दरभंगा के मिथिलांचल क्षेत्र में एक समय बड़े पैमाने पर की जाने वाली मरुआ की फसल अब एक बार फिर किसानों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। वक्त के साथ यह पारंपरिक फसल भले ही खेतों से धीरे-धीरे गायब हो गई थी, लेकिन इसके पोषक तत्वों और बाजार में बढ़ती भारी मांग के चलते किसान एक बार फिर इसकी खेती की तरफ रुख कर रहे हैं। आज की नई पीढ़ी के कई युवाओं ने शायद मरुआ की फसल को अपनी आंखों से देखा भी न हो, मगर अब इस इलाके में इसकी खेती दोबारा जोर पकड़ती दिखाई दे रही है।
दरभंगा जिले के स्थानीय किसान पंकज कुमार यादव भी अपने खेतों में मरुआ की फसल उगा रहे हैं। उन्होंने इसके फायदों पर चर्चा करते हुए बताया कि मरुआ के एक-एक दाने में प्रचुर मात्रा में पौष्टिकता समाई होती है। यह न केवल पेट के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है, बल्कि मानव शरीर को अंदर से ऊर्जा और ताकत देने में भी काफी मददगार होता है।
कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर सुपरफूड
कृषि हलकों में मरुआ को अक्सर गरीबों का सुपरफूड कहकर भी संबोधित किया जाता है। इस फसल में कैल्शियम, आयरन और फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिहाज से इसे बेहद उपयोगी माना गया है, क्योंकि इसमें आयरन की अच्छी खासी मात्रा मौजूद होती है जो शरीर की कई जरूरतों को पूरा करती है।
मिथिलांचल के कई अन्य किसानों की तरह पंकज कुमार यादव का भी यह मानना है कि मरुआ की फसल उगाने में किसानों को बहुत ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता है, यानी इसकी खेती में लागत अपेक्षाकृत काफी कम आती है। इसके अलावा, सबसे बड़ी खूबी यह है कि बहुत कम पानी की उपलब्धता होने पर भी इसकी बंपर पैदावार आसानी से हो जाती है। यही मुख्य वजह है कि यह फसल अब अन्नदाताओं के लिए अतिरिक्त कमाई का एक मजबूत जरिया बनती जा रही है।
जितिया पर्व और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता
इस पारंपरिक फसल की खेती को दोबारा बढ़ावा मिलने के पीछे जितिया पर्व का भी एक बहुत बड़ा योगदान है। इस पावन अवसर पर मरुआ की विशेष रोटी और प्रसाद तैयार करने के लिए बाजार में इसकी मांग में अचानक काफी इजाफा हो जाता है। त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने से किसानों को उनकी फसल के एवज में बेहतरीन दाम मिलने की पूरी उम्मीद रहती है।
बीते समय में मरुआ को आमतौर पर पिछड़ेपन की निशानी के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज के दौर में इसके औषधीय और पोषण गुणों को लेकर आम जनता के बीच जागरूकता काफी बढ़ चुकी है। किसान पंकज कुमार यादव के अनुसार, डायबिटीज यानी मधुमेह, मोटापा और हड्डियों की कमजोरी जैसी तमाम आधुनिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए भी मरुआ का सेवन बहुत लाभकारी माना जाता है। इसी का परिणाम है कि अब महानगरों और शहरों में रहने वाले लोग भी इसकी मांग लगातार बढ़ा रहे हैं। मरुआ की यह खेती न केवल अपनी पुरानी संस्कृति और पारंपरिक फसलों को पुनर्जीवित कर रही है, बल्कि कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाने का एक सुनहरा अवसर भी मुहैया करा रही है।


















