टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद विद्युत जामवाल ने उठाया फैंस की चुप्पी पर सवाल, दी बजरंग बाण सुनने की सीखगमले में उगी अजवाइन की पत्तियों से बनाएं क्रिस्पी पकौड़े, जालोर की गृहणी से सीखें आसान रेसिपीकर्जमुक्ति और मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर पीसी ज्वेलर के शेयरों ने छुआ नया 52-सप्ताह का उच्चतम स्तरडेनिस लिली और उनके बेटे एडम ने जब पाकिस्तान के खिलाफ मिलकर झटके थे छह विकेटअमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल से सोना 4,150 डॉलर के नीचे फिसला, फेडरल रिजर्व के रुख पर टिकी नजरेंहाइपरलिक्विड बना मल्टीकॉइन का सबसे बड़ा दांव, एयरड्रॉप नियमों पर एसईसी से स्पष्टता की मांगवैश्विक तनाव और मंदी की आहट से सहमा घरेलू बाजार, भारी बिकवाली में 500 शेयरों ने छुआ निचला स्तरमीन राशिफल 20 अक्टूबर: संपर्कों और सहयोग का दायरा बढ़ेगा, आर्थिक मामलों में बजट का रखें ध्यानओपनएआई के पूर्व इंजीनियर की जमानत याचिका खारिज, अदालत ने सऊदी अरब भागने के खतरे पर जताई चिंताएलिजाबेथ होम्स के पति बिली इवांस ने शुरू किया नया हेल्थ डायग्नोस्टिक स्टार्टअप, रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक पर आधारित मशीन बनाने का दावा
नवरात्रि समापन के बाद अखंड ज्योत की बाती, घी और पूजन सामग्री विसर्जन के नियमअध्यात्म
20 अक्तू॰ 2026, 6:36 am (1 घंटे पहले)· 0

नवरात्रि समापन के बाद अखंड ज्योत की बाती, घी और पूजन सामग्री विसर्जन के नियम

नवरात्रि पूर्ण होने पर अखंड ज्योत को कभी भी फूंक मारकर न बुझाएं। जानिए बची हुई बाती, घी, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री को विसर्जित करने के सही धार्मिक नियम।

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा के भक्त अपने घरों और देवालयों में पूरे नौ दिनों तक निरंतर अखंड ज्योत प्रज्वलित करते हैं। सनातन परंपराओं और धार्मिक विश्वास के अनुसार अखंड ज्योत को दिव्य शक्ति, अगाध आस्था तथा सकारात्मक ऊर्जा का जीवंत प्रतीक माना गया है। पूरे नौ दिनों तक लगातार दीपक प्रज्वलित रहने से मां भगवती की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है, कुंडली के विभिन्न ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और पूरे परिवार पर देवी दुर्गा का सुरक्षात्मक आशीर्वाद बना रहता है। जब नवमी तिथि की पूजा और पवित्र हवन संपन्न हो जाता है, तब श्रद्धालुओं के सामने सबसे मुख्य सवाल यह खड़ा होता है कि दीपक में शेष बची बाती, प्रयुक्त घी या तेल और अन्य पूजन सामग्री का सम्मानपूर्वक क्या प्रबंध किया जाए। इन सभी सामग्रियों के निपटारे को लेकर शास्त्रों में विशेष नियम और सावधानियां बताई गई हैं।

अखंड ज्योत की बची हुई बाती का सम्मानपूर्वक विसर्जन

नवरात्रि के समापन अवसर पर यदि अखंड दीपक में लौ निरंतर जल रही हो, तो उसे कभी भी फूंक मारकर या हाथ से बुझाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। धार्मिक नियमों के तहत ऐसा करना बहुत बड़ा दोष माना जाता है और इसे पवित्र ज्योत का अनादर समझा जाता है। दीपक की लौ को अपनी स्वाभाविक गति से स्वतः ही शांत होने देना चाहिए। आमतौर पर कन्या पूजन, नवमी तिथि अथवा दशमी तिथि के दिन अखंड ज्योत की सामग्री के विसर्जन की धार्मिक परंपरा विद्यमान है।

ये भी पढ़ें

जब ज्योत स्वतः शांत हो जाए, तब उसकी बची हुई बाती और संबंधित अवशेषों को विसर्जित करने के कुछ स्पष्ट विकल्प हैं। यदि आपके निवास के निकट कोई पावन नदी, सरोवर या जलस्रोत उपलब्ध है, तो इस सामग्री को बहते जल में प्रवाहित किया जा सकता है। नदी सुलभ न होने की स्थिति में इस बाती और पूजा अवशेषों को किसी पवित्र पीपल अथवा बरगद के वृक्ष की जड़ के पास श्रद्धापूर्वक रख देना चाहिए। यदि आसपास ऐसा कोई वृक्ष भी मौजूद न हो, तो किसी साफ-सुथरे और स्वच्छ स्थान की मिट्टी में गड्ढा खोदकर इसे दबाना सबसे उत्तम माना गया है ताकि किसी के पैरों के नीचे यह न आए।

दीपक में शेष बचे घी अथवा तेल का क्या करें

अखंड ज्योत के बुझने के बाद पात्र में शेष बचे घी अथवा तेल को लेकर भी भक्तों को उचित विधि का पालन करना चाहिए। यदि दिया गया घी या तेल पूरी तरह शुद्ध है और उसमें राख, कालिख अथवा अन्य किसी प्रकार की अशुद्धियां नहीं मिली हैं, तो कुल परंपरा के आधार पर उसका दोबारा सदुपयोग किया जा सकता है। ऐसे घी या तेल को भविष्य में होने वाली दैनिक पूजा के दीयों में जलाया जा सकता है अथवा आगामी किसी धार्मिक अनुष्ठान या हवन में आहुति के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

नवरात्रि संपन्न होते ही पूरे पूजा स्थल की विधिवत सफाई करनी चाहिए और मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र को श्रद्धापूर्वक पुनः व्यवस्थित रूप से स्थापित करना चाहिए। इस दौरान अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद आवश्यक है। जब तक पात्र में लौ या अग्नि सुलग रही हो, तब तक उस स्थान को बिल्कुल अकेला या बिना निगरानी के न छोड़ें।

पुष्प, अक्षत और अन्य पूजन सामग्रियों का सही निस्तारण

नौ दिनों के पूजन अनुष्ठान में देवी मां को अर्पित किए गए फूल, मालाएं, पत्तियां और अन्य सभी जैविक घटकों का भी शास्त्रसम्मत निस्तारण जरूरी है। इन सभी जैविक अवयवों को किसी साफ मिट्टी के नीचे दबाया जा सकता है अथवा घर में पौधों के लिए जैविक खाद तैयार करने में प्रयोग में लाया जा सकता है। पूजा में उपयोग किए गए अक्षत यानी साबुत चावल तथा अन्य इसी प्रकार की सामग्रियों को भी पवित्र जलस्रोत में विसर्जित किया जा सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखना भी आवश्यक है। पूजन के दौरान प्रयुक्त प्लास्टिक, पन्नी अथवा किसी भी गैर-जैविक वस्तु को भूलकर भी जलाना नहीं चाहिए और न ही जलस्रोतों में बहाना चाहिए, बल्कि उन्हें सामान्य कचरे की तरह अलग से संभालना चाहिए। इसके अतिरिक्त अखंड ज्योत के लिए यदि पीतल, तांबे या अन्य किसी धातु के दीपक का प्रयोग किया गया था, तो उसे अच्छी तरह मांझकर, धोकर और शुद्ध करके रख लेना चाहिए ताकि भविष्य के किसी भी शुभ अवसर पर उसका पुनः उपयोग किया जा सके।

सवाल-जवाब

क्या नवरात्रि समाप्त होते ही अखंड ज्योत को फूंक मारकर बुझाया जा सकता है?
बिल्कुल नहीं, अखंड ज्योत को कभी भी फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए। उसे अपनी गति से स्वतः ही शांत होने देना चाहिए।
अखंड ज्योत की सामग्री का विसर्जन किस तिथि को करना शास्त्रसम्मत है?
सामग्रियों का विसर्जन आमतौर पर कन्या पूजन के पश्चात नवमी तिथि अथवा दशमी तिथि के दिन किया जाता है।
यदि पास में कोई नदी न हो, तो बची हुई बाती का विसर्जन कहां करें?
नदी न होने पर बाती को पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे रखा जा सकता है, अथवा किसी स्वच्छ स्थान पर मिट्टी में दबाया जा सकता है।
दीपक में बचे हुए घी या तेल का क्या करना चाहिए?
यदि घी या तेल साफ है और उसमें राख नहीं है, तो उसे आगामी दैनिक पूजा के दीपक या हवन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
देवी मां को चढ़ाए गए सूखे फूलों और पत्तियों का निस्तारण कैसे करें?
चढ़ाए गए फूलों और पत्तियों को स्वच्छ मिट्टी में दबाया जा सकता है या घर में पौधों के लिए जैविक खाद बनाई जा सकती है।
क्या अखंड ज्योत के धातु के दीपक को दोबारा पूजा में इस्तेमाल कर सकते हैं?
हां, पीतल या अन्य धातु के दीपक को अच्छी तरह धोकर और साफ करके भविष्य के शुभ कार्यों में पुनः प्रयोग किया जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·44 मिनट पहले

अखंड ज्योत बुझाने के बाद बची हुई सामग्री को इधर-उधर फेंकने से हमेशा डर लगता था कि कहीं पैर न पड़ जाए। अगर आसपास कोई पवित्र पेड़ या नदी न हो, तो क्या इसे गमले की मिट्टी में दबा सकते हैं?

Kavya Nair@kavya-nair·44 मिनट पहले

संदीप, गमले की मिट्टी में दबाना बिल्कुल सही है, बस ध्यान रहे कि वहां किसी के पैर न पड़ें।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp