देश के सबसे व्यस्त और भारी ट्रैफिक जाम से जूझने वाले महानगरों की बात की जाए तो दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई का नाम हमेशा सबसे आगे आता है। आर्थिक राजधानी मुंबई में एक जगह से दूसरी जगह सफर करने में वाहन चालकों को कई घंटे सड़कों पर ही गुजारने पड़ते हैं। खासकर मुंबई के महत्वपूर्ण इलाके माने जाने वाले थाणे और बोरिवली के बीच रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को भारी ट्रैफिक के कारण एक से डेढ़ घंटे का वक्त लग जाता है। आम जनता को इस ट्रैफिक की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार इन दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क को सुगम बनाने के वास्ते एक आधुनिक टनल का निर्माण कर रही है। इस परियोजना के मूर्त रूप लेने के बाद इन दोनों स्थानों के बीच की मौजूदा दूरी को महज़ 15 मिनट में तय किया जा सकेगा। इस अनोखी भूमिगत सुरंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके भूतल से काफी नीचे कारें 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी और ठीक इसके ऊपर राष्ट्रीय उद्यान में बाघ और भालू जैसे वन्यजीव स्वतंत्र रूप से खेलते हुए नजर आएंगे।
मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी की महत्वकांक्षी पहल
मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी एमएमआरडीए ने थाणे-बोरिवली ट्विन टनल प्रोजेक्ट का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इस विशाल सुरंग के निर्माण का अगला महत्वपूर्ण चरण भी अब आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है, जिसे टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम-2 अर्जुन की सहायता से पूरा किया जा रहा है। एक बार जब यह पूरी सुरंग बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगी, तब थाणे से बोरिवली का सफर तय करना यात्रियों के लिए बेहद सुगम हो जाएगा। वर्तमान समय में इन दोनों क्षेत्रों के बीच आने-जाने के लिए लगभग 60 से 90 मिनट का लंबा वक्त खर्च करना पड़ता है, लेकिन इस विशेष टनल के रास्ते यह सफर सिर्फ 15 मिनट में ही पूरा हो जाएगा। मौजूदा समय में सड़क मार्ग के जरिए थाणे से बोरिवली की दूरी करीब 26 किलोमीटर से अधिक है, जो इस टनल के बन जाने के बाद घटकर महज 12 किलोमीटर के आसपास रह जाएगी।
संजय गांधी नेशनल पार्क के भूगर्भ में हो रहा है निर्माण
इस बहुचर्चित थाणे बोरिवली टनल का निर्माण कार्य देश के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक धरोहर वाले संजय गांधी नेशनल पार्क के ठीक नीचे किया जा रहा है। एमएमआरडीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया है कि इस टनल के निर्माण कार्य में अर्जुन मशीन के साथ-साथ टीबीएम-1 मशीन जिसका नाम नायक है, वह भी पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। नायक नामक मशीन ने अपनी पहली टनल की खुदाई का काम लगभग पूरा कर लिया है। ये दोनों अत्याधुनिक बोरिंग मशीनें मिलकर करीब 10.25 किलोमीटर लंबी टनल की खुदाई का काम संभाल रही हैं। कुल मिलाकर यह पूरा प्रोजेक्ट लगभग 11.84 किलोमीटर की कुल लंबाई वाला होगा। एमएमआरडीए का आधिकारिक तौर पर कहना है कि यह भूमिगत सुरंग देश के किसी भी शहरी क्षेत्र में बनाई जाने वाली अब तक की सबसे लंबी टनल साबित होगी।
ईंधन की बचत के साथ सफर होगा आसान
थाणे-बोरिवली प्रोजेक्ट के सफलतापूर्वक पूरा हो जाने के बाद दोनों क्षेत्रों के बीच का आवागमन महज़ 15 मिनट में पूरा हो जाना तय माना जा रहा है। जब यात्रा में लगने वाला समय भारी मात्रा में कम होगा, तो वाहनों में खर्च होने वाले ईंधन की भी अभूतपूर्व बचत होगी। जिस दूरी को पार करने में वर्तमान समय में पूरे 90 मिनट तक का समय बर्बाद हो जाता है, उसे यदि केवल 15 मिनट के भीतर पूरा किया जा सकेगा, तो यह वाहन चालकों के लिए किसी बड़े जैकपॉट मिलने से कम बिल्कुल नहीं होगा। इस नए यातायात कॉरिडोर के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद थाणे के नजदीक स्थित घोड़बंदर इलाके से सीधे वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे तक पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा। यह नया मार्ग महानगर में प्रदूषण के स्तर को नीचे लाने के साथ-साथ मूल्यवान ईंधन की बचत करने और तेज गति से आवाजाही सुनिश्चित करने में एक बहुत बड़ी और निर्णायक भूमिका निभाएगा।
अत्याधुनिक मशीनों से हो रही है चट्टानों की कटाई
टीबीएम-2 अर्जुन मशीन को इस परियोजना की दूसरी समानांतर टनल की खुदाई करने के खास काम के लिए लगाया गया है। अर्जुन मुख्य रूप से शहरी इलाकों के भीतर भूमिगत बोरिंग करने वाली एक अत्यंत शक्तिशाली मशीन है, जो बेहद कठोर चट्टानों को आसानी से चीरने में पूरी तरह कारगर साबित होती है। यह मशीन बड़े आकार में चट्टानों के बड़े टुकड़ों को काटकर सुरंग का रास्ता बनाती है। जैसा कि स्पष्ट है, पहली टनल की खुदाई का जिम्मा नायक नामक टीबीएम मशीन के पास है और अब इन दोनों सुरंगों को एक साथ समानांतर रूप से बनाने पर तेजी से काम किया जा रहा है।
जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को बिना नुकसान पहुंचाए इंजीनियरिंग का चमत्कार
थाणे से बोरिवली तक बनाई जा रही इस टनल को समृद्ध हेरिटेज वैल्यू वाले संजय गांधी नेशनल पार्क के ठीक नीचे से निकाला जा रहा है। यह पार्क भौगोलिक रूप से काफी पुराना है और यहां विभिन्न प्रकार के वन्यजीव जैसे बाघ, भालू और भेड़िये सहित तमाम जंगली जीव प्राकृतिक रूप से निवास करते हैं। इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि जमीन के ऊपर जंगल में जंगली जानवर स्वतंत्र रूप से घूमेंगे और उसके कई फीट नीचे यात्रियों की कारें सरपट दौड़ती नजर आएंगी। इस टनल को तकनीकी रूप से इस प्रकार से अनूठे ढंग से डिजाइन किया गया है कि नीचे तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही होने के बावजूद ऊपर विचरण करने वाले जंगली जीवों पर किसी भी तरह का कोई बुरा असर या व्यवधान नहीं पड़ेगा।
जमीन से 320 मीटर गहराई में चल रहा है निर्माण
इस अद्भुत सुरंग को संजय गांधी नेशनल पार्क की सतह से लगभग 320 मीटर की भारी गहराई के नीचे बनाया जा रहा है। इतनी अधिक गहराई में पूर्व से पश्चिम दिशा तक लगातार खुदाई का काम करना अपने आप में कोई आसान कार्य नहीं है। शुरुआत में इस परियोजना की प्रगति का काम काफी सुस्त गति से चल रहा था, क्योंकि तब केवल एक ही मशीन के जरिए काम किया जा रहा था। हालांकि, जब से टीबीएम-2 अर्जुन ने भी इस सुरंग की खुदाई में मोर्चा संभाल लिया है, तब से इस मेगा प्रोजेक्ट के तय समय से पहले या जल्द ही खत्म होने की संभावना में भारी इजाफा हो गया है।


















