संयुक्त राज्य अमेरिका की एक संघीय अपीलीय अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि नागरिकों के पास साफ और सुरक्षित पेयजल पाने का कोई मौलिक संवैधानिक अधिकार नहीं है. यह कानूनी फैसला मिसिसिपी के जैक्सन शहर के निवासियों द्वारा साल 2022 में दायर किए गए एक मुकदमे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने पानी में भारी गंदगी और जहर होने की शिकायत की थी. इस अदालती फैसले ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अमेरिकी संघीय संविधान की व्याख्या और स्थानीय राज्य कानूनों के बीच के बड़े अंतर को उजागर कर दिया है.
संवैधानिक उपचार पर अदालत का फैसला
यह कानूनी लड़ाई जैक्सन के उन स्थानीय निवासियों द्वारा शुरू की गई थी, जिनका आरोप था कि सरकारी अधिकारियों ने उन्हें प्रदूषित पानी पीने पर मजबूर करके उनके शारीरिक अखंडता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन किया है. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए जज कुर्ट एंगेलहार्ट ने फिफ्थ सर्किट के लिए फैसला सुनाते हुए इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उन्होंने अपने फैसले में लिखा, "The Constitution does not provide redress for every governmental wrongdoing." जज ने स्वीकार किया कि नागरिकों को साफ पानी और सही जानकारी से वंचित रखना बेहद गंभीर मामला था, लेकिन इसके बावजूद इससे किसी ऐसे संवैधानिक अधिकार का हनन नहीं होता है जिसकी जड़ें देश के संविधान में बहुत गहरी हों. इसके अलावा, अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान सरकारी अधिकारियों द्वारा नागरिकों को बिल्कुल सच जानकारी देने का भी कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है, भले ही अधिकारियों द्वारा जारी किए गए उबालकर पानी पीने के नोटिसों ने पानी में सीसे (लेड) की मात्रा को और अधिक बढ़ा दिया हो.
राज्य के कानूनों और वैश्विक अधिकारों के साथ तुलना
भले ही अमेरिकी संघीय संविधान साफ पेयजल को एक बुनियादी अधिकार के रूप में मान्यता नहीं देता है, लेकिन दुनिया के कई देशों और अमेरिका के कई राज्यों ने इस मामले में बिल्कुल अलग रुख अपनाया है. अगर वैश्विक स्तर पर देखें, तो उरुग्वे और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने अपने राष्ट्रीय संविधान में ही साफ पानी के अधिकार को शामिल किया है. खुद अमेरिका के भीतर कम से कम नौ ऐसे राज्य हैं जहां पीने के साफ पानी को कानूनी रूप से सुरक्षित अधिकार माना गया है. उदाहरण के लिए, न्यू यॉर्क ने साल 2021 में अपने राज्य के संविधान में एक संशोधन किया था, जिसके तहत हर व्यक्ति को साफ हवा, शुद्ध पानी और एक स्वस्थ वातावरण पाने का अधिकार दिया गया है. इसी तरह, मैसाचुसेट्स में साल 1972 से ही साफ हवा और पानी के अधिकार को संवैधानिक सुरक्षा मिली हुई है. लेकिन फिफ्थ सर्किट के फैसले के अनुसार, देश का संघीय संविधान इस तरह के दावों को स्वीकार करने के लिहाज से बहुत सीमित है.
जैक्सन शहर का गहराता जल संकट
मिसिसिपी का जैक्सन शहर पिछले कई सालों से पीने के पानी की बेहद खराब व्यवस्था से जूझ रहा है, और इस संकट को वहां की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों ने और अधिक गंभीर बना दिया है. जैक्सन की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी अश्वेत है, और यहाँ गरीबी की दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी ज्यादा है. इस वजह से स्थानीय प्रशासन के पास पानी के पुराने बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए जरूरी बजट नहीं मिल पाता है. यहाँ पानी की सुरक्षा से जुड़ी चेतावनियों को बार-बार नजरअंदाज किया गया. साल 2015 में मिसिसिपी राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पानी की आपूर्ति में सीसे का स्तर सामान्य से बहुत अधिक पाया था, लेकिन उन्होंने इस खतरे के बारे में नागरिकों को तुरंत बताने के बजाय छह महीने तक चुप्पी साधे रखी, जबकि स्थानीय लोग उस जहरीले पानी को पीते रहे. बाद में, साल 2020 में EPA के अधिकारियों द्वारा किए गए परीक्षणों में भी पानी की सुरक्षा नीतियों के गंभीर उल्लंघन पाए गए, जिनमें पानी की लाइनों में भारी रिसाव, जंग लगना और पूरे सिस्टम में सीसे का खतरनाक स्तर शामिल था.
नागरिकों पर पड़ता बुरा असर और पर्यावरण नीतियां
नगर पालिका, राज्य या संघीय एजेंसियों की तरफ से इस दिशा में कोई ठोस कदम न उठाए जाने का खामियाजा वहां के आम परिवारों को भुगतना पड़ा है. साल 2022 के मुकदमे की एक मुख्य याचिकाकर्ता प्रिसिला स्टर्लिंग ने खुद अपनी आंखों के सामने अपने बच्चों को खतरनाक स्तर वाले सीसे से प्रदूषित पानी पीते देखा. इसके बाद उनके कई बच्चों में लेड पॉइजनिंग (सीसे का जहर) की पुष्टि हुई, जिससे दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. जैक्सन शहर में रहने वाले लोगों के लिए यह खतरा बहुत बड़ा है क्योंकि यहाँ की कुल आबादी का एक चौथाई हिस्सा बच्चे हैं, जिन पर सीसे के जहर का सबसे बुरा और जिंदगी भर रहने वाला मानसिक असर पड़ सकता है. यह विवादित फैसला ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों को लगातार कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. हाल ही में, डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में EPA ने एक पूरक नियम जारी किया है जो क्लीन वॉटर एक्ट (साफ पानी अधिनियम) के प्रभाव को और कम करता है. नेशनल वाइल्डलाइफ फेडरेशन के जिम मर्फी ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "If we don’t protect our streams and wetlands, the cost of dirtier drinking water and increased flooding will flow downstream to households."



















