इंटीमेट फोटो और वीडियो के दुरुपयोग तथा डिजिटल उत्पीड़न का शिकार हुई पूर्व 'लव आइलैंड' स्टार जॉर्जिया हैरिसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक नया और कड़ा कानून बनाने की जोरदार पैरवी की है। 6 साल पहले एक हाई-प्रोफाइल रिवेंज पोर्न मामले का शिकार होने के बाद अब वे 'जॉर्जिया कानून' नामक एक नए कानूनी प्रावधान की मांग कर रही हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया नेटवर्क पर एक आपातकालीन 'किल स्विच' या 'पॉज बटन' लागू करना है, जिससे गैर-सहमति वाली इंटीमेट सामग्री की शिकायत मिलते ही उसे तुरंत रिव्यू अवधि के दौरान सार्वजनिक पहुंच से हटा दिया जाए। उनका मानना है कि वर्तमान में लागू 48 घंटे की समयसीमा पीड़ितों को गंभीर मानसिक और सामाजिक क्षति से बचाने में पूरी तरह अपर्याप्त है।
एक चर्चित रिवेंज पोर्न मामले से जुड़ी पृष्ठभूमि
लगभग 6 साल पहले जॉर्जिया हैरिसन को उनके तत्कालीन साथी स्टीफन बियर ने उनके साथ शारीरिक संबंधों का गुप्त रूप से वीडियो बना लिया था। इसके बाद स्टीफन बियर ने इस निजी वीडियो को बिना किसी सहमति के अपने 'ऑन्लीफैंस' अकाउंट पर अपलोड कर दिया। कुछ ही दिनों के भीतर यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया और गूगल सर्च इंजन पर 'जॉर्जिया हैरिसन सेक्स टेप' टॉप ट्रेंड्स में शामिल हो गया, जिससे उनकी निजी और व्यावसायिक जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हुई।
कानूनी कार्रवाई के बाद स्टीफन बियर को वोयरिज्म (गुप्त रिकॉर्डिंग) और रिवेंज पोर्न के दो मामलों में दोषी ठहराया गया। उन्हें अदालत द्वारा जेल की सजा सुनाई गई और उन्होंने 10.5 महीने जेल में बिताए, जिसके बाद जनवरी 2023 में उन्हें रिहा किया गया। हालांकि, अपराधी को सजा मिलने और रिहा होने के बावजूद वह आपत्तिजनक सामग्री आज भी इंटरनेट पर कई स्थानों पर उपलब्ध है। इस कड़वे अनुभव ने जॉर्जिया को डीपफेक और इमेज-बेस्ड सेक्शुअल एब्यूज के खिलाफ आवाज उठाने वाली एक प्रमुख एक्टिविस्ट बना दिया।
'जिमीज जॉब्स ऑफ द फ्यूचर' पॉडकास्ट पर रखा नया प्रस्ताव
जॉर्जिया हैरिसन ने हाल ही में 'जिमीज जॉब्स ऑफ द फ्यूचर' पॉडकास्ट पर हिस्सा लिया, जहां उन्होंने अपने इस नए कानून के प्रारूप पर विस्तार से चर्चा की। इस लोकप्रिय पॉडकास्ट में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टारमर जैसी प्रमुख हस्तियां भी शिरकत कर चुकी हैं। पॉडकास्ट के दौरान जॉर्जिया ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया का निर्माण कभी भी उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देकर नहीं किया गया था। जब भी कोई आपत्तिजनक या हानिकारक कंटेंट इंटरनेट पर अपलोड होता है, तो उसे रोकना या हटाना पीड़ित व्यक्ति के लिए बेहद मुश्किल और तनावपूर्ण होता है।
उन्होंने कहा कि नया कानून कोई सेंसरशिप लागू करने के लिए नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों और पीड़ितों को उनकी डिजिटल प्राइवेसी पर नियंत्रण वापस दिलाने का एक प्रयास है। वे चाहती हैं कि जैसे ही कोई यूजर किसी गैर-सहमति वाली इंटीमेट फोटो या वीडियो की रिपोर्ट करे, तो सिस्टम खुद ब खुद उस कंटेंट को तुरंत 'पॉज' कर दे।
मौजूदा 48 घंटे के नियम की सीमाएं और टेक कंपनियों पर जुर्माना
ब्रिटेन में 29 अप्रैल 2026 को 'क्राइम एंड पुलिसिंग एक्ट 2026' पारित किया गया था। इस कानून के तहत सभी टेक प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि गैर-सहमति वाली इंटीमेट तस्वीरों की रिपोर्ट मिलने के 48 घंटे के भीतर उन्हें हटा दिया जाए। यदि कोई कंपनी इस नियम का उल्लंघन करती है, तो उस पर उसके वैश्विक राजस्व का 10 प्रतिशत तक भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, मेटा जैसी बड़ी कंपनी ने 2025 में 149 मिलियन पाउंड का राजस्व दर्ज किया था, ऐसे में 10 फीसदी का जुर्माना बेहद बड़ा वित्तीय झटका हो सकता है। इसके अलावा, नियम का पालन न करने वाली कंपनियों को यूके में अपनी सेवाएं देने से पूरी तरह बैन भी किया जा सकता है।
इसके बावजूद, जॉर्जिया का तर्क है कि 48 घंटे का समय डिजिटल युग में बहुत लंबा होता है। इंटरनेट पर 2 दिन के भीतर कोई भी वीडियो या फोटो लाखों लोगों तक पहुंच सकती है, डाउनलोड हो सकती है और कई अन्य प्लेटफॉर्म्स पर शेयर की जा सकती है। जॉर्जिया ने बताया कि आज भी हर रात 3 बजे उनके इनबॉक्स में कई ऐसे पीड़ितों के मैसेज आते हैं जो रो-रोकर मदद मांगते हैं क्योंकि उनकी तस्वीरें किसी प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर दी गई हैं और शिकायत करने के बावजूद टेक कंपनियों की तरफ से कोई तुरंत कार्रवाई नहीं की जा रही है। आमतौर पर कंपनियों की ओर से केवल एक स्वचालित ईमेल मिलता है कि 'हम इस पर काम कर रहे हैं', जबकि वह सामग्री लगातार देखी जा रही होती है।
सबूत देने की जिम्मेदारी पीड़ित से हटाकर आरोपी पर डालने की मांग
जॉर्जिया हैरिसन के 'किल स्विच' मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जांच की पूरी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित के ऊपर से मानसिक दबाव को कम करता है। वर्तमान व्यवस्था में पीड़ित को लंबे फॉर्म भरकर यह साबित करना पड़ता है कि उसने उस कंटेंट के लिए सहमति नहीं दी थी, और जब तक यह जांच चलती है, तब तक सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध रहती है।
जॉर्जिया की मांग है कि रिपोर्ट दर्ज होते ही सामग्री तुरंत ब्लॉक या पॉज हो जानी चाहिए। इसके बाद, जिस व्यक्ति ने वह वीडियो या फोटो पोस्ट किया है (यानी आरोपी), उसे यह साबित करने के लिए फॉर्म भरना पड़े कि उसके पास इसे पोस्ट करने की कानूनी सहमति थी। यदि वह सहमति साबित कर देता है, तभी कंटेंट को दोबारा लाइव किया जाए। उनका कहना है कि अपनी बेगुनाही और असहमति साबित करने का बोझ पीड़ित पर नहीं डाला जाना चाहिए।
डीपफेक और फर्जी तस्वीरों का शिकार हुई 'जोडी' की आपबीती
इंटीमेट इमेज एब्यूज का यह मामला केवल असली वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के आने से यह संकट और गहरा गया है। इस समस्या को उजागर करने के लिए 'जोडी' (परिवर्तित नाम) का उदाहरण सामने आता है। 2020 में जोडी को उनके एक दोस्त ने बताया कि एक्स पर एक अकाउंट उनकी असली तस्वीरों, नाम, स्थान और निजी जानकारी का इस्तेमाल करके सेक्स वर्क का विज्ञापन कर रहा है।
जब जोडी ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की, तो पुलिस ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि 'ऐसी घटनाएं होती रहती हैं' और वे इसमें कोई मदद नहीं कर सकते। इसके कुछ ही महीनों बाद, जोडी को एक गुमनाम ईमेल मिला जिसमें एक ऑनलाइन चैट फोरम का लिंक था। वहां जोडी के प्राइवेट इंस्टाग्राम अकाउंट से ली गई साधारण तस्वीरों को एआई तकनीक से मॉर्फ करके अत्यधिक आपत्तिजनक और अश्लील डीपफेक तस्वीरों में बदल दिया गया था।
जोडी ने इस घटना को अपनी जिंदगी का सबसे भयानक दिन बताया, क्योंकि उन्हें यह डर सता रहा था कि उनके परिवार, सहकर्मियों और पार्टनर पर इसका क्या असर पड़ेगा। हालांकि बाद में आरोपी को पकड़ लिया गया, लेकिन अदालत ने उसे केवल 6 महीने की निलंबित जेल की सजा सुनाई, 100 पाउंड का मुआवजा देने का आदेश दिया, कम्युनिटी सर्विस और सेक्शुअल रिहैबिलिटेशन थेरेपी की सजा दी। उस अपराधी का नाम सेक्स ऑफेंडर्स रजिस्टर में भी दर्ज नहीं किया गया।
सर्वोत्तम तकनीकी व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता
जोडी ने 'एंड वायलेंस अगेंस्ट वूमेन कोएलिशन', 'रिवेंज पोर्न हेल्पलाइन', 'नॉटयोरपोर्न' संगठन और प्रोफेसर क्लेयर मैकग्लिन के साथ मिलकर एक अभियान चलाया। इस अभियान को 73,000 लोगों के हस्ताक्षरों का समर्थन मिला, जिसने 48 घंटे वाले कानून को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, जोडी का भी यही मानना है कि 48 घंटे का समय भी पीड़ितों के लिए बहुत अधिक है।
जोडी के अनुसार, टेक कंपनियों के पास ऐसी उन्नत तकनीक मौजूद है कि वे कुछ ही सेकंडों में किसी भी फोटो या वीडियो को पूरे प्लेटफॉर्म से हटा सकती हैं। पीड़ितों के लिए टेक कंपनी पर लगा जुर्माना उतना मायने नहीं रखता जितना कि उनकी निजी तस्वीरों का तुरंत इंटरनेट से हटना। यदि तस्वीरों को तुरंत नहीं रोका गया, तो वे हमेशा के लिए इंटरनेट के अलग-अलग कोनों में फैल जाती हैं। यही कारण है कि जॉर्जिया हैरिसन और अन्य एक्टिविस्ट अब सरकार से 'किल स्विच' जैसे कड़े नियम को कानून का रूप देने की मांग कर रहे हैं।



















