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खजुराहो के ऐतिहासिक दूल्हा देव मंदिर के साल में एक बार खुलते हैं कपाट, नवविवाहित जोड़े जरूर टेकते हैं मत्थाअध्यात्म
19 अक्तू॰ 2026, 6:31 am (28 मिनट पहले)· 0

खजुराहो के ऐतिहासिक दूल्हा देव मंदिर के साल में एक बार खुलते हैं कपाट, नवविवाहित जोड़े जरूर टेकते हैं मत्था

मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित दूल्हा देव मंदिर के द्वार साल में केवल एक बार खुलते हैं, जहां विवाह के बाद नवदंपति शिव जी का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित विश्व विख्यात पर्यटन स्थल खजुराहो अपनी अनूठी स्थापत्य कला और ऐतिहासिक मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है। देश और विदेश से लाखों सैलानी यहां की ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार करने पहुंचते हैं। खजुराहो के इन्हीं पावन स्थलों के बीच भगवान शिव को समर्पित एक ऐसा विशिष्ट मंदिर स्थित है, जिसे दूल्हा देव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस देवालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके मुख्य कपाट पूरे वर्ष में केवल एक ही दिन श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं।

कुंवर मठ के नाम से भी विख्यात है यह प्राचीन देवालय

दूल्हा देव मंदिर को स्थानीय स्तर पर कुंवर मठ के नाम से भी पुकारा जाता है। इतिहास के पन्नों में इस देवालय का विशेष महत्व इसलिए भी दर्ज है क्योंकि यह खजुराहो के उन चुनिंदा दो प्रमुख मंदिरों में शामिल है, जो मुगल काल के दौरान भी पूरी तरह सुरक्षित रहे। खजुराहो के विशाल मंदिर समूह में वर्तमान में केवल दो ही ऐसे मंदिर हैं जहां देवाधिदेव महादेव की नियमित आराधना की परंपरा बची हुई है। इनमें पहला स्थान दूल्हा देव मंदिर का है और दूसरा मतंगेश्वर महादेव मंदिर माना जाता है।

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बारात और दूल्हे से जुड़ी सदियों पुरानी लोककथा

मतंगेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी बाबूलाल गौतम के अनुसार इस मंदिर से एक प्राचीन जनश्रुति जुड़ी हुई है। सैकड़ों वर्ष पहले इस मार्ग से एक बारात गुजर रही थी। उस दौरान स्थानीय निवासियों ने दूल्हे को रथ से उतरकर भगवान शिव के समक्ष नमन करने और आशीर्वाद लेने का आग्रह किया। दूल्हे ने अहंकारवश लोगों की इस सलाह को अनसुना कर दिया और बिना सिर झुकाए आगे बढ़ गया, जिसके तुरंत बाद ही उसकी अचानक मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के बाद से यह अटूट परंपरा बन गई कि जब भी कोई बारात यहां से निकलती है, तो दूल्हा और दुल्हन यहां रुककर मत्था जरूर टेकते हैं। खजुराहो और आसपास के ग्रामीण इलाकों में परिणय सूत्र में बंधने वाला हर जोड़ा वैवाहिक जीवन की शुरुआत से पहले भोलेनाथ का आशीष पाने यहां अवश्य पहुंचता है।

एक हजार लघु शिवलिंगों से सुसज्जित है अनुपम विग्रह

दूल्हा देव मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर वर्ष भर ताला लगा रहता है। इस गर्भगृह में स्थापित पावन शिवलिंग अपने आप में अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी माना जाता है। इस विशाल शिवलिंग की रचना एक हजार छोटे-छोटे शिवलिंगों को समाहित करके की गई है, जिसे सहस्रलिंगम भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अलौकिक शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और नवदंपतियों का दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है।

सवाल-जवाब

दूल्हा देव मंदिर किस जिले में स्थित है?
यह मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के ऐतिहासिक पर्यटन शहर खजुराहो में स्थित है।
दूल्हा देव मंदिर का दूसरा लोकप्रिय नाम क्या है?
इस प्राचीन मंदिर को स्थानीय स्तर पर कुंवर मठ के नाम से भी जाना जाता है।
इस मंदिर के द्वार कितनी बार खोले जाते हैं?
दूल्हा देव मंदिर के मुख्य कपाट पूरे वर्ष में केवल एक ही बार दर्शन के लिए खोले जाते हैं।
मंदिर के शिवलिंग में क्या विशेषता है?
गर्भगृह में स्थित विशाल शिवलिंग एक हजार छोटे-छोटे शिवलिंगों से मिलकर बना है।
नवविवाहित जोड़े यहां क्यों जाते हैं?
प्राचीन मान्यता के अनुसार एक दूल्हे की महादेव की अनदेखी करने पर मृत्यु हो गई थी, इसलिए नवदंपति सुखद जीवन और सुरक्षा के लिए यहां मत्था टेकते हैं।
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