राजस्थान के पुष्कर में गुप्त नवरात्रि के मौके पर एक विदेशी मूल की योगिनी नौ दिन और नौ रात तक बिना बैठे खड़े रहकर कठोर तपस्या कर रही हैं. यह अनुष्ठान 15 जुलाई से शुरू हुआ है और 24 जुलाई तक चलेगा, जिसे देखने के लिए हर दिन बड़ी तादाद में श्रद्धालु और साधक तीर्थनगरी पहुंच रहे हैं.
कौन हैं योगिनी अन्नपूर्णा नाथ और क्या है खंडेश्वरी तप
यह विशेष साधना विदेशी योगिनी अन्नपूर्णा नाथ कर रही हैं, जिन्होंने गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर खंडेश्वरी तपस्या का संकल्प लिया है. नौ दिन की इस अवधि में वे न तो आराम के लिए बैठेंगी और न ही लेटेंगी, बल्कि लगातार खड़े रहकर जप, ध्यान और आराधना में लीन रहेंगी. यह पूरा अनुष्ठान योगी गुरु दीपक नाथ के सानिध्य में संपन्न हो रहा है. योगी गुरु दीपक नाथ के मुताबिक, इस दौरान योगिनी को बेहद कठोर आध्यात्मिक अनुशासन का पालन करना होता है, और नाथ संप्रदाय में इसे सबसे कठिन और उच्च कोटि की तपस्याओं में गिना जाता है.
गुप्त नवरात्रि में क्यों बढ़ जाता है साधना का महत्व
योगी गुरु दीपक नाथ बताते हैं कि गुप्त नवरात्रि के दिनों में शक्ति साधना का महत्व सामान्य दिनों से कई गुना ज्यादा हो जाता है, इसलिए इसी अवधि में की गई तपस्या का आध्यात्मिक असर भी उतना ही गहरा माना जाता है. खंडेश्वरी तप को नाथ संप्रदाय की प्राचीन परंपरा का अहम हिस्सा बताया जाता है, जिसमें साधक बेहद सख्त नियमों का पालन करते हुए लगातार खड़े होकर ही ईश्वर का ध्यान करता है. गुरु दीपक नाथ के अनुसार, इस तपस्या के पीछे मकसद सिर्फ व्यक्तिगत सिद्धि हासिल करना नहीं, बल्कि लोक कल्याण, विश्व शांति और समूची मानवता की भलाई की कामना करना है.
इससे पहले भी कर चुकी हैं अग्नि के बीच 21 दिन का तप
योगिनी अन्नपूर्णा के लिए यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने पुष्कर की धरती पर इतनी कठिन साधना की हो. इससे पहले ज्येष्ठ महीने की तेज गर्मी में उन्होंने नौ जलती हुई धूणियों के बीच लगातार 21 दिनों तक अग्नि तपस्या पूरी की थी. उनकी इन साधनाओं की वजह से पुष्कर एक बार फिर कठोर तप, योग और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का केंद्र बन गया है, और स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी रोज उनके दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.




















