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फ्लेमिंगो के पंखों का गुलाबी रंग जन्मजात नहीं बल्कि उनके खास आहार का है नतीजाविज्ञान
20 अग॰ 2026, 2:17 pm (2 घंटे पहले)· 2

फ्लेमिंगो के पंखों का गुलाबी रंग जन्मजात नहीं बल्कि उनके खास आहार का है नतीजा

सफेद या भूरे रंग के पैदा होने वाले फ्लेमिंगो पक्षी बड़े होकर गुलाबी क्यों हो जाते हैं, जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण और उनके खान-पान का अनोखा राज।

दुनिया भर में अपनी खूबसूरत शारीरिक बनावट, लंबी गर्दन, पतले पैरों और गहरे गुलाबी पंखों के लिए पहचाने जाने वाले फ्लेमिंगो हर किसी का ध्यान आकर्षित करते हैं। पानी के किनारों पर एक पैर पर खड़े होकर शिकार करने वाले ये पक्षी देखने में बेहद शानदार लगते हैं। हालांकि, ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि इनका गुलाबी रंग कुदरती तौर पर जन्म से ही होता है। विज्ञान के अनुसार ऐसा नहीं है, क्योंकि जब फ्लेमिंगो के चूजे अंडे से बाहर आते हैं, तब उनका रंग गुलाबी बिल्कुल नहीं होता। उनके पंखों का यह आकर्षक और विशिष्ट रंग असल में उनके दैनिक आहार और खान-पान की आदतों का सीधा परिणाम होता है।

कैरोटीनॉयड रंगद्रव्य और आहार का संबंध

फ्लेमिंगो के शरीर में गुलाबी और नारंगी रंग का समावेश एक खास प्राकृतिक रसायन के कारण होता है, जिसे कैरोटीनॉयड कहा जाता है। यह रंगद्रव्य जलीय वातावरण में पनपने वाले विभिन्न प्रकार के शैवाल, सूक्ष्म जीवों और छोटे झींगों जैसे जीवों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जब फ्लेमिंगो दलदली क्षेत्रों, झीलों और उथले पानी में अपने भोजन की तलाश करते हैं, तो वे कैरोटीनॉयड से भरपूर इन जीवों और पौधों का सेवन करते हैं। पाचन प्रक्रिया के दौरान उनका शरीर इन रंगद्रव्यों को अवशोषित कर लेता है। यह अवशोषित रंग धीरे-धीरे उनके पंखों, त्वचा और पैरों में जमा होने लगता है, जिससे उन्हें उनका मशहूर गुलाबी रूप मिलता है।

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जन्म के समय भूरे और सफेद होते हैं चूजे

फ्लेमिंगो के नवजात चूजे हल्के भूरे या सफेद-भूरे रंग के पंखों के साथ पैदा होते हैं। शुरुआती दिनों में उनका मुख्य आहार उनकी मां द्वारा दिया जाने वाला पोषण होता है, जिसमें यह रंगद्रव्य मौजूद नहीं होता। जैसे-जैसे चूजे बड़े होते हैं और खुद पानी में जाकर कैरोटीनॉयड युक्त शैवाल और छोटे जीवों को खाना शुरू करते हैं, उनके शरीर में रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं। समय के साथ उनके भूरे और सफेद पंख झड़ने लगते हैं और उनकी जगह नए चमकदार गुलाबी पंख आने लगते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ महीनों से लेकर सालों तक का समय लग सकता है।

रंग की चमक और भिन्नता के पीछे के कारण

यदि आप फ्लेमिंगो के किसी समूह को ध्यान से देखें, तो पाएंगे कि हर पक्षी का रंग एक जैसा नहीं होता। कुछ पक्षी बहुत हल्के गुलाबी दिखाई देते हैं, जबकि कुछ गहरे नारंगी या लालिमा लिए हुए होते हैं। रंगों में यह फर्क मुख्य रूप से उनके द्वारा खाए जाने वाले भोजन में मौजूद कैरोटीनॉयड की मात्रा और प्रकार पर निर्भर करता है। इसके अलावा, पक्षी की उम्र, उसका शारीरिक स्वास्थ्य और शरीर में वसा की मात्रा भी पंखों के रंग की तीव्रता को प्रभावित करती है। इसलिए, यदि कोई फ्लेमिंगो हल्के रंग का दिख रहा है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह अस्वस्थ या बीमार है।

कृत्रिम देखभाल और चिड़ियाघर का प्रबंधन

यदि फ्लेमिंगो को उनके प्राकृतिक आहार में कैरोटीनॉयड न मिले, तो उनके पंखों का गुलाबीपन धीरे-धीरे फीका पड़ने लगता है। इसी कारण से, चिड़ियाघरों और नियंत्रित संरक्षण केंद्रों में रखे जाने वाले फ्लेमिंगो के लिए विशेष पोषण योजना तैयार की जाती है। उनके आहार में ऐसे प्राकृतिक तत्व और कैरोटीनॉयड शामिल किए जाते हैं, जो प्राकृतिक जलीय जीवन की पोषण संरचना की सटीक नकल करते हैं। इससे पक्षी पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं और उनके पंखों की जीवंत गुलाबी रंगत बरकरार रहती है।

सवाल-जवाब

क्या फ्लेमिंगो जन्म से ही गुलाबी होते हैं?
नहीं, फ्लेमिंगो जन्म के समय हल्के भूरे या सफेद-भूरे रंग के होते हैं। वे बड़े होने पर भोजन के माध्यम से गुलाबी रंग हासिल करते हैं।
फ्लेमिंगो का रंग गुलाबी किस कारण से होता है?
उनके भोजन में पाए जाने वाले कैरोटीनॉयड नामक प्राकृतिक रंगद्रव्य के कारण उनका रंग गुलाबी या नारंगी होता है।
फ्लेमिंगो मुख्य रूप से क्या खाते हैं जिससे उनका रंग बदलता है?
वे पानी में मौजूद शैवाल, छोटे जलीय जीवों और झींगों का सेवन करते हैं जिनमें कैरोटीनॉयड प्रचुर मात्रा में होता है।
क्या हल्का गुलाबी फ्लेमिंगो बीमार होता है?
जरूरी नहीं है। पंखों का हल्का या गहरा रंग आहार में कैरोटीनॉयड की मात्रा, उम्र और वसा के स्तर पर निर्भर करता है।
चिड़ियाघरों में फ्लेमिंगो का गुलाबी रंग कैसे बनाए रखा जाता है?
चिड़ियाघरों में उनके भोजन में कैरोटीनॉयड से भरपूर पोषक तत्व मिलाए जाते हैं जो उनके प्राकृतिक आहार की नकल करते हैं।
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