मलेशियाई बोर्नियो के घने जंगलों में वैज्ञानिकों को एक ऐसा कवक मिला है जो खुद एक परजीवी है, लेकिन निशाना किसी दूसरे परजीवी को बनाता है। सीधे शब्दों में कहें तो यह 'परजीवी का परजीवी' है, और इस खोज ने उष्णकटिबंधीय जंगलों की जटिल जैव विविधता को एक बिल्कुल नए नज़रिए से सामने रखा है।
दानुम घाटी में कैसे हुई यह खोज
यह खोज मलेशिया के सबा प्रांत की दानुम घाटी में एक शोध अभियान के दौरान हुई। यह इलाका बोर्नियो द्वीप का एक दूरदराज और घना जंगली क्षेत्र है। शोधकर्ता एक मृत चींटी की जांच कर रहे थे, तभी उन्हें लगभग संयोग से यह अनोखा जीव मिल गया। इस नई प्रजाति को Pleurocordyceps cornusynnemata नाम दिया गया है, जो इसकी सींग जैसी विशेष संरचना के आधार पर रखा गया है। इसे वैज्ञानिक पत्रिका फाइटोटैक्सा में आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया है।
ज़ॉम्बी फंगस क्या है और यह कैसे काम करता है
इस खोज की अहमियत को समझने के लिए पहले Ophiocordyceps को जानना ज़रूरी है। इसे आमतौर पर 'ज़ॉम्बी फंगस' कहते हैं। यह एक सूक्ष्मजीव है जो मुख्यतः चींटियों के शरीर में घुस जाता है और उनके तंत्रिका तंत्र पर कब्ज़ा कर लेता है। इसके बाद यह चींटी को ऐसे काम करने पर मजबूर करता है जिससे उसके बीजाणु जितना संभव हो उतने ज़्यादा फैल सकें। अंत में यह फंगस उस चींटी को मार देता है।
लेकिन Pleurocordyceps cornusynnemata का तरीका बिल्कुल अलग है। यह चींटी के दिमाग को नहीं, बल्कि उसके शरीर के अंदर फल-फूल रहे ज़ॉम्बी फंगस को निशाना बनाता है। मलेशिया सबा के उष्णकटिबंधीय जीव विज्ञान और संरक्षण संस्थान (ITBC) के उप-निदेशक और इस प्रजाति के खोजकर्ताओं में शामिल जया सीलान सथिया सीलान ने AFP को बताया, "यह कवक खुद चींटी के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित नहीं करता। इसके बजाय Pleurocordyceps मेज़बान के अंदर पनप रहे Ophiocordyceps ऊतक में सीधे घुसकर उसे खाता है।"
सींग जैसी संरचना इसे बनाती है अनोखा
दुनिया में हाइपरपैरासाइट पहले से जाने जाते हैं यानी ऐसे जीव जो किसी दूसरे परजीवी को अपना शिकार बनाते हैं। लेकिन सीलान ने बताया कि इस खास सींग के आकार वाली संरचना के साथ यह अपनी तरह का पहला हाइपरपैरासाइट है। ITBC ने अपने प्रेस रिलीज़ में कहा, "यह दुर्लभ खोज उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी तंत्र की एक और छिपी हुई जटिलता को सामने लाती है और यह दर्शाती है कि हमारे जंगलों की जैव विविधता के बारे में अभी कितना कुछ अज्ञात है।"
मकड़ियों को मारने वाला कवक भी मिला
इन्हीं अभियानों के दौरान शोधकर्ताओं को एक और नई प्रजाति का पता चला। यह एक ऐसा कवक है जो मकड़ियों के शरीर में घुसकर उनमें अपने बीजाणु फैला देता है और आखिरकार उन्हें मार देता है। एक ही अभियान में दो बिल्कुल नई कवक प्रजातियों का मिलना इस बात का संकेत है कि बोर्नियो के जंगलों में अभी भी अनगिनत अनजानी प्रजातियां छिपी हुई हैं।
दवाओं और खेती के लिए बड़ी संभावनाएं
इन कवकों की खोज केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा का विषय नहीं है, बल्कि इनके व्यावहारिक फायदे भी बहुत बड़े हो सकते हैं। सीलान ने AFP को बताया, "इन नव-खोजे गए कवकों में अपार संभावनाएं हैं, चाहे वह अगली पीढ़ी की एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के स्रोत के रूप में हो या फिर कृषि कीटों के खिलाफ बेहद प्रभावी जैव नियंत्रण एजेंट के रूप में।" ऐसे समय में जब दुनिया भर में एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक गंभीर चुनौती बन चुका है और किसान रासायनिक कीटनाशकों के सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं, यह खोज बेहद अहम साबित हो सकती है।













