाने की छूट को बेहद सीमित किया जाना चाहिए, और कम्युनिटी पशुओं को प्रयोगशाला के परीक्षणों के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक रिसर्च में जानवरों के स्थान पर आधुनिक तकनीकी विकल्पों को अपनाने के लिए पर्याप्त वित्तीय अनुदान, विशेष प्रशिक्षण और पारदर्शी रिपोर्टिंग प्रणालियों का विकास किया जाना चाहिए। जनता से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने का मूल उद्देश्य ही यही होता है कि किसी भी नए कानून के लागू होने से पहले उससे जुड़ी व्यावहारिक और नैतिक चिंताओं का समाधान किया जा सके। सरकार [email protected] पर ईमेल के माध्यम से अपनी प्रतिक्रियाएं भेज सकती है। वैज्ञानिक प्रगति और अनुसंधान की चमक ऐसी नहीं होनी चाहिए जिसके लिए बेजुबान जानवरों को अनावश्यक और असहनीय पीड़ा झेलनी पड़े।

सवाल-जवाब

लैब के जानवरों से जुड़े नए नियमों का ड्राफ्ट कब जारी किया गया था?
इस नए ड्राफ्ट नियमों को 6 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया था।
जनता इन नियमों पर अपने सुझाव या आपत्तियां कब तक भेज सकती थी?
आम जनता 5 नवंबर, 2026 तक अपनी आपत्तियां और सुझाव भेज सकती थी।
आपत्तियां किस ईमेल पते पर भेजी जानी थीं?
सुझाव और आपत्तियां [email protected] पर भेजी जानी थीं।
नए ड्राफ्ट में प्रयोगशालाओं को जानवरों की खरीद को लेकर क्या छूट दी गई है?
यदि रजिस्टर्ड सप्लायर्स के पास जानवर उपलब्ध न हों, तो लैब बिना रजिस्ट्रेशन वाले संस्थानों या खुले बाजारों से भी खरीद सकती हैं।
क्या आवारा और कम्युनिटी जानवरों पर प्रयोग करने की पूरी छूट है?
ड्राफ्ट में आम तौर पर मनाही है, लेकिन सेहत या गंभीर खतरों से जुड़े कुछ विशेष मामलों में अपवाद रखे गए हैं।
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