7वीं पास जॉन प्रकाश राव जनुमाला कैसे बने कॉमेडी किंग जॉनी लीवर, 300 से अधिक फिल्मों में दर्ज कराया नामसिनेमा में 67 साल पूरे होने पर कमल हासन का विचार, केवल 20 वर्ष को माना असली सीखलेट समर में मानसिक सेहत सुधारने के आठ आसान और विज्ञान सम्मत उपायकक्षाओं में सजा के बजाय जुड़ाव पर जोर, जानिए कैसे बदल रहा है स्कूलों का माहौलनांदेड में सुखबीर सिंह बादल पर हमले के बाद अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर दागे सवालघर में बजरंगबली के पांच मुखी स्वरूप की स्थापना से मिटेंगे संकट, जानिए किस दिशा में चित्र लगाना माना जाता है श्रेष्ठसुनिधि चौहान की आवाज और कैटरीना कैफ के डांस से सजा तीस मार खान का गाना आज भी बना है पार्टी एंथमशिकागो अदालत का फैसला, इथियोपियन एयरलाइंस हादसे में जान गंवाने वाले संयुक्त राष्ट्र इंजीनियर के परिवार को बोइंग देगा 29 मिलियन डॉलरयूरोप में भीषण गर्मी के चलते डैन्यूब नदी का जलस्तर 30 साल के निचले स्तर पर, रोमानिया का इकलौता परमाणु संयंत्र हुआ बंदबिहार के मुजफ्फरपुर में बेखौफ अपराधियों का दुस्साहस, रेड के दौरान पुलिस पर बरसाईं गोलियां और बाइक छीनकर भागे
प्रकृति के कुशल इंजीनियर हैं बया पक्षी: बिना औजारों के कैसे बुनते हैं अटूट घोंसले?विज्ञान
28 जून 2026, 10:09 pm (46 दिन पहले)· 5

प्रकृति के कुशल इंजीनियर हैं बया पक्षी: बिना औजारों के कैसे बुनते हैं अटूट घोंसले?

खरगोन में इन दिनों बया पक्षी अपनी अद्भुत घोंसला बनाने की कला के लिए चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। ये पक्षी न केवल बेहद मजबूत घोंसले बुनते हैं, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए भी विशेष इंजीनियरिंग अपनाते हैं।

इन दिनों मध्य प्रदेश के खरगोन में एक नन्हा जीव लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पक्षी को बया, बुनकर पक्षी या वीवर बर्ड के नाम से पहचाना जाता है। बरसात के आगमन के साथ ही यह पक्षी अपने आने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित आवास तैयार करने में जुट गया है। इनकी घोंसला बुनने की दक्षता इतनी सटीक और लाजवाब है कि जो भी इन्हें देखता है, उनकी कला का कायल हो जाता है।

प्रकृति का शानदार निर्माण

वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि मानसून के दस्तक देने के साथ ही नर बया पक्षी घास, पत्तियों के सूक्ष्म रेशों और तिनकों को जमा करना शुरू कर देता है। वह इन सामग्रियों को अपनी चोंच और पैरों की मदद से एक-एक कर आपस में इस तरह गूंथता है कि एक बेहद मजबूत और टिकाऊ संरचना तैयार हो जाती है। यह घोंसला न केवल बारिश के पानी से उनके बच्चों को बचाता है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने का एक मजबूत माध्यम भी है।

ये भी पढ़ें

इंजीनियरिंग का कमाल

जूलॉजी के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र रावल के मुताबिक, इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम Ploceus philippinus है। इन्हें 'बुनकर पक्षी' कहे जाने के पीछे का कारण यह है कि ये किसी भी औजार के बिना, केवल अपनी शारीरिक क्षमता से घोंसला बना लेते हैं। इनकी बुनाई का यह अनूठा ढंग प्रकृति की सबसे बेहतरीन कलाकृतियों में से एक माना जाता है। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये अपना घोंसला पेड़ की सबसे कमजोर और पतली डाल पर लटकाते हैं ताकि सांप, नेवले या अन्य शिकारी वहां तक आसानी से पहुंच न सकें।

संरचना और सुरक्षा

बया पक्षी का घोंसला दिखने में किसी लालटेन या बोतल की आकृति जैसा होता है। इसका प्रवेश द्वार नीचे की तरफ होता है, जिससे तेज बारिश और हवाओं का सीधा असर घोंसले के अंदर नहीं पड़ता। यही कारण है कि भारी आंधी-तूफान के बीच भी ये घोंसले सुरक्षित बने रहते हैं और गिरते नहीं हैं।

प्यार और घोंसले का संबंध

डॉ. रावल कहते हैं कि नर बया पक्षी के घोंसले की मजबूती और सुंदरता ही उसके लिए जीवनसाथी चुनने का पैमाना होती है। मादा पक्षी पहले घोंसले का बारीकी से निरीक्षण करती है और जब उसे कारीगरी पसंद आती है, तभी वह उस नर के साथ अपना नया परिवार शुरू करती है। इस प्रकार, इन पक्षियों के संसार में प्रेम का आधार घोंसला ही होता है।

समुदाय और अस्तित्व पर खतरा

ये पक्षी हमेशा समूह में रहना पसंद करते हैं। अक्सर एक ही पेड़ पर कई घोंसले एक साथ लटके हुए दिखते हैं, जो किसी सजावट की तरह लगते हैं। यदि खतरा महसूस हो, तो पूरी कॉलोनी मिलकर सतर्क हो जाती है। हालांकि, विशेषज्ञों की चिंता है कि बया पक्षियों की संख्या कम हो रही है। पेड़ कटने और प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण अब इन्हें संरक्षित प्रजातियों में गिना जाने लगा है। प्रकृति के इस छोटे इंजीनियर का हुनर वाकई हैरान कर देने वाला है, जो बिना किसी तकनीक के इंजीनियरिंग की जटिल कला को साकार करता है।

सवाल-जवाब

बया पक्षी घोंसला बनाने के लिए किन चीजों का उपयोग करते हैं?
नर बया पक्षी घोंसला बनाने के लिए घास, पत्तियों के रेशों और पतले तिनकों का उपयोग करता है।
बया पक्षी का घोंसला गिरने या टूटने से कैसे बचा रहता है?
इनका घोंसला बोतल या लालटेन जैसा होता है और इनका प्रवेश द्वार नीचे की ओर होता है, जिससे तेज हवा और बारिश का असर कम होता है।
बया पक्षी अपना घोंसला पेड़ की पतली टहनी पर क्यों बनाते हैं?
यह एक रक्षात्मक तकनीक है ताकि सांप और नेवले जैसे शिकारी उन तक आसानी से न पहुंच सकें।
क्या घोंसले का चुनाव मादा पक्षी के व्यवहार को प्रभावित करता है?
हां, मादा पक्षी घोंसले का निरीक्षण करती है और उसी नर के साथ जोड़ा बनाती है जिसका घोंसला उसे पसंद आता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR