रिश्तों में अंतरंगता और प्यार का होना स्वाभाविक है, लेकिन जब दो लोगों की इच्छाओं में भारी अंतर आ जाए, तो स्थितियां जटिल हो जाती हैं। हाल ही में एक महिला ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी एक बड़ी समस्या साझा की है, जिसमें वह अपने पार्टनर की असीमित कामेच्छा के आगे पूरी तरह बेबस महसूस कर रही है। दोनों की मुलाकात अठारह महीने पहले हुई थी और कुछ समय पहले ही वे एक साथ रहने लगे हैं, लेकिन इस बदलाव के बाद से स्थिति काफी बदल चुकी है।
अजीबोगरीब मांगें और काम के बीच रुकावट
दोनों इन दिनों घर से ही काम करते हैं, जिसका मतलब है कि वे पूरा दिन एक ही छत के नीचे गुजारते हैं। महिला का कहना है कि उसका बॉयफ्रेंड दिन में दो या तीन बार उसके वर्कस्पेस यानी स्पेयर बेडरूम में आ जाता है और तुरंत अंतरंग होने की उम्मीद करता है। वह इस बात की परवाह नहीं करता कि उसकी पार्टनर किसी जरूरी दफ्तर के काम में व्यस्त है या नहीं, बल्कि वह पहले से ही यह मान लेता है कि महिला भी उसी मूड में होगी। इसके अलावा, बाहर जाने की योजना बनाते समय भी यही हाल रहता है। जब भी महिला तैयार होकर पार्टी या किसी सामाजिक कार्यक्रम के लिए निकलती है, तो उसका पार्टनर खुद को रोक नहीं पाता। इसके चलते वे हमेशा किसी भी कार्यक्रम में देरी से पहुंचते हैं और महिला को दोबारा सारा मेकअप और कपड़े ठीक करने पड़ते हैं।
शुरुआत का रोमांच और अब बढ़ता तनाव
जब वे पहली बार मिले थे, तब इस तरह की चीजें काफी रोमांचक और अप्रत्याशित लगती थीं। शुरुआत में यह सब बहुत सहज था, जैसे कभी पार्क में टहलते हुए या माता-पिता के घर जाने पर अचानक से अंतरंग हो जाना। महिला को उस वक्त इस espontaneity में मजा आता था, और उसे उम्मीद थी कि जैसे-जैसे समय बीतेगा, यह तीव्रता थोड़ी कम हो जाएगी। हालांकि, हुआ इसके ठीक विपरीत और समय के साथ उसका बॉयफ्रेंड और अधिक उत्सुक और आक्रामक होता चला गया। अब स्थिति यह है कि महिला इस लगातार दबाव से पूरी तरह थक चुकी है। जब वह अपनी इस परेशानी का जिक्र अपने पार्टनर से करती है, तो वह इसे गंभीरता से लेने के बजाय सिर्फ हंस देता है और कहता है कि उसे खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए।
सीमाओं को तय करने और संवाद की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रिश्ते में अंतरंगता की कोई तयशुदा सीमा नहीं होती, क्योंकि हर जोड़ा अपनी सुविधा के अनुसार अपने समीकरण तय करता है। कुछ लोग दिन में कई बार तो कुछ साल में कुछ ही बार ऐसा पसंद करते हैं, और जब दोनों की सहमति हो तो कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन जब एक साथी की इच्छाएं लगातार बहुत ज्यादा हों और दूसरा पार्टनर उस रफ्तार के साथ सहज न हो, तो गंभीर संवाद की आवश्यकता पड़ती है। यदि जोड़े के बीच बाकी सभी चीजें ठीक हैं, तो इसे बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। महिला को चाहिए कि वह अपने पार्टनर से खुलकर बात करे और पूछे कि आखिर उसे इतनी बार-बार क्यों इस बात की जरूरत महसूस होती है। कई बार यह सिर्फ शारीरिक हॉर्मोन का असर होता है या फिर पार्टनर को यह लगातार आश्वस्त करने की चाहत होती है कि उसका साथी हमेशा उसके साथ है। इसके बावजूद, यदि संवाद से बात नहीं बनती है, तो कपल्स काउंसलिंग का सहारा लिया जा सकता है, या फिर यह सोचना पड़ सकता है कि क्या इस तरह के रवैये के साथ जिंदगी भर रहना संभव है या नहीं।



















