इन दिनों मध्य प्रदेश के खरगोन में एक नन्हा जीव लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पक्षी को बया, बुनकर पक्षी या वीवर बर्ड के नाम से पहचाना जाता है। बरसात के आगमन के साथ ही यह पक्षी अपने आने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित आवास तैयार करने में जुट गया है। इनकी घोंसला बुनने की दक्षता इतनी सटीक और लाजवाब है कि जो भी इन्हें देखता है, उनकी कला का कायल हो जाता है।
प्रकृति का शानदार निर्माण
वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि मानसून के दस्तक देने के साथ ही नर बया पक्षी घास, पत्तियों के सूक्ष्म रेशों और तिनकों को जमा करना शुरू कर देता है। वह इन सामग्रियों को अपनी चोंच और पैरों की मदद से एक-एक कर आपस में इस तरह गूंथता है कि एक बेहद मजबूत और टिकाऊ संरचना तैयार हो जाती है। यह घोंसला न केवल बारिश के पानी से उनके बच्चों को बचाता है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने का एक मजबूत माध्यम भी है।
इंजीनियरिंग का कमाल
जूलॉजी के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र रावल के मुताबिक, इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम Ploceus philippinus है। इन्हें 'बुनकर पक्षी' कहे जाने के पीछे का कारण यह है कि ये किसी भी औजार के बिना, केवल अपनी शारीरिक क्षमता से घोंसला बना लेते हैं। इनकी बुनाई का यह अनूठा ढंग प्रकृति की सबसे बेहतरीन कलाकृतियों में से एक माना जाता है। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये अपना घोंसला पेड़ की सबसे कमजोर और पतली डाल पर लटकाते हैं ताकि सांप, नेवले या अन्य शिकारी वहां तक आसानी से पहुंच न सकें।
संरचना और सुरक्षा
बया पक्षी का घोंसला दिखने में किसी लालटेन या बोतल की आकृति जैसा होता है। इसका प्रवेश द्वार नीचे की तरफ होता है, जिससे तेज बारिश और हवाओं का सीधा असर घोंसले के अंदर नहीं पड़ता। यही कारण है कि भारी आंधी-तूफान के बीच भी ये घोंसले सुरक्षित बने रहते हैं और गिरते नहीं हैं।
प्यार और घोंसले का संबंध
डॉ. रावल कहते हैं कि नर बया पक्षी के घोंसले की मजबूती और सुंदरता ही उसके लिए जीवनसाथी चुनने का पैमाना होती है। मादा पक्षी पहले घोंसले का बारीकी से निरीक्षण करती है और जब उसे कारीगरी पसंद आती है, तभी वह उस नर के साथ अपना नया परिवार शुरू करती है। इस प्रकार, इन पक्षियों के संसार में प्रेम का आधार घोंसला ही होता है।
समुदाय और अस्तित्व पर खतरा
ये पक्षी हमेशा समूह में रहना पसंद करते हैं। अक्सर एक ही पेड़ पर कई घोंसले एक साथ लटके हुए दिखते हैं, जो किसी सजावट की तरह लगते हैं। यदि खतरा महसूस हो, तो पूरी कॉलोनी मिलकर सतर्क हो जाती है। हालांकि, विशेषज्ञों की चिंता है कि बया पक्षियों की संख्या कम हो रही है। पेड़ कटने और प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण अब इन्हें संरक्षित प्रजातियों में गिना जाने लगा है। प्रकृति के इस छोटे इंजीनियर का हुनर वाकई हैरान कर देने वाला है, जो बिना किसी तकनीक के इंजीनियरिंग की जटिल कला को साकार करता है।













