गौर गोपाल दास के अनमोल विचार: ये बातें बदल देंगी जिंदगी को देखने का आपका नजरियाअध्यात्म
19 घंटे पहले· 0

गौर गोपाल दास के अनमोल विचार: ये बातें बदल देंगी जिंदगी को देखने का आपका नजरिया

प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और प्रेरक वक्ता गौर गोपाल दास के कुछ चुनिंदा प्रेरणादायक विचार, जो जीवन को सहज और सकारात्मक ढंग से जीने की सीख देते हैं।

कौन हैं गौर गोपाल दास

गौर गोपाल दास भारत के जाने-माने आध्यात्मिक गुरु और प्रेरक वक्ता के रूप में पहचाने जाते हैं। उनका नाता इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस से है। अपने शांत और मृदु स्वभाव, तुरंत जवाब देने की कला और जीवन के गहरे सत्यों को बेहद आसान तथा हास्य भरे अंदाज में समझाने की शैली के चलते वे खासकर युवाओं में बहुत लोकप्रिय हैं। उनकी कही बातें लोगों को भीतर तक प्रेरित करती हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वे अपने विचार लाखों लोगों तक पहुंचाते रहते हैं। आध्यात्मिक मार्ग चुनने से पहले उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा ली थी। उन्होंने पुणे के नामी संस्थान 'कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे' से अपनी डिग्री पूरी की। पढ़ाई के बाद कुछ समय तक उन्होंने हेवलेट पैकार्ड कंपनी में एक इंजीनियर के तौर पर नौकरी भी की। साल 1996 में उन्होंने कॉरपोरेट दुनिया की यह नौकरी छोड़ दी और भिक्षु (Monk) बनने का निर्णय लिया। इसके बाद वे मुंबई के चौपाटी स्थित इस्कॉन मंदिर से जुड़ गए। आज उन्हें चाहने वालों की एक बड़ी संख्या है और उनके विचार किसी के भी जीवन को देखने का नजरिया बदलने का दम रखते हैं। यही वजह है कि यहां हम आपके लिए गौर गोपाल दास के कुछ अनमोल और प्रेरक विचार लेकर आए हैं। पढ़िए उनके ये मोटिवेशनल कोट्स।

गौर गोपाल दास के प्रेरक विचार

  1. हम सबकी उंगलियों की छाप (फिंगरप्रिंट) एक-दूसरे से बिल्कुल अलग और अनोखी होती है। जब किसी एक इंसान की फिंगरप्रिंट दूसरे से मेल नहीं खाती, तो आप भी अपनी पहचान को अनूठा क्यों न बनाएं।
  2. जीवन को एक प्रवाह की तरह जीना सीखिए। जब कुछ बुरा घट रहा हो, तो उस पर हद से ज्यादा ध्यान मत दीजिए, और जब कुछ अच्छा हो रहा हो, तो उसे भी थामकर रखने या जरूरत से ज्यादा भोगने की कोशिश मत कीजिए।
  3. हमें कभी भी किसी व्यक्ति को इस तरह महसूस नहीं कराना चाहिए कि वह अपनी गलतियों को भुला तक न पाए।
  4. कौन सही है और कौन गलत, यह देखने के बजाय यह देखना बेहतर है कि क्या सही है और क्या गलत है। अक्सर हम 'कौन' के पचड़े में पड़कर 'क्या' को भूल बैठते हैं।
  5. असफलताएं आपकी पहचान तय नहीं करतीं, बल्कि वे आपको फिर से सिखाती हैं। अगर आप कभी असफल ही नहीं होंगे, तो आखिर सीखेंगे कैसे।
  6. हर चीज में अच्छाई ढूंढने का जो दबाव होता है, वह जरूरी नहीं है। अगर कोई चीज बुरी है, तो वह बुरी ही है। अपनी मानसिक सेहत को दुरुस्त रखना है तो यह दबाव लेना छोड़ दीजिए।
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