बिहार की ऐतिहासिक और पावन नगरी गया में आयोजित पितृपक्ष मेले के दौरान सनातन परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। इस वर्ष आयोजित मेले में देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी भारी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के तर्पण के लिए पहुंचे हैं। इसी क्रम में गुरुवार, 18 सितंबर को रूस से आए 17 विदेशी तीर्थयात्रियों के एक विशेष दल ने गयाजी की धरती पर पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पिंडदान संपन्न किया।
विष्णुपद और अक्षय वट में संपन्न हुआ कर्मकांड
रूस से भारत पहुंचे इन 17 तीर्थयात्रियों के समूह में 14 महिलाएं शामिल थीं। पवित्र नगरी में अनुष्ठान के दौरान सभी श्रद्धालु पूरी तरह से भारतीय वेशभूषा में सजे-धजे नजर आए और सभी ने गले में रुद्राक्ष की माला धारण कर रखी थी। आचार्य माधव के मार्गदर्शन और नेतृत्व में इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान को विधि-विधान के साथ पूरा कराया गया। श्रद्धालुओं ने गयाजी के अति पवित्र विष्णुपद मंदिर परिसर तथा अक्षय वट वेदी पर बैठकर अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान के सभी जरूरी नियम पूरे किए। दल के साथ स्थानीय व्यवस्थाओं को संभालने के लिए गाइड भी मौजूद रहे।
कोविड काल से लगातार जारी है भारत यात्रा का सिलसिला
तीर्थयात्रियों के गाइड जितेंद्र तंवर ने इस दल के बारे में महत्वपूर्ण विवरण साझा करते हुए स्पष्ट किया कि ये सभी विदेशी नागरिक रूस के निवासी हैं। सनातन धर्म के प्रति इनकी गहरी आस्था और अटूट लगाव है, जिसके चलते यह समूह लंबे समय से भारत से निरंतर जुड़ा हुआ है। वर्ष 2020 के आसपास कोविड महामारी के दौर से ही ये लोग लगातार भारत भ्रमण पर आ रहे हैं और हर साल कम से कम दो बार भारत के विभिन्न पावन तीर्थों की यात्रा अनिवार्य रूप से करते हैं। अपनी इसी धार्मिक यात्रा के क्रम में वे इसी वर्ष फरवरी महीने में राजस्थान के प्रसिद्ध पुष्कर तीर्थ भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की थी। यह दल भारत आने पर सामान्य पर्यटन स्थलों के बजाय केवल धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व वाले तीर्थों का ही रुख करता है और विशेष रूप से सनातन परंपराओं का निष्ठापूर्वक पालन करता है।
शास्त्रों का अध्ययन और आगामी चार धाम यात्रा
गाइड जितेंद्र तंवर के अनुसार, सनातन धर्म के संदर्भ में इस विदेशी समूह की समझ बेहद व्यापक है। दल के सभी सदस्य भगवान शिव के अनन्य उपासक हैं और उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता तथा विष्णु पुराण जैसे प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन किया है। गयाजी में अनुष्ठान संपन्न करने से ठीक दो दिन पहले यह पूरा दल यहां पहुंचा था। पितरों के मोक्ष का विधान संपन्न होने के बाद अब यह समूह अपनी अगली आध्यात्मिक यात्रा पर निकलने की तैयारी में है। तय कार्यक्रम के अनुसार, गयाजी से प्रस्थान करने के ठीक 2 दिन बाद यह सभी श्रद्धालु उत्तराखंड स्थित चार धाम, यानी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की संयुक्त तीर्थ यात्रा प्रारंभ करेंगे।
उड़ीसा से जुड़ी हैं एक परिवार की जड़ें
इस पूरे दल की एक और खास बात यह सामने आई कि इनमें शामिल एक यात्री का पारिवारिक नाता सीधे भारत से जुड़ा हुआ है। यात्रा दल से जुड़े लोगों ने जानकारी दी कि परिवार के पूर्वज मूल रूप से भारत के उड़ीसा राज्य के रहने वाले थे, जो समय के साथ रूस जाकर बस गए थे। उसी परिवार की एक महिला वंशज अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करने के उद्देश्य से इस बार गयाजी पहुंची हैं। समूह के सभी सदस्य पहली बार गयाजी के दर्शन करने पहुंचे थे। इस अवसर पर तीर्थयात्रियों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गयाजी आकर उन्हें अत्यंत सुखद और शांतिपूर्ण अनुभव हुआ है, क्योंकि सनातन परंपरा में यह स्थान पितरों के पिंडदान और मोक्ष के लिए सबसे पावन और सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष के पूरे पितृपक्ष मेले के दौरान कुल मिलाकर 25 लाख से अधिक श्रद्धालु गयाजी पहुंच चुके हैं।



















