ईश्वर की भक्ति और उपासना में सबसे प्रमुख तत्व निष्ठा और आंतरिक विश्वास होता है। पूजा की सामग्री चाहे सीमित हो, यदि मन में समर्पण गहरा हो तो प्रार्थना का फल अवश्य प्राप्त होता है। आराधना के समय प्रायः ऐसे आध्यात्मिक अनुभव और प्रत्यक्ष घटनाएं सामने आती हैं, जो यह दर्शाती हैं कि की गई प्रार्थना ईश्वर तक पहुंच चुकी है। सामान्य तौर पर लोग इन सूक्ष्म संकेतों को सामान्य घटना मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये संकेत मनोकामना पूर्ण होने के स्पष्ट लक्षण होते हैं।
त्योहारों पर विधि-विधान से उपासना का महत्व
पर्व-त्योहारों के अवसर पर, विशेषकर नवरात्रि जैसे पावन समय में, देवी-देवताओं की उपासना का विशेष फल बताया गया है। देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल का कहना है कि आगामी त्योहारों और मौजूदा पर्वों के दौरान विधिवत तथा सच्चे भाव से की गई पूजा हर मनोकामना को सिद्ध करती है। उनका मानना है कि अनुष्ठान की शुद्धता और भक्ति की एकाग्रता ही ईश्वर की कृपा को आकर्षित करती है, इसलिए पूजा के दौरान घटित होने वाले शुभ लक्षणों को समझना अत्यंत आवश्यक है।
मानसिक शांति और निर्विघ्न अनुष्ठान
पूजा संपन्न होने के उपरांत मन में गहरा संतोष, मानसिक शांति और उल्लास का संचार होना सबसे पहला सकारात्मक संकेत माना जाता है। यदि पूजा-अर्चना के दौरान किसी प्रकार का विघ्न या बाधा उत्पन्न न हो और साधना सुगमता से पूरी हो जाए, तो यह पूजा के सफल होने का परिचायक है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी पुरानी इच्छा का अचानक समाधान निकल आए या वह बिना किसी प्रयास के पूरी हो जाए, तो यह माना जाता है कि साधक पर दैवीय अनुग्रह बरस रहा है और उसकी भक्ति को स्वीकार्यता मिल चुकी है।
प्रतिमा से फूल या माला का गिरना
आराधना करते समय यदि देवी-देवता की प्रतिमा अथवा मूर्ति से कोई अर्पित पुष्प या फूलों की माला अचानक गिरकर भक्त के पास आ जाए, तो यह शास्त्रों में अत्यंत दुर्लभ और शुभ घटना मानी जाती है। यह घटना सीधे तौर पर इस बात का प्रमाण मानी जाती है कि ईश्वर ने भक्त की पुकार सुन ली है और उसकी अभिलाषा अब अतिशीघ्र फलीभूत होने वाली है।
दीपक की ऊपर उठती सीधी लौ
आरती या जप के समय प्रज्वलित दीपक की लौ का बिना हिले-डुले एकदम सीधी रेखा में ऊपर की दिशा में उठना भी विशेष महत्व रखता है। यह स्थिति इंगित करती है कि देवी-देवता साधक की निष्ठा से संतुष्ट हैं।
आंखों से बहते भावुकता के आंसू
जब भक्त पूजा में लीन हो और अंतःकरण से ईश्वर का ध्यान करते हुए उसकी आंखों से अनायास ही अश्रु प्रवाहित होने लगें, तो यह अत्यधिक शुभ फल देने वाला संकेत माना जाता है। भक्ति भावना के इस चरम पर पहुंचने का अर्थ है कि मन के सारे संशय समाप्त हो चुके हैं और ईश्वर से सीधा तार जुड़ गया है, जिसके फलस्वरूप मांगी गई हर मुराद शीघ्र सिद्ध होती है।



















