कनाडा के जंगलों में लगी आग का धुआं इस हफ्ते अमेरिका के मध्य पश्चिमी और उत्तरपूर्वी हिस्सों तक पहुंच गया है, जिसकी वजह से कई शहरों में हवा इतनी खराब हो गई कि प्रशासन को एयर क्वालिटी को लेकर चेतावनी जारी करनी पड़ी।
100 से ज्यादा जगहों पर बेकाबू आग
बुधवार तक कनाडा में 100 से ज्यादा जगहों पर आग बेकाबू होकर फैल चुकी थी, जबकि सैकड़ों और जगहों पर दमकल दस्ते आग पर नजर रखे हुए थे या उसे बुझाने में जुटे थे। इन आग से उठा धुआं दक्षिण और पूर्व की तरफ बढ़ते हुए सीमा पार कर गया और मिनेसोटा से लेकर न्यूयॉर्क तक आसमान धुंधला कर दिया। सबसे चौंकाने वाली तस्वीरें टोरंटो से आईं, जहां बुधवार सुबह दफ्तर जाने वाले लोग नारंगी रंग के आसमान के नीचे सड़कों पर निकले। मुसीबत यह है कि इसी दौरान इलाके में भीषण गर्मी भी पड़ रही है, कई जगहों पर तापमान 90 डिग्री फ़ॉरेनहाइट से ऊपर चला गया है और हीट इंडेक्स तो इससे भी ज्यादा महसूस हो रहा है।
कहीं हवा खराब, कहीं बेहद खतरनाक
बुधवार शाम तक न्यूयॉर्क शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 180 तक पहुंच गया, जो अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के मानक के मुताबिक सीधे अनहेल्दी यानी सेहत के लिए नुकसानदेह श्रेणी में आता है। मिनेसोटा के डुलुथ शहर में हालात इससे भी बुरे रहे, यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 500 के पार चला गया, जबकि 301 से ऊपर के आंकड़े को ही खतरनाक माना जाता है, यानी ऐसी हवा हर किसी के लिए असुरक्षित होती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि गुरुवार को उत्तरपूर्वी अमेरिका के कई इलाकों में, न्यूयॉर्क शहर समेत, धुएं की स्थिति और बिगड़ सकती है।
PM2.5 आखिर इतना खतरनाक क्यों है
इन शहरों पर छाया धुआं ज्यादातर PM2.5 नाम के बेहद बारीक कणों से बना है, यानी ऐसे कण जो 2.5 माइक्रोमीटर से भी छोटे होते हैं, इंसान के एक बाल से करीब 30 गुना पतले। ये कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में गहराई तक और यहां तक कि खून में भी पहुंच सकते हैं, जिससे पहले से बीमार लोगों की तकलीफ बढ़ सकती है या नई बीमारी शुरू हो सकती है।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में असिस्टेंट प्रोफेसर और फेफड़ों के रोग विशेषज्ञ निकोलस नसीकास कहते हैं कि वे अस्थमा या फेफड़ों की दूसरी बीमारियों से जूझ रहे अपने मरीजों को इस दौरान बाहर कम से कम समय बिताने की सलाह दे रहे हैं। उनके मुताबिक बच्चों को खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि उनकी सांस लेने की रफ्तार तेज होती है, यानी वे शरीर के हिसाब से ज्यादा हवा अंदर लेते हैं। बुजुर्गों के लिए भी खतरा कम नहीं है, क्योंकि उन्हें अक्सर पहले से कई बीमारियां होती हैं और वे अक्सर ऐसे घरों या वृद्धाश्रमों में रहते हैं जहां हवा का आना जाना ठीक से नहीं होता।
मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में असिस्टेंट प्रोफेसर जेनिफर स्टोवेल कहती हैं कि जब एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 के पार चला जाए तो सेहतमंद लोगों को भी सावधान हो जाना चाहिए। उनका कहना है, कम से कम इतना जरूर करें कि बाहर बिताया जाने वाला समय घटा दें, ताकि प्रदूषण के संपर्क में आना कम हो सके। उनके मुताबिक अगर किसी को लंबे समय तक बाहर रहना ही पड़े तो N95 मास्क पहनना बेहतर रहेगा। स्टोवेल फिलहाल बोस्टन में हैं, जहां बुधवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 110 तक पहुंच गया था, और उन्होंने बताया कि वे शाम से पहले किसी भी बाहरी कार्यक्रम में शामिल होने से बच रही थीं।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में क्लाइमेट फिजिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर डैन वेस्टरवेल्ट भी उतनी ही सावधानी बरत रहे हैं। उन्होंने कहा, आज मैं यह पक्का करूंगा कि मेरे बच्चे घर के अंदर ही रहें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज और कल वे दौड़ने जैसी किसी शारीरिक मेहनत वाली गतिविधि से भी दूर रहेंगे।
बढ़ती गर्मी क्यों बढ़ा रही है धुएं का खतरा
जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ता तापमान जंगल की आग के मौसम को लंबा खींच रहा है और गर्म, सूखी परिस्थितियां बना रहा है, जो और भी भीषण आग को जन्म देती हैं। पिछले साल छपे एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया था कि जंगल की आग का धुआं अमेरिका में हर साल करीब 40,000 मौतों की वजह बन रहा है, और अगर तापमान बढ़ने का सिलसिला यूं ही चलता रहा, तो 2050 तक यह आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर करीब 70,000 सालाना तक पहुंच सकता है। धुएं से भरे खराब हवा वाले दिन जैसे जैसे बढ़ रहे हैं, वैसे ही लंबे समय तक इस धुएं के संपर्क में रहने के असर पर रिसर्च अभी भी जारी है। इससे मिलता जुलता धुएं का हमला 2023 में भी कनाडा की आग से उत्तरपूर्वी अमेरिका पर आ चुका है।
वेस्टरवेल्ट कहते हैं, रिसर्च में कई बार यह साबित हो चुका है कि पूरी जिंदगी या लंबे समय तक बहुत ज्यादा प्रदूषित हवा में सांस लेने से समय से पहले मौत का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां बार बार, नियमित रूप से बहुत ज्यादा प्रदूषित हवा में सांस लेनी पड़ती है, तो आप अपनी उम्र के कुछ महीने गंवा सकते हैं।
हर प्रदूषण एक जैसा नहीं होता
PM2.5 कई आम स्रोतों से निकलता है, जैसे गाड़ियों का धुआं और बिजली घर, लेकिन जंगल की आग से निकलने वाला धुआं अलग तरह का खतरा लेकर आता है। जैसे जैसे आग बस्तियों तक फैलती जा रही है, वैसे वैसे यह घरों, गाड़ियों, पार्कों और दूसरी इंसानी बनावटों को भी अपनी चपेट में ले रही है, जिससे धुएं में तरह तरह के जहरीले पदार्थ घुल जाते हैं। N95 जैसे मास्क इस बारीक कण का कुछ हिस्सा जरूर रोक लेते हैं, लेकिन जंगल की आग के धुएं में मौजूद हर जहरीले तत्व को रोक पाना उनके बस की बात नहीं है।
कूलिंग सेंटरों के सामने दोहरी चुनौती
न्यूयॉर्क शहर ने भीषण गर्मी से निपटने के लिए कूलिंग सेंटर खोले हैं, क्योंकि ज्यादा तापमान PM2.5 प्रदूषण को और बढ़ा सकता है, और शहर प्रशासन इनमें से कुछ केंद्रों पर लोगों को मास्क भी बांट रहा है। लेकिन मास्क जंगल की आग के धुएं में मौजूद गैस वाले प्रदूषकों को नहीं रोक पाते, और हो सकता है कि ये कूलिंग सेंटर एयर प्यूरीफायर चलाने को उतनी प्राथमिकता न दे रहे हों, जबकि एयर कंडीशनर हवा की गुणवत्ता सुधारने में कुछ हद तक मदद जरूर करते हैं। स्टोवेल का कहना है कि इन केंद्रों को साफ हवा की पनाहगाह भी बनना चाहिए।
प्रदूषण से लड़ाई का नया मोर्चा
अमेरिका ने दशकों तक मेहनत करके प्रदूषण के दूसरे स्रोतों पर काबू पाया है, लेकिन वेस्टरवेल्ट के मुताबिक अब देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती जंगल की आग का धुआं ही बन गया है। उन्होंने कहा, एक देश के तौर पर हमने गाड़ियों को ज्यादा ईंधन कुशल बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ाने और साफ ईंधन अपनाने में काफी अच्छा काम किया है। इसमें और तरक्की हो सकती है, लेकिन असल में अब सबसे बड़ा मसला जंगल की आग का धुआं ही है।











