सनातन धर्म में आश्विन मास को धार्मिक अनुष्ठानों और महत्वपूर्ण व्रत त्योहारों के लिए विशेष फलदायी माना गया है। इस महीने में पितृपक्ष, विश्वकर्मा पूजा और शारदीय नवरात्रि जैसे महापर्व मनाए जाते हैं। इसी पावन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर भगवान लक्ष्मी नारायण की विधिवत आराधना करने से अनजाने में हुए बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही जातक के परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का निरंतर विस्तार होता है।
पापांकुशा एकादशी 2025 की तिथि और पारण का शुभ समय
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 03 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 32 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के कारण पापांकुशा एकादशी का पावन व्रत 03 अक्टूबर को रखा जाएगा। जो श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखेंगे, वे अगले दिन यानी 04 अक्टूबर को व्रत का पारण करेंगे। 04 अक्टूबर को पारण का अत्यंत शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 16 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को इसी समयावधि के भीतर सात्विक विधि से व्रत खोलना चाहिए।
पूजा अर्चना और दान का विशेष महत्व
देवघर स्थित पागल बाबा आश्रम के मुदगल ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल बताते हैं कि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी अत्यंत फलदायी मानी गई है। इस दिन साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए और भगवान विष्णु तथा देवी लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा के दौरान विधिवत धूप, दीप, गंध, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करने के साथ ही पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण करना अनिवार्य माना जाता है। इस दिन केवल सात्विक आहार का नियम पालना चाहिए या पूर्ण फलाहार पर रहना चाहिए। एकादशी के दिन किसी जरूरतमंद, निर्धन व्यक्ति या देवालय में जाकर अन्न, धन, वस्त्र और उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यकारी होता है। मान्यता है कि द्वादशी तिथि पर पारण से पूर्व दान पुण्य करने से धन लाभ के योग बनते हैं और व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित महिमा और मोक्ष का मार्ग
पद्म पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण जैसे प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में पापांकुशा एकादशी की महिमा का विस्तृत उल्लेख मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार इस पावन तिथि पर निष्काम भाव से व्रत का अनुष्ठान करने पर मनुष्य के सभी ज्ञात और अज्ञात पापों का शमन हो जाता है। भगवान विष्णु की विशेष कृपा से व्यक्ति भौतिक जीवन के सभी सुख भोगने के उपरांत मृत्यु के बाद मोक्ष को प्राप्त करता है। यह व्रत विशेष रूप से उन साधकों के लिए अत्यधिक कल्याणकारी सिद्ध होता है जो मानसिक शांति, आध्यात्मिक प्रगति और जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष की कामना रखते हैं।



















