कानपुर से कैलाश मानसरोवर गए तीन लोग लापता, नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ के बीच टूटा संपर्कपटना में ट्रक चालक की पीट-पीटकर हत्या का सनसनीखेज मामला, आक्रोशित ड्राइवरों का जोरदार प्रदर्शनफिल्म टॉक्सिक में संजीदा शेख के कैमियो ने जीता दर्शकों का दिल, यश की मां बनकर बिखेरा अभिनय का जादूबजट 2027: वित्त मंत्रालय 12 अक्टूबर से शुरू करेगा तैयारियां, 1 फरवरी को पेश होगा वित्तीय दस्तावेजएससीओ शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य एशिया दौरे से पाकिस्तान और चीन की बढ़ी चिंतानीट आंदोलन से चर्चा में आईं रिया अहीर बिग बॉस 20 में आ सकती हैं नजरसफर के दौरान कार की बैटरी हो जाए डिस्चार्ज, अपनाएं ये आसान तरीकाजमुई के पास वीकेंड पर घूमने के लिए 5 बेहतरीन जगहें, एक दिन की ट्रिप में लें आस्था और रोमांच का मजालखनऊ को मिला नया फ्रेगरेंस पार्क और श्रीराम सीनियर सिटीजन होम, राजनाथ सिंह ने दी बड़ी सौगातेंमहिला एशिया कप 2026 में थाईलैंड से भिड़ेगी भारतीय टीम, जानिए कब और कहां देख सकेंगे मुकाबला
राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा और कांग्रेस में टिकट मंथन तेज, बगावत रोकने की रणनीति में जुटे दोनों दलराजस्थान
29 अग॰ 2026, 11:04 pm (1 घंटे पहले)· 2

राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा और कांग्रेस में टिकट मंथन तेज, बगावत रोकने की रणनीति में जुटे दोनों दल

राजस्थान में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों में टिकट बंटवारे और नामांकन को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। शनिवार को दोनों दलों के दफ्तरों में बैठकों का दौर चला, जबकि कई जगहों पर नेताओं ने बगावत के सुर भी तेज कर दिए हैं।

राजस्थान की स्थानीय निकाय चुनावी हलचल के बीच शनिवार का दिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के लिए बेहद गहमागहमी भरा रहा। नामांकन की अंतिम तारीख पास आने के साथ ही दावेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं, और दोनों ही राजनीतिक खेमे अपने उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने की कवायद में जुटे रहे। पार्टी की आधिकारिक सूची का इंतजार किए बिना कई जगहों पर उम्मीदवारों ने पहले ही अपने परचे दाखिल कर दिए, तो कुछ जिलों में सूची के इंतजार में असमंजस की स्थिति बनी रही।

भाजपा मुख्यालय में संभागवार बैठकों का दौर

राजधानी जयपुर स्थित भाजपा कार्यालय में शनिवार को दिनभर संभागवार मैराथन बैठकों का सिलसिला चलता रहा। पार्टी नेताओं ने एक-एक नाम पर बेहद बारीकी से चर्चा की। जोधपुर संभाग से जुड़ी बैठक का दौर देर रात तक खिंच गया, जिसके तुरंत बाद अन्य संभागों के नामों पर विचार किया गया। इन महत्वपूर्ण बैठकों में पाली से सांसद पीपी चौधरी और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पार्टी की तरफ से बार-बार यही दोहराया गया कि टिकट वितरण का आधार जमीनी हकीकत और कार्यकर्ताओं का फीडबैक ही होगा। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता अरुण चतुर्वेदी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि स्थानीय नेताओं के जरिए संभावित प्रत्याशियों का आकलन किया जा रहा है और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को पूरी प्राथमिकता दी जा रही है।

ये भी पढ़ें

कानूनी प्रक्रिया के लिए अधिवक्ताओं की फौज

केवल टिकट चयन ही नहीं, बल्कि नामांकन प्रक्रिया की बारीकियों को संभालने के लिए भी भाजपा ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। पार्टी ने लगभग 150 वकीलों को चुनावी नामांकन से जुड़ी कानूनी और तकनीकी सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंपी है। पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उम्मीदवारों की सूची को शनिवार रात या रविवार सुबह तक पूरी तरह अंतिम रूप दे दिया जाएगा। टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर संभावित बगावत के तेवरों से निपटने के लिए भी भाजपा पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। सैनी ने कहा कि पार्टी में हर कार्यकर्ता को टिकट मांगने का हक है, लेकिन हर किसी को टिकट मिलना मुमकिन नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि टिकट न मिलने पर नाराजगी होना स्वाभाविक बात है, और यदि नामांकन के बाद बगावत के हालात बनते हैं, तो पार्टी आपसी बातचीत के जरिए स्थिति को संभाल लेगी।

कांग्रेस वार रूम में चली लंबी मंत्रणा

दूसरी तरफ विपक्षी दल कांग्रेस के खेमे में भी शनिवार का पूरा दिन टिकटों पर माथापच्ची करने में बीता। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जयपुर स्थित कांग्रेस वार रूम पहुंचे। डोटासरा ने बताया कि करीब 90 फीसदी स्थानीय निकायों के लिए वहां के स्थानीय नेताओं की आपसी सहमति से नाम तय करके प्रदेश नेतृत्व को भेजे जा चुके हैं। प्रांतीय स्तर पर एक-एक निकाय की सीट पर गहन मंथन किया जा रहा है। जिन नामों पर आम सहमति बनती दिखी, उन्हें शनिवार को ही नामांकन दाखिल करने के निर्देश दे दिए गए। हालांकि जिन सीटों पर पेच फंसा हुआ है या विवाद की स्थिति है, उन पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट और भंवर जितेंद्र सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के साथ मिलकर चर्चा की जाएगी।

कांग्रेस की तरफ से यह दावा किया गया है कि केवल उन्हीं चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा जाएगा जो जिताऊ होने के साथ-साथ जनता के बीच पूरी तरह सक्रिय रहे हों। इसके साथ ही युवाओं के अलावा भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन, युवा कांग्रेस, सेवादल, महिला कांग्रेस और अन्य अनुषांगिक संगठनों के नुमाइंदों को टिकटों में विशेष तरजीह देने की बात कही गई है। टिकट से वंचित रहने वाले नेताओं और संभावित बागी तेवर दिखाने वालों को मनाने की जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को सौंपी गई है।

विभिन्न शहरों में नामांकन और विरोध के सुर

प्रदेश भर में चल रही चुनावी सरगर्मी के बीच नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया ने राजनीतिक पारा और बढ़ा दिया। टोंक शहर से कांग्रेस नेता अकबर खान ने अपने समर्थकों के साथ पहुंचकर वार्ड 27 के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। वहीं दूसरी ओर राजसमंद जिले की कुल पांच स्थानीय निकायों में शनिवार को 105 पर्चे दाखिल किए गए। इनमें अकेले नाथद्वारा में 32, राजसमंद नगर परिषद में 25, आमेट में 24, जबकि भीम और देवगढ़ में 12-12 नामांकन शामिल हैं। पाली में नामांकन पत्र लेने वालों की भारी भीड़ देखने को मिली और अब तक 461 दावेदार फॉर्म ले चुके हैं, हालांकि पार्टियों द्वारा उम्मीदवार तय न होने के कारण वहां अभी भी सस्पेंस बरकरार है। अजमेर में उस समय राजनीतिक हलचल बढ़ गई जब पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना पर्चा दाखिल किया और स्थानीय भाजपा नेताओं पर खुलकर निशाना साधा।

सिरोही और प्रतापगढ़ में भी तेज हुई गतिविधियां

सिरोही जिले में भी भाजपा ने टिकट के तमाम आवेदनों पर अंतिम विचार-विमर्श शुरू कर दिया है और पूरी तरह जिताऊ चेहरों पर दांव लगाने की बात सामने आ रही है। पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ-साथ युवाओं को भी चुनावी मैदान में उतारने पर विचार चल रहा है। प्रतापगढ़ में शनिवार को नगर परिषद चुनाव के लिए कुल 12 नामांकन दाखिल किए गए, जबकि इसके ठीक उलट पहले दिन एक भी पर्चा दाखिल नहीं हुआ था। दोनों ही प्रमुख दलों की ओर से अभी तक आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है, और सोमवार को बड़े पैमाने पर शक्ति प्रदर्शन के साथ नामांकन दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। राजसमंद में भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल ने बताया कि पार्टी को जिलेभर से 1200 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों के चयन के लिए चार अलग-अलग स्तर पर सर्वे कराए गए हैं और हर एक वार्ड पर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की पैनी नजर बनी हुई है।

दिन के अंत में दोनों दलों के अपने-अपने दावे

जैसे-जैसे चुनावी दिन अपने अंतिम चरण में पहुंचा, भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी-अपनी जीत को लेकर पूरे आत्मविश्वास का इजहार किया। भाजपा नेता हरीश द्विवेदी ने कहा कि उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और 31 अगस्त तक पार्टी सभी प्रत्याशियों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर देगी। उन्होंने केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों का हवाला देते हुए निकाय चुनावों में शानदार जीत हासिल करने का दावा किया। राज्य के कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने तो यहां तक दावा किया कि प्रदेश के सभी 309 नगरीय निकायों में भारतीय जनता पार्टी अपना बोर्ड बनाएगी। इसके साथ ही मंत्री जोराराम कुमावत ने भी पाली में भाजपा का परचम लहराते रहने की पूरी उम्मीद जताई।

इसके विपरीत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पलटवार करते हुए दावा किया कि प्रदेश की जनता मौजूदा भाजपा सरकार की कार्यशैली से बेहद खफा है और कांग्रेस पार्टी सभी के साथ आपसी सहमति बनाकर टिकट बांटेगी तथा चुनाव जीतेगी। उन्होंने बढ़ती महंगाई, गिरती शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, समग्र विकास और कानून व्यवस्था के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाते हुए भाजपा सरकार को घेरे में लिया। कुल मिलाकर शनिवार का पूरा दिन टिकट की दावेदारी, नामांकन के कागजात और टिकट कटने से नाराज नेताओं को संभालने के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा। अब जबकि नामांकन की आखिरी तारीख 31 अगस्त है, आगामी दो दिन दोनों ही राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

सवाल-जवाब

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव किस वर्ष के लिए आयोजित किए जा रहे हैं?
यह चुनाव राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 के संदर्भ में आयोजित किए जा रहे हैं।
भाजपा मुख्यालय में बैठकों के दौरान कौन से प्रमुख नेता मौजूद रहे?
भाजपा मुख्यालय की बैठकों में पाली सांसद पीपी चौधरी और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
कांग्रेस वार रूम में किन वरिष्ठ नेताओं ने बैठक की?
कांग्रेस वार रूम में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बैठक की।
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख क्या है?
नगरीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है।
राजसमंद जिले की पांच नगर निकायों में शनिवार को कुल कितने नामांकन दाखिल हुए?
राजसमंद जिले की पांच नगर निकायों में शनिवार को कुल 105 नामांकन दाखिल किए गए।
भाजपा ने नामांकन प्रक्रिया में मदद के लिए कितने अधिवक्ताओं को जिम्मेदारी दी है?
भाजपा ने लगभग 150 अधिवक्ताओं को नामांकन से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया में मदद की जिम्मेदारी सौंपी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·37 मिनट पहले

नगरीय निकाय चुनाव के इस दौर में टिकट वितरण और नामांकन प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है। भाजपा द्वारा 150 वकीलों की फौज तैनात करना और कांग्रेस का स्थानीय स्तर पर आपसी सहमति बनाना यह दर्शाता है कि दल केवल चुनावी जीत ही नहीं, बल्कि तकनीकी और कानूनी अड़चनों से निपटने की तैयारी में भी जुटे हैं। आने वाले दिनों में बगावत रोकने के लिए दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं को कड़े अनुशासनात्मक और रणनीतिक कदम उठाने होंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·36 मिनट पहले

निकाय चुनावों में टिकट वितरण के समय होने वाली बगावत और असंतोष से निपटना किसी भी दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। जैसा कि इस रिपोर्ट में स्पष्ट है, भाजपा ने कानूनी सहायता के लिए वकीलों की फौज तैनात की है और कांग्रेस स्थानीय सहमति पर जोर दे रही है। हालांकि, नाम वापसी की अंतिम तिथि नजदीक आने पर बागी उम्मीदवारों को मनाना और भीतरघात रोकना ही इन चुनावों के परिणाम तय करेगा, क्योंकि स्थानीय चुनावों में बड़े चेहरों की बजाय जमीनी नाराजगी सीधा असर डालती है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR