नवरात्रि के पावन पर्व पर आजमगढ़ जिले के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक और पौराणिक देवी मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है। समूचे जनपद में कई ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थल और आश्रम स्थापित हैं, जिनका उल्लेख सनातन परंपरा और धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। आम दिनों में भी इन पवित्र परिसरों में श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है, किंतु नवरात्रि के दौरान माता के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन और पूजन के लिए यहां विशेष आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिलता है।
एशिया में विरला दक्षिण मुखी दक्षिणेश्वरी माता मंदिर
आजमगढ़ शहर के चौक क्षेत्र में स्थित मां दुर्गा का पावन मंदिर अपनी एक अत्यंत दुर्लभ भौगोलिक और आध्यात्मिक संरचना के कारण विशिष्ट माना जाता है। इस धाम में देवी की प्रतिमा दक्षिण मुखी है। समूचे एशिया महाद्वीप में इस स्वरूप के मात्र दो ही प्रतिष्ठित मंदिर ज्ञात हैं, जिनमें से एक कोलकाता में स्थित है और दूसरा आजमगढ़ के चौक पर विराजमान है। यहां देवी को दक्षिणेश्वरी माता के रूप में पूजा जाता है। दक्षिण दिशा की ओर मुख होने की इस अद्वितीय बनावट के चलते श्रद्धालुओं के मन में इस धाम के प्रति अगाध श्रद्धा है, और नवरात्रि में यहां लंबी कतारें लग रही हैं।
निजामाबाद का शीतला माता धाम और आरोग्य की मान्यता
जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित निजामाबाद में माता शीतला का अत्यंत प्राचीन धाम सुशोभित है। यह स्थल 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जिस वजह से यह पूरे क्षेत्र के नागरिकों के लिए श्रद्धा का प्रधान केंद्र बना हुआ है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार मां शीतला को उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी काया प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
आरोग्य की अभिलाषा लेकर आने वाले श्रद्धालु इस पवित्र परिसर में देवी को पारंपरिक हलवा-पूरी का भोग अर्पित करते हैं। जनमानस में यह दृढ़ विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और माता के आशीर्वाद से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।
मेहनगर का पल्हनेश्वरी शक्तिपीठ और पौराणिक उल्लेख
जनपद के मेहनगर इलाके में स्थित पल्हनेश्वरी माता का मंदिर भी आस्था का एक और अत्यंत प्राचीन केंद्र है। निजामाबाद धाम की भांति इसे भी 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। नवरात्रि के पावन दिनों में मंदिर परिसर में एक बड़े मेले का आयोजन संपन्न होता है, जिसमें माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इस पवित्र धाम का गौरवशाली इतिहास प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में भी दर्ज है। पद्म पुराण के द्वितीय खंड के सातवें अध्याय में इस पावन स्थल का स्पष्ट विवरण मिलता है। इसके अतिरिक्त, रामचरितमानस के बालकांड में भी महर्षि विश्वामित्र द्वारा माता की अपार महिमा का गुणगान किया गया है, जो इस मंदिर की युगीन प्रामाणिकता और दिव्यता को सिद्ध करता है।



















