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शादी-ब्याह के लिए सिर्फ 12 जुलाई तक बचा मौका, चातुर्मास से पहले ही क्यों थम रहे मांगलिक कार्य?अध्यात्म
5 जुल॰ 2026, 10:40 am (42 दिन पहले)· 2

शादी-ब्याह के लिए सिर्फ 12 जुलाई तक बचा मौका, चातुर्मास से पहले ही क्यों थम रहे मांगलिक कार्य?

देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है और उसी दिन से चातुर्मास शुरू होगा, लेकिन बृहस्पति ग्रह के वार्धक्य और अस्त होने की वजह से शुभ मुहूर्त 12 जुलाई के बाद ही थम जाएंगे.

इस साल शादी-ब्याह की तैयारी में जुटे परिवारों के लिए एक जरूरी बात जान लेनी चाहिए, क्योंकि शुभ मुहूर्तों का मौसम चातुर्मास शुरू होने से भी पहले खत्म हो जाएगा. सनातन धर्म में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी कहा जाता है और इस बार यह तिथि 25 जुलाई दिन शुक्रवार को पड़ रही है. इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी, यानी देवउठनी एकादशी को ही वापस जागते हैं. इन चार महीनों के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए प्रतिष्ठान के उद्घाटन जैसे तमाम शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. लेकिन असली सवाल यह है कि जब चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू हो रहा है, तो फिर मांगलिक कार्यक्रम 12 जुलाई से ही क्यों बंद हो रहे हैं. आइए इसकी वजह और इन चार महीनों में क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह विस्तार से समझते हैं.

चातुर्मास और देवशयनी एकादशी का आपस में क्या संबंध है

धार्मिक मान्यता के मुताबिक जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, तब सृष्टि के संचालन का जिम्मा भगवान शिव संभालते हैं. देवउठनी एकादशी के दिन जब श्रीहरि योगनिद्रा से लौटते हैं, तब सृष्टि की देखरेख की जिम्मेदारी फिर से उनके पास आ जाती है. चातुर्मास को आत्मसंयम, तप, जप, दान और भक्ति का काल माना गया है. इस दौरान साधु-संत एक ही स्थान पर टिककर धर्मोपदेश, सत्संग और साधना में जुट जाते हैं, जबकि श्रद्धालु भी अपनी दिनचर्या में सात्विकता लाते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में ज्यादा वक्त देने लगते हैं. कहा जाता है कि चातुर्मास के दौरान किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. इन चार महीनों में सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक मास शामिल होते हैं.

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12 जुलाई से ही क्यों थम जाएंगे मांगलिक आयोजन

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जुलाई महीने में विवाह के शुभ मुहूर्त सिर्फ 2, 3, 4, 9, 11 और 12 जुलाई तक ही उपलब्ध हैं. दरअसल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि, यानी 12 जुलाई की सुबह 11 बजकर 11 मिनट से बृहस्पति ग्रह का वार्धक्य काल शुरू हो जाएगा. यही वजह है कि 12 जुलाई के बाद से मांगलिक कार्यक्रमों पर रोक लग जाएगी. इसके बाद 15 जुलाई को गुरु ग्रह शाम 7 बजकर 27 मिनट पर पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएगा और 12 दिसंबर तक वक्री अवस्था में रहेगा. इसके बाद 9 अगस्त को गुरु ग्रह पूर्व दिशा में फिर से उदय होगा. किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य के लिए गुरु ग्रह का उदित होना बेहद जरूरी माना जाता है, और जब गुरु ही अस्त हो जाएगा तो शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त बचते ही नहीं. इसके अगले ही चरण में 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो जाएगा. इस तरह 12 जुलाई इस सीजन का आखिरी पंचांगीय सावा यानी अंतिम शुभ दिन साबित होगा. इसके बाद देवउठनी एकादशी आने पर ही दोबारा शुभ और मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो पाएगी.

चातुर्मास में इन बातों का रखें ध्यान, यह करना रहेगा शुभ

  • प्रतिदिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें.
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का नियमित जप करें.
  • श्रीमद्भागवत, भगवद्गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
  • गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान दें.
  • एकादशी, पूर्णिमा और अन्य प्रमुख व्रतों का श्रद्धापूर्वक पालन करें.
  • सात्विक भोजन करें और संयमित दिनचर्या अपनाएं.
  • क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की कोशिश करें.

चातुर्मास में इन कामों से बचना जरूरी

  • विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन और अन्य मांगलिक संस्कारों से बचें.
  • तामसिक भोजन, मद्यपान और मांसाहार का सेवन ना करें.
  • झूठ, छल, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचें.
  • बिना जरूरत पेड़-पौधों या जीव-जंतुओं को नुकसान ना पहुंचाएं.
  • धार्मिक नियमों की अनदेखी ना करें और व्रत-उपवास में लापरवाही ना बरतें.

आखिर मांगलिक कार्यक्रम इस दौरान क्यों नहीं किए जाते

धार्मिक मान्यता के अनुसार जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, तब वे सृष्टि के पालन से जुड़े शुभ कार्यों में सीधे तौर पर सक्रिय नहीं रहते. इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश और बाकी शुभ संस्कारों के लिए इस अवधि को उपयुक्त नहीं माना जाता. देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों की दोबारा शुरुआत हो जाती है. धर्माचार्यों का कहना है कि चातुर्मास सिर्फ शुभ कार्यों पर रोक लगाने का समय नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, साधना और ईश्वर भक्ति के लिए एक सुनहरा अवसर भी है. इस दौरान किए गए जप, तप, व्रत और दान से जहां आध्यात्मिक उन्नति होती है, वहीं जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है.

सवाल-जवाब

चातुर्मास 2026 कब से शुरू हो रहा है?
चातुर्मास 25 जुलाई, शुक्रवार को देवशयनी एकादशी के दिन से शुरू हो रहा है.
देवशयनी एकादशी क्या है?
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी कहा जाता है, जिस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं.
अगर चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू हो रहा है तो मांगलिक कार्य 12 जुलाई से ही क्यों बंद हो रहे हैं?
12 जुलाई की सुबह 11 बजकर 11 मिनट से बृहस्पति ग्रह का वार्धक्य काल शुरू हो जाएगा और 15 जुलाई को गुरु ग्रह अस्त हो जाएगा, इसलिए शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त 12 जुलाई के बाद नहीं बचते.
गुरु ग्रह कब अस्त होगा और कब उदय होगा?
गुरु ग्रह 15 जुलाई को शाम 7 बजकर 27 मिनट पर पश्चिम दिशा में अस्त होगा, 12 दिसंबर तक वक्री रहेगा और 9 अगस्त को पूर्व दिशा में उदय होगा.
चातुर्मास कब खत्म होगा?
चातुर्मास कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के दिन समाप्त होगा, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं.
जुलाई में विवाह के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से हैं?
जुलाई में विवाह के शुभ मुहूर्त 2, 3, 4, 9, 11 और 12 जुलाई तक ही हैं.
चातुर्मास में कौन से काम नहीं करने चाहिए?
चातुर्मास में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन जैसे मांगलिक संस्कार, तामसिक भोजन, मद्यपान और मांसाहार से बचना चाहिए.
चातुर्मास में क्या करना शुभ माना जाता है?
चातुर्मास में रोज विष्णु, लक्ष्मी और शिव की पूजा, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है.
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