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सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रह से पहली बार मिले रेडियो सिग्नल, वैज्ञानिकों ने दर्ज की अनोखी तरंगेंविज्ञान
24 सित॰ 2026, 3:05 pm (2 घंटे पहले)· 0

सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रह से पहली बार मिले रेडियो सिग्नल, वैज्ञानिकों ने दर्ज की अनोखी तरंगें

हार्वर्ड और ओरेगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बीटा पिक्टोरिस बी नामक एक्सोप्लैनेट से निकलने वाले रेडियो सिग्नल्स की पुष्टि की है। यह खोज ग्रह के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और अंतरिक्ष में उसकी सक्रियता को समझने में मदद करेगी।

खगोलविदों ने सौरमंडल के बाहर स्थित एक विशाल ग्रह से आने वाली रेडियो तरंगों का पहली बार स्पष्ट रूप से पता लगाया है। हार्वर्ड और ओरेगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के एक शोध में यह दावा किया गया है कि बीटा पिक्टोरिस बी नामक गैस दानव ग्रह से यह प्राकृतिक रेडियो उत्सर्जन हो रहा है। दक्षिण अफ्रीका में मौजूद मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप की मदद से इन संकेतों को रिकॉर्ड किया गया है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई परग्रही संदेश नहीं है, बल्कि ग्रह के भीषण चुंबकीय वातावरण से पैदा होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया का नतीजा है।

बीटा पिक्टोरिस बी की बनावट और खास बातें

बीटा पिक्टोरिस बी एक विशाल गैस जायंट है, जिसका द्रव्यमान हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से भी कई गुना अधिक है। गैस से बने होने के कारण इस ग्रह पर पैर रखने या उतरने लायक कोई ठोस सतह मौजूद नहीं है। अंतरिक्ष के समय पैमाने के अनुसार, कुछ करोड़ साल पुराना होने की वजह से इसे बेहद युवा ग्रह माना जाता है। अपनी कम उम्र के कारण यह अत्यधिक गर्म और चमकदार है। इसके अलावा, अपने मुख्य तारे से इसकी दूरी लगभग उतनी ही है जितनी हमारे सूर्य और शनि ग्रह के बीच है। इस दूरी और चमक के चलते शक्तिशाली टेलीस्कोप से इसे तारे की तेज रोशनी के बावजूद अलग से देखना आसान हो जाता है, जिससे यह सीधे तौर पर सबसे अधिक देखे जाने वाले ग्रहों में शामिल है।

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रेडियो तरंगें कैसे पैदा होती हैं

शोधकर्ताओं के अनुसार, रिकॉर्ड की गई इन रेडियो तरंगों के गुण युवा और भारी ग्रहों के चुंबकीय क्षेत्रों के लिए तय सैद्धांतिक अनुमानों से पूरी तरह मेल खाते हैं। जब ग्रह अपने अक्ष पर तेजी से घूमता है, तो उसके जबरदस्त चुंबकीय क्षेत्र में फंसे आवेशित कण तेजी से गति पकड़ते हैं। कणों की इस तीव्र गति से ऊर्जा निकलती है, जो अंतरिक्ष में रेडियो तरंगों के रूप में बिखर जाती है। इस पूरी प्रक्रिया को ऑरोरल रेडियो एमिशन कहा जाता है, जो वास्तव में ग्रह के चुंबकीय आवरण से अंतरिक्ष में गूंजने वाली ऊर्जा है। वैज्ञानिकों ने ऐसे कई सिग्नलों को दर्ज किया और पहली बार उनके सटीक उद्गम स्थल के रूप में इस एक्सोप्लैनेट की पुष्टि की।

बीते प्रयासों और इस खोज का महत्व

वैज्ञानिक बीते कई वर्षों से किसी एक्सोप्लैनेट से सीधे रेडियो सिग्नल खोजने की कोशिश कर रहे थे। साल 2023 में वाईजेड सेटी ग्रह प्रणाली में भी ऐसे संकेत मिले थे, जो एक ग्रह की कक्षा के साथ तालमेल में दोहराते दिख रहे थे। हालांकि, उस समय वैज्ञानिक इस संभावना को खारिज नहीं कर सके थे कि वे संकेत ग्रह के बजाय उसके तारे की चुंबकीय हलचल से आ रहे थे। इस बार मीरकैट टेलीस्कोप के डेटा ने ग्रह की पहचान को पुख्ता किया है।

खगोल विज्ञान के इतिहास में बीटा पिक्टोरिस

बीटा पिक्टोरिस प्रणाली का अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक महत्व रहा है। साल 1984 में बीटा पिक्टोरिस पहला ऐसा तारा बना था, जिसके चारों ओर धूल और मलबे की चकती की सीधी तस्वीर खींची गई थी। उस तस्वीर ने पहली बार यह संकेत दिया था कि वहां नए ग्रहों के बनने की प्रक्रिया चल रही है, हालांकि उस समय वैज्ञानिक वहां किसी निश्चित ग्रह की मौजूदगी की पुष्टि नहीं कर पाए थे। अब उसी प्रणाली के ग्रह से रेडियो तरंगों का मिलना खगोल विज्ञान में एक नया मील का पत्थर बन गया है।

सवाल-जवाब

क्या बीटा पिक्टोरिस बी से मिले रेडियो सिग्नल किसी एलियन सभ्यता के हैं?
नहीं, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ये सिग्नल पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। ये ग्रह के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और कणों की गति के कारण पैदा हुए हैं।
बीटा पिक्टोरिस बी ग्रह की उम्र कितनी है?
खगोलीय दृष्टि से यह एक बेहद युवा ग्रह है, जिसकी उम्र केवल कुछ करोड़ वर्ष आंकी गई है।
इन रेडियो तरंगों को किस टेलीस्कोप से रिकॉर्ड किया गया?
इन सिग्नलों को दक्षिण अफ्रीका में स्थित मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप की मदद से दर्ज किया गया है।
क्या बीटा पिक्टोरिस बी की सतह पर उतरा जा सकता है?
नहीं, यह बृहस्पति से कई गुना भारी एक गैस जायंट ग्रह है, जिसकी कोई ठोस सतह नहीं है।
बीटा पिक्टोरिस तारे का खगोल विज्ञान में क्या ऐतिहासिक महत्व है?
साल 1984 में यह पहला तारा बना था जिसके चारों ओर धूल और मलबे की चकती की सीधी तस्वीर खींची गई थी।
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