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निर्जला एकादशी 2026: 25 जून को रखें व्रत, पूजा की पूरी सामग्री, दान की चीजें और पारण का शुभ मुहूर्त एक साथ जानेंअध्यात्म
23 जून 2026, 7:44 pm (92 दिन पहले)· 7

निर्जला एकादशी 2026: 25 जून को रखें व्रत, पूजा की पूरी सामग्री, दान की चीजें और पारण का शुभ मुहूर्त एक साथ जानें

इस साल निर्जला एकादशी 25 जून 2026, गुरुवार को है। जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री सूची, दान में क्या दें, तुलसी से जुड़ा जरूरी नियम और पारण का सही समय।

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह पूरे साल की एकादशियों में सबसे कठिन मानी जाती है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के भक्त न अन्न खाते हैं और न एक बूंद जल ग्रहण करते हैं। इस बार यह पवित्र व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को पड़ रहा है। इस संयोग को विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है, क्योंकि गुरुवार और एकादशी दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि निर्जला एकादशी का व्रत करने से पूरे साल की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

तिथि का समय और पारण का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और 25 जून को रात 8 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन 26 जून को होगा। पारण के लिए शुभ समय सुबह 6 बजकर 3 मिनट से सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस समय सीमा के भीतर ही पारण करना उचित माना जाता है।

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पूजा में लगने वाली पूरी सामग्री की सूची

निर्जला एकादशी की पूजा विधिवत करने के लिए इन सभी सामग्रियों का पहले से इंतजाम कर लेना जरूरी है:

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर
  • पीले रंग के वस्त्र
  • पीले फूल, चंदन, तुलसी दल, मौली यानी कलावा और अक्षत
  • धूप, दीपक, कपूर और घी
  • पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण
  • पंचमेवा और मिठाई
  • मौसमी फल, केला और नारियल
  • गंगाजल
  • विष्णु सहस्रनाम की पुस्तक
  • माता लक्ष्मी के लिए सुहाग की सामग्री जैसे बिंदी, चूड़ी, सिंदूर, वस्त्र, काजल और आलता

इन चीजों का दान करें, मिलेगा विशेष पुण्य

ज्येष्ठ माह की तेज गर्मी में निर्जला एकादशी के दिन दान का विशेष महत्व होता है। जरूरतमंद लोगों को नीचे दी गई चीजें दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है:

  • जल से भरा कलश या मटका
  • वस्त्र
  • फल
  • धन
  • छाता
  • शर्बत
  • खरबूजा और आम
  • हाथ का पंखा
  • सत्तू और गुड़

एकादशी पर तुलसी से जुड़ा यह नियम जरूर याद रखें

एकादशी के दिन तुलसी के पौधे पर जल चढ़ाना पूरी तरह वर्जित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी माता खुद भगवान विष्णु के लिए एकादशी का व्रत रखती हैं और उनके पौधे पर जल अर्पित करने से यह व्रत टूट जाता है। इसी कारण एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना भी वर्जित है। चूंकि भगवान विष्णु की पूजा और उनका भोग दोनों तुलसी के बिना अधूरे माने जाते हैं, इसलिए पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले यानी 24 जून को ही तोड़कर रख लें। इस जरूरी तैयारी को नजरअंदाज करने पर पूजा अधूरी रह सकती है।

सवाल-जवाब

2026 में निर्जला एकादशी कब है?
2026 में निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार को मनाई जाएगी।
निर्जला एकादशी का व्रत किस तरह रखा जाता है?
इस व्रत में पूरे दिन न अन्न खाया जाता है और न जल पिया जाता है, इसीलिए इसे साल की सबसे कठिन एकादशी कहा जाता है।
एकादशी तिथि का आरंभ और समापन कब होगा?
एकादशी तिथि 24 जून को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और 25 जून को रात 8 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी।
निर्जला एकादशी 2026 का पारण कब होगा?
पारण 26 जून को सुबह 6 बजकर 3 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 42 मिनट के बीच किया जाएगा।
एकादशी के दिन तुलसी को जल क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?
मान्यता है कि तुलसी माता खुद भगवान विष्णु के लिए एकादशी का व्रत रखती हैं और जल अर्पित करने से उनका व्रत टूट जाता है।
पूजा के लिए तुलसी दल कब तोड़ें?
एकादशी के दिन तुलसी तोड़ना वर्जित है, इसलिए एक दिन पहले यानी 24 जून को ही पत्ते तोड़कर रख लें।
निर्जला एकादशी पर किन चीजों का दान करना शुभ माना जाता है?
पानी का कलश, वस्त्र, फल, धन, छाता, शर्बत, खरबूजा, आम, हाथ का पंखा, सत्तू और गुड़ दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
इस बार निर्जला एकादशी को विशेष रूप से शुभ क्यों कहा जा रहा है?
इस बार एकादशी गुरुवार को पड़ रही है और दोनों ही दिन भगवान विष्णु को समर्पित हैं, इसलिए यह संयोग अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
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