सऊदी अरब के ऊपर पैंतीस हज़ार फीट की ऊँचाई पर उड़ रहे विमान में जब अचानक अफरातफरी मची, तब नीचे गिरते जहाज और मौत के बीच केवल एक भारी इलेक्ट्रॉनिक दरवाज़ा खड़ा था। फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में कैप्टन स्मित माच्छर लहूलुहान होकर फर्श पर गिर चुके थे और सह-पायलट नियंत्रण कक्ष में तबाही मचा रहा था। अगर उस अंतिम क्षण में कैप्टन स्मित ने अपनी बची-खुची ताकत समेटकर कॉकपिट का सुरक्षा ताला अंदर से न खोला होता, तो बाहर खड़े मुसाफिरों या केबिन क्रू के लिए उस बुलेटप्रूफ केबिन में घुसना नामुमकिन था। खुद कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में बताया कि जब वह नीचे गिरे हुए थे, तब उन्हें साफ महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे की ओर जा रहा है। उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए महसूस किया कि यह उनके पास आखिरी मौका है, और ठीक सामने मौजूद दरवाजे के स्विच को दबा दिया। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ-साथ ट्रंप और नेतन्याहू जैसे नेताओं ने उनके इस त्वरित फैसले को एक बड़ा साहसिक कदम बताया है, क्योंकि विमानन इतिहास में मजबूत कॉकपिट दरवाजों ने कई बार विमान को सुरक्षित रखने के बजाय अंदर मौजूद आत्मघाती पायलटों को रोकने का हर रास्ता बंद कर दिया था।
अभेद्य दीवार जैसा होता है आधुनिक कॉकपिट का दरवाज़ा
हवाई जहाज के कॉकपिट का दरवाज़ा किसी सामान्य कमरे का किवाड़ नहीं होता, बल्कि यह सुरक्षा की कई परतों से लैस एक रक्षा कवच होता है। इसकी मुख्य अंदरूनी परत केवलर जैसे बेहद मजबूत फाइबर पदार्थों से तैयार की जाती है, जो मजबूती के मामले में साधारण स्टील से लगभग पांच गुना अधिक ताकतवर मानी जाती है। यह परत एक से दो इंच तक मोटी होती है, और कई बड़े यात्री विमानों में इसके ऊपर स्टील या टाइटेनियम धातु की अतिरिक्त परत भी चढ़ाई जाती है।
हवाई सुरक्षा मानकों के तहत इस दरवाजे की क्षमता को कई कड़े परीक्षणों से परखा जाता है। इसे भारी दबाव, हिंसक वार और औजारों के हमलों को झेलने के हिसाब से बनाया जाता है। भले ही ये दरवाजे हर तरह की स्थिति में पूरी तरह बुलेटप्रूफ न माने जाएं, फिर भी इनकी बनावट गोलियों की बौछार और हैंड ग्रेनेड के विस्फोट को सहने के लिए खास तौर पर डिजाइन की जाती है। इसी मजबूती के कारण जब यात्रियों ने कॉकपिट के भीतर से चीख-पुकार और हाथापाई की आवाजें सुनीं, तब कुछ लोगों ने बाहर से धक्का देकर उसे खोलने की कोशिश की, लेकिन वे तनिक भी सफल नहीं हो सके। बिना अंदर बैठे व्यक्ति की रजामंदी के इस दरवाजे को तोड़ना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
कॉकपिट लॉक प्रणाली और बाहर से खोलने की जटिल व्यवस्था
आधुनिक विमानों में कॉकपिट दरवाजों की लॉकिंग प्रणाली पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक होती है। आतंकवादियों को चकमा देने और सुरक्षा को गुप्त रखने के लिए अलग-अलग विमानों में यह लॉकिंग व्यवस्था एक समान नहीं रखी जाती। इस उड़ान में शामिल बोइंग 737 विमान में उड़ान के दौरान सुरक्षा प्रणाली अपने आप ऑटोमैटिक मोड पर रहती है, जिसका सीधा मतलब है कि दरवाज़ा हर समय पूरी तरह बंद और लॉक रहेगा।
यदि उड़ान के बीच केबिन क्रू को पायलटों के लिए पानी पहुंचाने या किसी आवश्यक काम से अंदर जाना हो, तो उन्हें पहले अंदर अनुमति मांगनी पड़ती है। इसके बाद पायलट अंदर लगे स्विच को अनलॉक मोड पर ले जाता है और कुछ देर पकड़कर रखता है, तभी दरवाज़ा खुल पाता है।
विमान के बाहर एक आपातकालीन कीपैड भी लगा होता है। यदि बाहर से कोई सही गोपनीय कोड दर्ज करता है, तो कॉकपिट के भीतर एक टाइमर शुरू हो जाता है और अलार्म बजने लगता है। पायलट अपनी सीट से कैमरे या दरवाजे के छोटे छेद से बाहर देखता है। यदि वह चाहे तो अंदर से दरवाज़ा खोल सकता है या फिर अंदर से ही प्रवेश को पूरी तरह अस्वीकार कर सकता है। अगर पायलट अंदर से कोई जवाब नहीं देता, तो कुछ तय समय बाद दरवाज़ा अपने आप खुल जाता है, ताकि दोनों पायलटों के अचानक बेहोश होने पर क्रू अंदर आ सके। लेकिन यदि अंदर बैठा पायलट जानबूझकर किसी को आने से मना कर दे या स्विच को लॉक स्थिति में रखे, तो इस आपातकालीन कीपैड से भी दरवाज़ा नहीं खोला जा सकता। इसके अलावा जब कोई पायलट शौचालय जाने के लिए बाहर निकलता है, तब कॉकपिट कुछ पलों के लिए असुरक्षित हो जाता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए कॉकपिट और गैली क्षेत्र के बीच धातु की रॉड या मजबूत केबल का इस्तेमाल करके एक दूसरा सुरक्षा घेरा भी तैयार किया जाता है।
हवा में मौत से जंग और कैप्टन स्मित की सूझबूझ
फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 ने 30 सितंबर को सुबह 7:05 बजे दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। अगले करीब ढाई घंटे तक सफर बिल्कुल सामान्य तरीके से चल रहा था और जहाज 35,000 फीट की शांत ऊँचाई पर उड़ रहा था। लेकिन सुबह 9:21 बजे, जब विमान सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र में था, अचानक जहाज तेजी से नीचे की तरफ गोता लगाने लगा। केबिन में बैठे मुसाफिरों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर क्या हो रहा है।
अचानक नीचे गिरने के बाद विमान एक बार ऊपर उठा, लेकिन फिर तेजी से गिरते हुए लगभग 14,000 फीट की ऊँचाई पर आ गया। परिस्थितियों से साफ संकेत मिलता है कि जब सह-पायलट विमान को नीचे गिराने की कोशिश कर रहा था, तब कैप्टन स्मित ने संघर्ष करते हुए कंट्रोल स्टिक को पीछे खींचकर विमान को ऊपर उठाने की कोशिश की थी, लेकिन हमलावर पायलट ने दोबारा स्टिक को आगे धकेल दिया।
कैप्टन स्मित ने बाद में बताया कि वह सत्रह साल से हवाई जहाज उड़ा रहे हैं और आँखें बंद करके भी समझ सकते हैं कि विमान के साथ क्या हो रहा है। जब वह खून से लथपथ होकर फर्श पर पड़े थे, उन्हें लगा कि अगर अभी कुछ नहीं किया तो सब खत्म हो जाएगा। उन्होंने हिम्मत जुटाकर दरवाजे का लॉक स्विच दबा दिया।
दरवाज़ा खुलते ही सबसे पहले इजरायली प्लंबर यानी नलसाज यानिव हयुन अंदर पहुंचे। यानिव ने बताया कि उन्होंने पहले बाहर से दरवाज़ा खोलने की कोशिश की थी लेकिन वह नहीं खुला था। जब वह अंदर पहुंचे तो दोनों पायलटों की सीटें खाली थीं। स्मित खून से सने फर्श पर पड़े थे, जबकि सह-पायलट दोनों सीटों के बीच कंट्रोल पैनल पर चढ़कर उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। यानिव ने तुरंत हमलावर सह-पायलट की गर्दन पकड़ी और उसे घसीटकर कॉकपिट से बाहर निकाल दिया। नेतन्याहू के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने कहा कि कैप्टन स्मित ने अपनी अंतिम ताकत का इस्तेमाल करके दरवाज़ा खोला था। वहीं मुंबई के घाटकोपर में स्मित के परिवार के पड़ोसी डॉ. जिनित शाह ने बताया कि स्मित आपात स्थितियों में बहुत सटीक और त्वरित फैसले लेते हैं, वह अन्य पायलटों को प्रशिक्षण दे चुके हैं और उनकी अपनी अकादमी भी है।
9/11 की घटना और कॉकपिट की सुरक्षा में आए ऐतिहासिक बदलाव
साल 2001 से पहले तक हवाई जहाजों के कॉकपिट दरवाज़े बेहद हल्के और साधारण घरेलू दरवाजों जैसे हुआ करते थे। उनका मुख्य उद्देश्य केवल इतना था कि पायलटों को उड़ान के दौरान कोई परेशान न करे और उनकी प्राइवेसी बनी रहे। उन दरवाजों में हथियारों से लैस हमलावरों या जबरन घुसपैठ को रोकने की कोई क्षमता नहीं थी।
लेकिन 11 सितंबर 2001 को दुनिया ने आतंकवाद का सबसे खौफनाक मंजर देखा। अल-कायदा के उन्नीस आतंकवादियों ने चार अमेरिकी विमानों का अपहरण कर लिया। वे चारों विमान बोइंग के ही थे। आतंकवादियों ने बेहद आसानी से उन कमजोर दरवाजों को तोड़ दिया और पायलटों को बंधक बना लिया। इसके बाद दो विमान न्यूयॉर्क के ट्विन टावर्स से टकराए गए, एक विमान पेंटागन पर गिरा और चौथा एक खुले मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हमले में कुल 2,900 से अधिक निर्दोष लोगों की जान चली गई।
इस भयानक त्रासदी से सबक लेते हुए अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफएए ने विमानों की सुरक्षा को कड़ा करने के निर्देश जारी किए। साथ ही इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन यानी आईसीएओ ने भी बुलेट-रेसिस्टेंट कॉकपिट दरवाजे लगाने और एयरलाइन कर्मचारियों की कड़ी जांच के नियम बनाए। साल 2003 से बोइंग और एयरबस जैसी दिग्गज विमान निर्माता कंपनियों ने अपने जहाजों में बेहद मजबूत और अभेद्य दरवाजे लगाने शुरू कर दिए। लेकिन बाद के वर्षों में यही अभेद्य दरवाजे विमान सुरक्षा के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बनकर सामने आए।
जब कॉकपिट की मजबूती ही बन गई सैकड़ों मौतों की वजह
कॉकपिट के इन मजबूत दरवाजों की वजह से विमानन क्षेत्र में कई दिल दहला देने वाले हादसे दर्ज किए गए हैं, जहाँ अंदर बंद पायलट ने खुद ही विमान को तबाह कर दिया
- मोजांबिक एयरलाइंस हादसा (2013): 29 नवंबर 2013 को मोजांबिक एयरलाइंस की एक उड़ान के दौरान सह-पायलट ग्रेसियो चिमकिली टॉयलेट जाने के लिए बाहर निकला। कॉकपिट में अकेले बचे कैप्टन सैंटोस फर्नांडीज ने तुरंत दरवाज़ा अंदर से लॉक कर लिया। उसने तीन चरणों में विमान को 38,000 फीट से नीचे लाकर 592 फीट तक गिराया और नामीबिया में क्रैश करवा दिया। हादसे में सभी 33 यात्रियों की मौत हो गई। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में सह-पायलट ग्रेसियो के दरवाजे पर जोर-जोर से पीटने और चिल्लाने की आवाजें दर्ज हुई थीं।
- जर्मनविंग्स फ्लाइट 9525 (2015): 24 मार्च 2015 को बार्सिलोना से डसेलडोर्फ जा रही जर्मनविंग्स की उड़ान में कैप्टन जब शौचालय गए, तब सह-पायलट एंड्रियास लुबिट्ज़ ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया। कैप्टन बाहर से दरवाज़ा पीटते रहे और विनती करते रहे, लेकिन लुबिट्ज़ ने कोई जवाब नहीं दिया। एयर ट्रैफिक कंट्रोल के संपर्क करने पर भी वह चुप रहा। लुबिट्ज़ ने विमान को आल्प्स की पहाड़ियों में दे मारा, जिससे उसमें सवार सभी 150 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
- चाइना ईस्टर्न विमान हादसा (2022): मार्च 2022 में चाइना ईस्टर्न का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें सवार सभी 132 लोगों की जान चली गई। हालांकि चीन ने इस हादसे की अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं की है, लेकिन उड़ान के आंकड़ों से पता चला कि दोनों इंजनों के ईंधन स्विच हाथ से बंद किए गए थे और कॉकपिट के भीतर दोनों पायलटों के बीच भारी संघर्ष हुआ था।
बाहर से दरवाज़ा खोलने की व्यवस्था पर विशेषज्ञों की राय
इन लगातार घटनाओं को देखते हुए अब सुरक्षा विशेषज्ञ कॉकपिट दरवाजों के डिजाइन और नियमों पर नए सिरे से विचार करने की मांग कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ फिलिप बॉम का कहना है कि 9/11 के बाद से विमानन उद्योग ने आतंकवादी हमलों की तुलना में पायलटों की आत्महत्या और अंदरूनी घटनाओं में कहीं अधिक जानें गंवाई हैं। अधिकांश मामलों में ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हमने कॉकपिट को एक ऐसा किला बना दिया जिसे बाहर खड़े भले लोग भेद नहीं सकते थे, जो अंदर किसी सिरफिरे पायलट को रोकने में सक्षम हो सकते थे।
प्रैक्टिकल एविएशन सिक्योरिटी के लेखक प्रोफेसर जेफ प्राइस का मानना है कि यह पूरा मामला भरोसे और जोखिम से जुड़ा हुआ है। विमान के पायलटों और क्रू सदस्यों के पास जहाज का पूरा नियंत्रण होता है। यदि कोई अंदर से ही विमान को नुकसान पहुंचाना चाहे तो वह आसानी से कर सकता है। मजबूत दरवाजों ने बाहरी दुनिया के लोगों को कॉकपिट में घुसने से तो रोक दिया, लेकिन जब खतरा कॉकपिट के भीतर से ही पैदा होता है, तब ये सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बेअसर साबित हो जाती है।



















