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जिस सांप का जहर जानलेवा, उसी से बनता है जीवनरक्षक एंटीवेनम, जानें घोड़ों वाली पूरी प्रोसेसविज्ञान
12 अग॰ 2026, 10:27 pm (76 दिन पहले)· 1

जिस सांप का जहर जानलेवा, उसी से बनता है जीवनरक्षक एंटीवेनम, जानें घोड़ों वाली पूरी प्रोसेस

भारत में सांप के डसने से हर साल करीब 40 हजार मौतें होती हैं, जिनमें से 36 हजार सिर्फ चार खास सांपों की वजह से होती हैं। जानिए इन्हीं सांपों के जहर से घोड़ों के जरिए कैसे तैयार होता है जिंदगी बचाने वाला एंटीवेनम।

पश्चिम चम्पारण में सामने आई एक दिलचस्प जानकारी के मुताबिक, सांप के डसने पर जो जिंदगी बचाने वाला इंजेक्शन लगाया जाता है, वह असल में सांप के जहर से ही तैयार होता है। दुनिया भर में उन्हीं सांपों के विष का इस्तेमाल एंटीवेनम बनाने में किया जाता है, जिनके डसने से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। भारत में ऐसे चार सांप हैं, जिनके जहर से हर साल करीब 40 हजार लोगों की जान चली जाती है।

बिग फोर सांप, जो सबसे ज्यादा जानलेवा हैं

वाइल्ड लाइफ पर पिछले करीब दो दशक से काम कर रहे विशेषज्ञ अभिषेक के मुताबिक भारत में मुख्य रूप से चार सांपों को ध्यान में रखकर ही एंटीवेनम तैयार किया जाता है। इनमें स्पेक्टेकल्ड कोबरा जिसे गेहूंवन भी कहा जाता है, रसल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर और कॉमन करैत शामिल हैं। एक आंकड़े के अनुसार भारत में सांप के डसने से हर साल लगभग 40 हजार मौतें दर्ज होती हैं और इनमें से 36 हजार मौतें सिर्फ इन्हीं चार सांपों की वजह से होती हैं। यही वजह है कि इन चारों सांपों को बिग फोर के नाम से जाना जाता है।

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घोड़ों के शरीर से गुजरकर तैयार होता है एंटीवेनम

एंटीवेनम बनाने की प्रक्रिया बेहद सावधानी से पूरी की जाती है। सबसे पहले इन्हीं चार बिग फोर सांपों से सुरक्षित तरीके से जहर निकाला जाता है। इसके बाद निकाले गए इस जहर की बेहद हल्की और सुरक्षित मात्रा खास तरह के घोड़ों के शरीर में इंजेक्ट की जाती है। ये कोई सामान्य घोड़े नहीं होते, बल्कि खासतौर पर इसी काम के लिए तैयार किए गए घोड़े होते हैं। जब जहर की यह मात्रा उनके शरीर में पहुंचती है तो उनका इम्यून सिस्टम इसके खिलाफ लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देता है। इसके बाद इन घोड़ों से यह एंटीबॉडी निकाली जाती है और प्रयोगशाला में इसे प्लाज़्मा से अलग किया जाता है। आखिर में इसे शुद्ध करके एंटीवेनम के रूप में तैयार किया जाता है, जिसे अस्पतालों में सांप के डसे मरीजों को दिया जाता है।

जरा सी चूक पड़ सकती है भारी

अभिषेक के मुताबिक एंटीवेनम भी दरअसल वेनम ही होता है, बस इसे एंटीबॉडी के रूप में तैयार करके इस्तेमाल में लाया जाता है। उनका कहना है कि इसके इस्तेमाल में जरा सी भी लापरवाही किसी की जान ले सकती है। यही वजह है कि उनकी सलाह है कि आम इंसान को कभी भी खुद से सांप के जहर या एंटीडोट से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए और इसका काम पूरी तरह विशेषज्ञों और प्रशिक्षित लोगों पर ही छोड़ देना चाहिए।

सवाल-जवाब

एंटीवेनम किससे बनाया जाता है?
एंटीवेनम सांप के विष से ही तैयार किया जाता है, जिसे घोड़ों के शरीर में इंजेक्ट कर उनके इम्यून सिस्टम से एंटीबॉडी के रूप में निकाला जाता है।
भारत में एंटीवेनम के लिए किन सांपों का इस्तेमाल होता है?
स्पेक्टेकल्ड कोबरा यानी गेहूंवन, रसल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर और कॉमन करैत, यानी बिग फोर सांपों का।
इन चार सांपों को बिग फोर क्यों कहा जाता है?
क्योंकि भारत में सांप के डसने से होने वाली करीब 40 हजार सालाना मौतों में से 36 हजार मौतें सिर्फ इन्हीं चार सांपों की वजह से होती हैं।
एंटीवेनम बनाने में घोड़ों की क्या भूमिका है?
घोड़ों के शरीर में सुरक्षित मात्रा में विष इंजेक्ट किया जाता है, जिससे उनका इम्यून सिस्टम एंटीबॉडी बनाता है, जिसे बाद में निकालकर एंटीवेनम तैयार किया जाता है।
क्या आम इंसान को सांप के जहर से खिलवाड़ करना चाहिए?
नहीं, विशेषज्ञ अभिषेक के मुताबिक इसमें जरा सी चूक भी जानलेवा हो सकती है, इसलिए यह काम सिर्फ प्रशिक्षित लोगों को ही करना चाहिए।
भारत में सांप के डसने से हर साल कितनी मौतें होती हैं?
करीब 40 हजार मौतें हर साल दर्ज होती हैं।
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