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जंगल में दबदबा रखता है ब्लैक ड्रोंगो, चील-बाज को भी खदेड़ता है यह छोटा पक्षीविज्ञान
21 जून 2026, 2:03 pm (128 दिन पहले)· 3

जंगल में दबदबा रखता है ब्लैक ड्रोंगो, चील-बाज को भी खदेड़ता है यह छोटा पक्षी

बालाघाट के जंगलों और गांवों में पाया जाने वाला ब्लैक ड्रोंगो, जिसे स्थानीय लोग कोतवाल कहते हैं, अपनी बुलंद आवाज और दुस्साहस की वजह से शिकारी पक्षियों को खदेड़ता है और पूरे जंगल को सुरक्षित रखता है.

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में करीब 53 प्रतिशत भूभाग घने जंगलों से भरा हुआ है. यहां वन्य प्राणियों और पक्षियों की विविध दुनिया बसती है. इन तमाम पक्षियों के बीच एक पक्षी अपनी दबंग फितरत और ऊंची आवाज की वजह से बाकी सबसे अलग पहचान रखता है. इसका नाम है ब्लैक ड्रोंगो. इसे कान्हा नेशनल पार्क के घने जंगलों से लेकर बालाघाट के शहरों और गांवों के पेड़ों पर भी सुबह और शाम आराम से देखा जा सकता है.

एक पक्षी, कई नाम

ब्लैक ड्रोंगो को लोग कई नामों से जानते हैं. ग्रामीण अंचल में इसे कोतवाल, भुजंगा और चाटू कहा जाता है. इसका जैविक नाम डिक्रूरस मैक्रोसेर्कस है. दिखने में यह पक्षी भले ही छोटा लगे, लेकिन इसकी आवाज इतनी बुलंद होती है कि पूरे इलाके में इसकी मौजूदगी का एहसास हो जाता है. यह सिर्फ एक तरह की नहीं, बल्कि कई तरह की आवाजें निकालने में माहिर है.

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चमकीला काला रंग, धूप में दिखता है नीला

ब्लैक ड्रोंगो का असल रंग गहरा और चमकीला काला है. लेकिन जब इसके पंखों पर सूरज की रोशनी पड़ती है, तब ये नीले दिखने लगते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पंख कांच जैसे होते हैं, जो रोशनी को इस तरह परावर्तित करते हैं कि रंग बदला हुआ लगता है. इसी खूबी की वजह से यह पक्षी देखने में बेहद खूबसूरत और आकर्षक नजर आता है.

क्यों है यह जंगल का असली कोतवाल

ब्लैक ड्रोंगो का 'जंगल का कोतवाल' का खिताब बेकार नहीं है. यह पक्षी चील, बाज और कौए जैसे शिकारी पक्षियों को जंगल में स्वतंत्र रूप से घूमने नहीं देता. इन पर तेजी से झपट्टा मारकर उन्हें भगा देता है. लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ अपनी रक्षा तक सीमित नहीं रहता. जैसे ही किसी खतरे का अंदाजा होता है, यह अपनी बुलंद आवाज के जरिए आसपास के सभी पक्षियों को तुरंत सतर्क कर देता है.

यही वजह है कि जंगल के दूसरे पक्षी ब्लैक ड्रोंगो को अपना बॉडीगार्ड मानते हैं. कई पक्षी तो इसके घोंसले के पास ही अपने अंडे देते हैं, ताकि उनके बच्चों को भी इसकी सुरक्षा का फायदा मिल सके. यही कारण है कि इस पक्षी को कोतवाल का दर्जा दिया गया है.

किसानों और पशुपालकों का भी अनजाना दोस्त

ब्लैक ड्रोंगो सिर्फ जंगल तक ही सीमित नहीं है. यह छोटे कीटों को खाता है. इसके अलावा यह मवेशियों की पीठ पर बैठकर उनके शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को भी खा जाता है. इस तरह यह पक्षी किसानों और पशुपालकों के लिए एक प्राकृतिक सहायक की भूमिका निभाता है, बिना किसी से कुछ मांगे.

सवाल-जवाब

ब्लैक ड्रोंगो को जंगल का कोतवाल क्यों कहते हैं?
क्योंकि यह चील, बाज और कौए जैसे शिकारी पक्षियों पर झपट्टा मारकर भगाता है और अपनी बुलंद आवाज से जंगल के दूसरे पक्षियों को खतरे की सूचना देता है.
ब्लैक ड्रोंगो का वैज्ञानिक नाम क्या है?
इसका वैज्ञानिक नाम डिक्रूरस मैक्रोसेर्कस है.
ब्लैक ड्रोंगो को स्थानीय भाषा में क्या-क्या कहते हैं?
ग्रामीण इलाकों में इसे कोतवाल, भुजंगा और चाटू जैसे नामों से बुलाया जाता है.
इस पक्षी के पंख रंग बदलते क्यों दिखते हैं?
इसका असल रंग काला है, लेकिन कांच जैसे चमकीले पंखों पर धूप पड़ने से ये नीले दिखने लगते हैं.
दूसरे पक्षी ब्लैक ड्रोंगो के घोंसले के पास अंडे क्यों देते हैं?
क्योंकि ब्लैक ड्रोंगो शिकारी पक्षियों से सबकी रक्षा करता है, इसलिए दूसरे पक्षी इसे अपना बॉडीगार्ड मानते हैं और इसके घोंसले के पास ही अंडे देते हैं.
ब्लैक ड्रोंगो क्या खाता है?
यह छोटे कीट-पतंगों को खाता है और मवेशियों की पीठ पर बैठकर उनके शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को भी चुन-चुन कर खाता है.
बालाघाट में ब्लैक ड्रोंगो कहां देखा जा सकता है?
इसे कान्हा नेशनल पार्क के अलावा बालाघाट के शहरों और गांवों के पेड़ों पर भी सुबह और शाम आसानी से देखा जा सकता है.
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