वेनेजुएला में जमीन के नीचे चंद पलों के भीतर दो ताकतवर भूकंप एक के बाद एक टकराए और उत्तरी हिस्से को हिलाकर रख दिया। यह कोई आम भूकंप नहीं था, बल्कि वह दुर्लभ परिघटना थी जिसे वैज्ञानिक 'सीस्मिक डबलट' यानी भूकंपीय जोड़ी कहते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर के भूवैज्ञानिक इस घटना को बारीकी से समझने में जुट गए हैं, क्योंकि इससे यह जानने में मदद मिलती है कि धरती की परत के भीतर तनाव एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंचता है और भूगर्भीय दरारें (फॉल्ट) आपस में किस तरह जुड़ी होती हैं।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक दोनों भूकंपों का केंद्र यूमारे कस्बे के उत्तर-पश्चिम में, मोरोन शहर के पास और वेनेजुएला की राजधानी काराकास से करीब 160 किलोमीटर (99 मील) पश्चिम में था। एक भूकंप 20.3 किलोमीटर और दूसरा 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। इनके झटके उत्तरी वेनेजुएला के बड़े हिस्से के साथ-साथ कैरिबियन के कई देशों में भी महसूस किए गए।
आखिर 'सीस्मिक डबलट' होता क्या है
इस पूरे सिलसिले को एक गंभीर भूकंपीय जोड़ी की श्रेणी में रखा गया है। यह स्थिति तब बनती है जब लगभग एक जैसी तीव्रता वाले दो भूकंप आस-पास के इलाकों में करीब-करीब एक साथ आ जाएं। USGS के अनुमान के अनुसार किसी भूकंप के बाद एक हफ्ते के भीतर पास के इलाके में उससे ज्यादा तीव्रता का दूसरा भूकंप आने की आशंका करीब 5 प्रतिशत होती है।
हाल के वर्षों की सबसे चर्चित भूकंपीय जोड़ियों में से एक करीब तीन साल पहले तुर्की और सीरिया में देखी गई थी, जब 7.6 तीव्रता के भूकंप के बाद 7.8 तीव्रता का झटका आया था। एक अध्ययन में बताया गया कि यह परिघटना उस तनाव का नतीजा थी जो पहले भूकंप के लिए जिम्मेदार फॉल्ट के साथ दो सदियों से भी ज्यादा समय में जमा हो रहा था। जब वह फॉल्ट टूटा, तो उससे निकला तनाव पास की दूसरी दरार पर जा पहुंचा और तेजी से दूसरा भूकंप ले आया।
वेनेजुएला में कैसे बनी यह जोड़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला में भी कुछ ऐसा ही हुआ। डरहम यूनिवर्सिटी के पृथ्वी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मार्क एलन के मुताबिक, "संभव है कि पहले भूकंप ने फॉल्ट के एक हिस्से को तोड़ दिया और तनाव को दूसरी दरार पर डाल दिया, जो टूटकर दूसरे भूकंप की वजह बनी।"
एलन ने यह भी कहा कि जिस इलाके में भूकंप के केंद्र मौजूद थे, वहां की भूगर्भीय बनावट ने अहम भूमिका निभाई। उनके शब्दों में, "ऐसा लगता है कि ये झटके दक्षिण अमेरिका और कैरिबियन प्लेटों की सीमा पर आए। इस इलाके में प्लेटें एक-दूसरे के सापेक्ष बगल की ओर खिसकती हैं, ठीक वैसे ही जैसे कैलिफोर्निया में सैन एंड्रियास फॉल्ट के साथ होता है।"
ऐसी परिस्थितियां स्ट्राइक-स्लिप भूकंप पैदा करती हैं। इस तरह के भूकंप तब आते हैं जब धरती की परत के दो टुकड़े किसी फॉल्ट के साथ आड़े-तिरछे (क्षैतिज) सरकते हैं और लंबे समय से जमा तनाव अचानक छोड़ देते हैं।
उथले भूकंप क्यों ज्यादा खतरनाक
इस तरह की हलचल अक्सर बड़ा नुकसान करती है, क्योंकि यह अपेक्षाकृत कम गहराई पर पैदा होती है। सबडक्शन भूकंप, जिनमें एक प्लेट दूसरी के नीचे खिसक जाती है, उनके मुकाबले स्ट्राइक-स्लिप भूकंप धरती की सतह के ज्यादा करीब आते हैं। नतीजा यह होता है कि भूकंप से निकली ऊर्जा को आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे झटके ज्यादा तेज महसूस होते हैं और नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।
एलन ने आगाह किया कि इन्हीं हालात की वजह से "काराकास इलाके में और भूकंप (आफ्टरशॉक) आने का खतरा है। वेनेजुएला की राजधानी भूकंपीय गतिविधि वाले इलाके में बसी है, और मुमकिन है कि हाल की घटनाओं के बाद स्थानीय फॉल्ट पर अतिरिक्त तनाव पड़ा हो।"
यह आशंका USGS के अनुमानों से भी मेल खाती है। एजेंसी का कहना है कि इतनी तीव्रता के भूकंपों के बाद भूकंपीय गतिविधि कई दिन, हफ्ते या उससे भी ज्यादा समय तक जारी रह सकती है। समय के साथ झटकों की रफ्तार भले घट जाए, लेकिन ताकतवर आफ्टरशॉक आने की आशंका बनी रहती है।
मौत का आंकड़ा और आगे का खतरा
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक अब तक वेनेजुएला में दर्ज इन दो भूकंपों में कम से कम 164 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 1,000 लोग घायल हुए हैं। USGS का अनुमान है कि मरने वालों की अंतिम संख्या 10,000 से लेकर 1,00,000 तक पहुंच सकती है। इसके पीछे भूकंपों की तीव्रता के साथ-साथ प्रभावित इलाकों की कमजोरियां भी हैं, जिनमें निर्माण की गुणवत्ता और आबादी का घनत्व शामिल है।













