भाद्रपद मास में पड़ने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप का पूजन करने के साथ ही तुलसी आराधना का भी खास विधान माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी का पौधा भगवान श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए कान्हा के जन्मोत्सव पर तुलसी सेवा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, इस दौरान पूजा से जुड़ी कुछ जरूरी सावधानियां रखना भी अनिवार्य है, ताकि किसी अनजाने दोष से बचा जा सके।
प्रसाद में तुलसी दल का महत्व और पत्तियां तोड़ने का नियम
पूर्णिया के आचार्य बंशीधर झा के अनुसार, लड्डू गोपाल को अर्पित किए जाने वाले भोग में तुलसी पत्र का होना बेहद आवश्यक है। भगवान श्री कृष्ण बिना तुलसी दल के कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते हैं। इसके साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाने चाहिए। धार्मिक दृष्टि से जन्माष्टमी का दिन भगवान कृष्ण के साथ-साथ माता तुलसी के लिए भी उतना ही पावन और पूजनीय माना गया है, इसलिए पूजन के लिए तुलसी के पत्ते पहले ही तोड़कर रख लेने चाहिए।
पूजा के दौरान इन गलतियों से करें परहेज
आचार्य बंशीधर झा बताते हैं कि महिलाओं को तुलसी पूजन करते समय अपने बाल खुले नहीं रखने चाहिए, बल्कि बालों को भली-भांति बांधकर ही पूजा संपन्न करनी चाहिए। इसके अलावा, आराधना के समय काले रंग के वस्त्र धारण करने से पूरी तरह परहेज करना आवश्यक है। शाम के समय तुलसी के पौधे को भूलकर भी स्पर्श नहीं करना चाहिए, क्योंकि तुलसी को साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और संध्याकाल में उनका स्पर्श वर्जित होता है।
परिक्रमा और इन दिव्य नामों का जाप
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर तुलसी के पौधे के सामने हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना व्यक्त करनी चाहिए और विधिवत पूजा के बाद पौधे की परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए। इसके साथ ही तुलसी के आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह स्वच्छ रखना जरूरी है, वहां किसी भी प्रकार की गंदगी न फैलने दें। तुलसी जी के समीप खड़े होकर भगवान श्री कृष्ण के पवित्र नामों जैसे गोपाल, गोविंद, देवकीनंदन और दामोदर का सच्चे मन से उच्चारण करने पर मां लक्ष्मी और कान्हा दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।





















