दीपावली का पावन पर्व नजदीक आते ही घरों में मां लक्ष्मी की आराधना और उपहारों के आदान-प्रदान की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इस खास अवसर पर चांदी के सिक्के खरीदने की पुरानी परंपरा है, जिसका बाजारों में विशेष क्रेज देखने को मिलता है। हालांकि, त्योहारी सीजन की इस धूम के बीच बाजार में मिलावट का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। कई बार लोग सिर्फ चमक देखकर चांदी खरीद लेते हैं, जो बाद में नकली साबित होती है। यदि आप भी इस त्योहारी सीजन में चांदी की खरीदारी करने की सोच रहे हैं, तो कुछ खास बातों को जानना आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
सराफा बाजार से जुड़ा बड़ा अलर्ट
राजस्थान के सराफा बाजार से एक महत्वपूर्ण चेतावनी सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व सस्ते धातु या गिल्ट पर चांदी की परत चढ़ाकर ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं। ये नकली सिक्के और वस्तुएं बाजार में खुलेआम बेची जा रही हैं, जिससे आम खरीदार आसानी से धोखा खा जाते हैं। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए अनुभवी स्वर्ण व्यापारियों ने कुछ आसान और व्यावहारिक जांच के तरीके बताए हैं, जिनकी मदद से ग्राहक खुद ही असली और नकली चांदी के बीच का फर्क समझ सकते हैं।
कम कीमत के लुभावने ऑफर्स से रहें सतर्क
इस विषय पर बात करते हुए राजस्थान के प्रतिष्ठित स्वर्ण व्यवसायी संजय सोनी ने साझा किया कि उन्हें इस व्यापार में 28 साल से ज्यादा का लंबा अनुभव हो चुका है, इसलिए वे केवल देखकर ही धातु की असलियत भांप लेते हैं। लेकिन आम ग्राहकों के लिए ऐसा करना मुश्किल होता है। उनका सुझाव है कि लोगों को हमेशा किसी भरोसेमंद और प्रतिष्ठित दुकान से ही चांदी की खरीदारी करनी चाहिए। केवल कम कीमत या भारी छूट के ऑफर्स के झांसे में बिल्कुल नहीं आना चाहिए। कई बार लोग त्योहार के समय मिलने वाले सस्ते ऑफर्स के लालच में आकर जालसाजों के जाल में फंस जाते हैं और नकली चांदी घर ले आते हैं।
चुंबक और बर्फ से करें शुद्धता की जांच
चांदी की असलियत परखने के लिए चुंबक का परीक्षण बेहद असरदार माना जाता है। इसके लिए एक शक्तिशाली नियोडिमियम मैग्नेट का उपयोग किया जा सकता है। शुद्ध चांदी चुंबकीय नहीं होती है, यानी वह किसी भी चुंबक की तरफ आकर्षित नहीं होती और न ही उससे चिपकती है। यदि आपका खरीदा हुआ सिक्का चुंबक की तरफ तेजी से खिंचता है या उससे चिपक जाता है, तो साफ है कि उसमें लोहे या निकल जैसी अन्य धातुओं की भारी मिलावट की गई है। इसके अलावा, आप बर्फ के टुकड़े की मदद से भी इसकी जांच कर सकते हैं। चांदी के सिक्के या चौड़ी सतह वाली वस्तु पर बर्फ का एक टुकड़ा रखकर देखें। चूंकि चांदी की ऊष्मीय चालकता बहुत अधिक होती है, इसलिए असली चांदी पर रखी बर्फ बहुत तेजी से पिघलने लगती है, जैसे उसे किसी गर्म सतह पर रख दिया गया हो।
हॉलमार्क और अन्य तरीकों से पहचान
खरीदारी करते समय और घर पर अपनी ज्वहरी की बारीकी से जांच करने के लिए आवर्धक लेंस का उपयोग करना चाहिए। भारत में बिकने वाली शुद्ध चांदी पर बीआईएस लोगो के साथ-साथ उसकी शुद्धता का नंबर भी अंकित होता है। इसके साथ ही जौहरी का पहचान चिह्न और हॉलमार्किंग का वर्ष या कोड भी उस पर खुदा होता है। इसके अलावा, एक साफ सफेद सूती कपड़े या सामान्य ब्लैकबोर्ड वाले चाक से चांदी की सतह को हल्के हाथों से रगड़कर देखा जा सकता है। असली चांदी हवा में मौजूद सल्फर के संपर्क में आने की वजह से धीरे-धीरे काली पड़ने लगती है। जब आप इसे चाक या कपड़े से रगड़ेंगे, तो उस पर एक हल्का काला या स्लेटी रंग का निशान बन जाएगा। अगर सतह पर ऐसा कोई निशान नहीं बनता और वह वैसी ही चमकती रहती है, तो इसका मतलब है कि धातु पर केवल ऊपरी चांदी की पॉलिश की गई है।


















