आगामी श्रावणी मेला 2026 को लेकर बाबा की नगरी देवघर में बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं, जिससे शिवभक्तों की कठिन यात्रा को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके। इस बार श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद खास और ऐतिहासिक बदलाव किया जा रहा है। बाबा बैद्यनाथ धाम से बाबा बासुकीनाथ धाम के बीच पहली बार एक पूर्ण समर्पित पैदल कांवड़ पथ का निर्माण किया जा रहा है। यह नया कॉरिडोर लगभग 36 किलोमीटर लंबा है, जिसे विशेष रूप से उन कांवड़ियों के लिए तैयार किया जा रहा है जो अपनी मनोकामना लेकर दोनों देवस्थलों के बीच पैदल यात्रा तय करते हैं। अब तक श्रद्धालुओं को देवघर से बासुकीनाथ की दूरी सामान्य सड़क मार्ग से ही तय करनी पड़ती थी, जिससे उन्हें भारी वाहनों के बीच चलने में काफी असुविधा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ता था।
श्रावणी यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय
विश्व स्तर पर प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 का भव्य उद्घाटन 30 जुलाई से होने जा रहा है। मेले के शुरू होते ही देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में शिवभक्त बाबा की नगरी पहुंचने लगेंगे। भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाने वाली यह यात्रा अत्यंत कठिन मानी जाती है। श्रद्धालु सबसे पहले बिहार के सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम पहुंचकर उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरते हैं। इसके बाद वे करीब 105 किलोमीटर की लंबी और कठिन पैदल यात्रा करके देवघर पहुंचते हैं और वहां बाबा बैद्यनाथ के पवित्र ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवघर में जल चढ़ाने के बाद बाबा बासुकीनाथ के दर्शन करने पर ही यह यात्रा पूर्ण मानी जाती है। इसी कारण से इस वर्ष श्रद्धालुओं की इस अंतिम चरण की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए प्रशासन ने बेहद आधुनिक प्रबंध किए हैं।
कैसा होगा यह नया 36 किलोमीटर लंबा कांवड़िया पथ?
अब तक सुल्तानगंज से देवघर तक पैदल चलने वाले या दंड प्रणाम करते हुए आगे बढ़ने वाले श्रद्धालुओं के लिए तो कांवड़िया पथ की व्यवस्था मौजूद थी, लेकिन देवघर से आगे बासुकीनाथ के मार्ग पर ऐसी कोई पृथक व्यवस्था नहीं थी। इस कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण विशेष कांवड़ पथ के निर्माण कार्य को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। यह कॉरिडोर लगभग 36 किलोमीटर लंबा और 3.5 मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है। मार्ग के अधिकांश हिस्सों को तैयार कर लिया गया है, और पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए इस पर रंगीन पेवर ब्लॉक बिछाए जा रहे हैं। ये पेवर ब्लॉक कांवड़ियों के नंगे पैरों को कंकड़-पत्थरों से बचाएंगे और चलने की थकान को कम करेंगे। इसके अतिरिक्त, इस कॉरिडोर के किनारे श्रद्धालुओं के आराम करने के लिए स्थायी विश्राम गृहों का भी निर्माण किया जा रहा है, ताकि वे यात्रा के बीच में आराम से विश्राम कर सकें और अपनी आगे की यात्रा बिना किसी कठिनाई के पूरी कर सकें।
वाहनों की भीड़ से दूर, सुरक्षित और सुगम यात्रा
इस नए कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं और सामान्य वाहनों का मार्ग पूरी तरह से अलग हो जाएगा। श्रावणी मेले के दौरान अक्सर सड़कों पर अत्यधिक भीड़ के कारण जाम की स्थिति बन जाती थी और पैदल चलने वाले शिवभक्तों को वाहनों के बीच से ही गुजरना पड़ता था। इस नई व्यवस्था के बाद कांवड़ियों को दुर्घटनाओं और भीड़भाड़ के खतरों से पूरी तरह से सुरक्षा मिलेगी। खासकर रात के समय जब लाखों की संख्या में श्रद्धालु बोल बम का जयघोष करते हुए आगे बढ़ते हैं, तब उन्हें किसी भी प्रकार के अनियंत्रित वाहन का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे उनकी धार्मिक यात्रा बिना किसी डर और बाधा के अत्यंत शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सकेगी।
पूरे क्षेत्र के सड़क नेटवर्क को किया जा रहा मजबूत
प्रशासन इस परियोजना के तहत केवल पैदल पथ ही नहीं बना रहा है, बल्कि आसपास के पूरे सड़क नेटवर्क को भी नया रूप दे रहा है। सुचारू यातायात के लिए देवघर बाईपास, बासुकीनाथ, सहारा, तालझारी और घोरमारा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए बाईपास विकसित किए जा रहे हैं। इन बाईपास मार्गों के बनने से स्थानीय निवासियों, आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, प्रशासनिक वाहनों और सामान्य यात्रियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। एक तरफ जहां पैदल चलने वाले शिवभक्त सुरक्षित तरीके से अपने समर्पित मार्ग पर आगे बढ़ेंगे, वहीं दूसरी तरफ आपातकालीन गाड़ियां और सामान्य वाहन भी बिना किसी रुकावट के बाईपास से अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे।
आस्था और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा संगम
श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था, समर्पण और विश्वास का महापर्व है। इस कठिन यात्रा में श्रद्धालुओं का जज्बा देखते ही बनता है। इस बार का श्रावणी मेला न केवल रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के लिए याद किया जाएगा, बल्कि उनके लिए की गई अत्याधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा। इस शानदार कॉरिडोर के निर्माण से अब श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और उनका पूरा ध्यान भगवान शिव की भक्ति में ही केंद्रित रहेगा।



















