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15 जून सोमवती अमावस्या: दशकों बाद अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संगम, जानिए स्नान-दान और बच्चों के स्वभाव से जुड़ा खास उपायअध्यात्म
14 जून 2026, 7:27 am (46 दिन पहले)· 0

15 जून सोमवती अमावस्या: दशकों बाद अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संगम, जानिए स्नान-दान और बच्चों के स्वभाव से जुड़ा खास उपाय

इस 15 जून को सोमवार के साथ बन रही अमावस्या पर अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग रहेगा, जिसमें स्नान, दान और पितृ तर्पण का कई गुना फल बताया गया है।

हिंदू पंचांग में अमावस्या को बेहद खास तिथि का दर्जा हासिल है। साल में कुल 12 अमावस्या पड़ती हैं, मगर जब यह सोमवार के दिन आती है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है और इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस बार 15 जून को पड़ रही सोमवती अमावस्या को विशेष रूप से दुर्लभ और पुण्यदायी माना जा रहा है, क्योंकि वर्षों के अंतराल के बाद ऐसा अवसर बन रहा है जब सोमवार, अमावस्या और अमृत सिद्धि योग एक साथ मिल रहे हैं।

क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या

उज्जैन के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के मुताबिक यह अमावस्या ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की है और पुरुषोत्तम मास की पूर्णता के साथ आ रही है। इस दिन आकाश में मृगशिरा नक्षत्र रहेगा, शूल के बाद गण्ड योग बनेगा और चंद्रमा वृषभ से मिथुन राशि की ओर संचरण करेगा। शास्त्रों में माना गया है कि ऐसे संयोग पर जप, तप, स्नान, दान और पितृ तर्पण करने वाले को सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना पुण्य का फल मिलता है।

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अमृत सिद्धि योग का असर

पौराणिक मान्यताओं की मानें तो इस बार अमावस्या पर बन रहा अमृत सिद्धि योग अत्यंत शुभ है। इस पावन घड़ी में देव, ऋषि और पितरों के निमित्त किया गया तर्पण, तीर्थ श्राद्ध और पितृ श्राद्ध कई गुना पुण्य देने वाला बताया गया है। साधकों के लिहाज से मध्यरात्रि की साधना का भी विशेष महत्व है, क्योंकि इसे असाधारण ऊर्जा और आध्यात्मिक सिद्धि देने वाला माना गया है। दशकों बाद बने इस योग में किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का फल अमृत के समान कहा गया है।

दोपहर में मिथुन राशि में जाएंगे सूर्य

पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या इसलिए भी विशेष है क्योंकि उदयकाल से ही इसका स्पर्श हो रहा है और दर्श अमावस्या का योग बनने से इसका प्रभाव पूरे दिन बना रहेगा। यही वजह है कि साधना, उपासना और आराधना के लिए यह पूरा दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इसी दिन दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जो इस तिथि को और भी विशेष बना देता है।

पुरुषोत्तम मास छूट गया तो निराश न हों

अगर किसी कारणवश आप पुरुषोत्तम मास के दौरान दान-पुण्य, जप-तप या धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर पाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। अमावस्या के दिन पूरे संकल्प के साथ अपने इष्टदेव का स्मरण और पितरों का तर्पण भर कर लेने से ही उनकी कृपा मिल जाती है। ध्यान रहे कि अमावस्या समाप्त होते ही अधिकमास पूरा हो जाएगा और इसके तुरंत बाद ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की शुरुआत हो जाएगी।

स्नान, दान और बच्चों के स्वभाव से जुड़ा उपाय

सोमवती अमावस्या पर सोम तीर्थ में स्नान करने का अलग ही महत्व बताया गया है और इससे विशेष पुण्य फल मिलता है। इस दिन भगवान सोमेश्वर का अभिषेक एवं पूजन करना तथा श्रद्धा के अनुसार सफेद वस्तुओं का दान करना बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि चावल, शक्कर, साबूदाना और दूध का दान करने से चंद्रमा की कृपा प्राप्त होती है। इसका असर घर-परिवार में सुख-शांति बढ़ने के रूप में दिखता है और बच्चों के जिद्दी तथा हठी स्वभाव में भी सकारात्मक बदलाव आने की बात कही गई है।

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