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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों पर अमेरिका और चीन के बीच चेतावनी तंत्र बनाने पर मंथनसाइबर सुरक्षा
21 सित॰ 2026, 4:37 pm (37 दिन पहले)· 2

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों पर अमेरिका और चीन के बीच चेतावनी तंत्र बनाने पर मंथन

वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच एआई से उत्पन्न राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों पर तत्काल सूचना साझा करने का नया ढांचा तैयार करने के लिए बातचीत शुरू हुई है।

दुनिया की दो सबसे बड़ी तकनीकी महाशक्तियों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े गंभीर जोखिमों को लेकर संवाद का नया रास्ता खुल रहा है। अमेरिकी और चीनी प्रतिनिधियों ने एक ऐसे औपचारिक तंत्र की रूपरेखा पर विमर्श शुरू किया है, जिसके तहत दोनों देश राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली किसी भी अप्रत्याशित एआई घटना की पूर्व सूचना या चेतावनी एक-दूसरे को साझा कर सकें। इस पूरी व्यवस्था को 'यूएस चाइना एआई डायलॉग' नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साझा खतरों की पहचान करना और आपसी लक्ष्यों को लेकर दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य बिठाना है।

पारदर्शिता की तरफ बढ़ते कदम

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संवाददाताओं से बातचीत में इस पूरी प्रक्रिया पर जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी सीमा पार प्रभाव डालने वाली किसी तकनीक की बात आती है, तो दुनिया की पहली और दूसरी सबसे बड़ी एआई ताकतों के बीच अपारदर्शिता खत्म करके अधिक पारदर्शिता लाना बेहद आवश्यक हो जाता है। बेसेंट के मुताबिक, वर्तमान बातचीत दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मई में हुई बीजिंग यात्रा के दौरान बनी सहमति की अगली कड़ी है, जिसे अब आगे बढ़ाया जा रहा है।

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बीजिंग बैठक के बाद से ही एआई के बेलगाम विकास और सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं काफी बढ़ चुकी हैं। हाल की गर्मियों में ऐसे सुरक्षा मामले भी सामने आए, जिनमें ओपनएआई के एजेंट्स द्वारा हगिंग फेस पर सेंधमारी जैसी घटनाएं शामिल रहीं। इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि अत्याधुनिक फ्रंटियर मॉडल्स की क्षमताएं कितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं और उद्योग जगत के मौजूदा सुरक्षा मानक उनके मुकाबले कहीं पीछे छूट रहे हैं।

तकनीक की रफ्तार और तबाही की चेतावनियां

इस महीने सुरक्षा को लेकर बहस तब और तेज हो गई जब एंथ्रोपिक के कर्मचारियों ने आशंका जताई कि अनियंत्रित एआई मानवता के वजूद के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इसी को देखते हुए क्षेत्र की अग्रणी प्रयोगशालाओं के कर्ताधर्ता, जैसे ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई और एलन मस्क ने विकास की गति को धीमा करने की वकालत की है, ताकि सुरक्षा से जुड़े कड़े अंतरराष्ट्रीय मानक तय किए जा सकें। डारियो अमोदेई ने अपने एक लेख में सुझाव दिया था कि प्रयोगशालाओं और सरकारों को आपसी तालमेल बैठाना चाहिए और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी सहित प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ मिलकर निगरानी तंत्र खड़ा करना चाहिए।

दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन के भीतर इस विकास को रोकने को लेकर हिचकिचाहट देखी जा रही है। राजनीतिक स्तर पर कड़े नियमन के बढ़ते समर्थन के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने विकास धीमा करने की इन अपीलों को दरकिनार किया है। उनके प्रशासन का तर्क है कि डेवलपर्स पर नियंत्रण के लिए सरकार के पास पहले से ही पर्याप्त आपराधिक और नियामक कानून मौजूद हैं।

चिप निर्यात और आगामी शिखर बैठक

तकनीकी उद्योग के कई दिग्गज भी ट्रंप के इस रुख से सहमति जताते दिख रहे हैं। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेसन हुआंग ने सीबीएस न्यूज को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि कंपनियां पहले से ही साइबर सुरक्षा और नुकसान की जवाबदेही से जुड़े कानूनों के दायरे में आती हैं। उनका कहना था कि किसी प्रलयकारी विमर्श की आड़ में मौजूदा कानूनों को नजरअंदाज करने के बजाय पहले उन्हें ही सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि अनुसंधान धीमा करने से अमेरिका अपनी बढ़त खो देगा और चीन आगे निकल जाएगा। उनके अनुसार एआई की इस रेस में जीत हासिल करने वाला ही वैश्विक स्तर पर हावी रहेगा। उनके मुख्य विज्ञान सलाहकार डेविड सैक्स भी यह आशंका जता चुके हैं कि चीन शायद ही तकनीक की गति धीमी करने वाले किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते में शामिल होगा। इसी बीच, हगिंग फेस के सह-संस्थापक थॉमस वुल्फ, जिनकी कंपनी को खरीदने के लिए हाल ही में एनवीडिया ने सहमति जताई है, ने सवाल उठाया कि जब अमेरिका लगातार अपनी बढ़त बनाए रखने की सार्वजनिक बात कर रहा हो, तब वैश्विक सहयोग की नींव कैसे रखी जा सकती है।

यह पूरी बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका उन्नत चिप्स और चिप निर्माण तकनीक के चीन को निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाकर बीजिंग की बढ़त को सीमित करने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, बेसेंट ने बताया कि सप्ताहांत की बैठकों में चिप निर्यात नियंत्रण पर चर्चा नहीं हुई। यह वार्ता व्यापारिक मुद्दों के साथ काफी सफल रही और इसे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वॉशिंगटन यात्रा से पहले एक सकारात्मक जमीन तैयार करने के रूप में देखा जा रहा है।

सवाल-जवाब

यूएस चाइना एआई डायलॉग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच एआई से उत्पन्न राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों और घटनाओं की जानकारी साझा करने के लिए एक चेतावनी तंत्र बनाना है।
किन तकनीकी हस्तियों ने एआई विकास धीमा करने की मांग की है?
सैम ऑल्टमैन, डारियो अमोदेई और एलन मस्क ने सुरक्षा मानक तय होने तक विकास की गति को धीमा करने का आह्वान किया है।
एआई की रफ्तार धीमी करने पर डोनाल्ड ट्रंप का क्या रुख है?
ट्रंप ने इस अपील को खारिज करते हुए कहा है कि विकास रोकने से अमेरिका पिछड़ जाएगा और चीन इस तकनीक में बढ़त बना लेगा।
एनवीडिया के सीईओ जेसन हुआंग ने नियमों पर क्या राय दी?
जेसन हुआंग ने कहा कि एआई कंपनियां पहले से ही साइबर सुरक्षा और नुकसान की जवाबदेही से जुड़े कानूनों के अधीन हैं और पहले उन्हें ही लागू किया जाना चाहिए।
क्या इन वार्ताओं में उन्नत चिप्स के निर्यात प्रतिबंधों पर बात हुई?
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार इस सप्ताहांत की बैठकों में चिप निर्यात प्रतिबंधों पर कोई चर्चा नहीं की गई।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का आगामी कार्यक्रम क्या है?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसी सप्ताह वॉशिंगटन के आधिकारिक दौरे पर पहुंच रहे हैं।
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