राजस्थान के ग्रामीण इलाकों के खिलाड़ियों ने बार-बार यह साबित किया है कि अगर सही दिशा और उचित मंच मिले, तो विश्व स्तरीय खेल प्रतिभाएं किसी भी छोटे गांव से निकल सकती हैं। अलवर जिले के तिजारा विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले हसनपुर गांव के निवासी सुब्बी खान इस तथ्य का सबसे ताजा और शानदार उदाहरण बनकर उभरे हैं। अपनी अचूक नजर, शानदार रिफ्लेक्सिस और मजबूत मानसिक एकाग्रता का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने 2026 में आयोजित प्रतिष्ठित 24वीं राजस्थान स्टेट ओपन शॉटगन शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार रजत पदक हासिल किया है। प्रदेश स्तर के इस प्रमुख खेल आयोजन में पोडियम तक पहुंचने की उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके गृह जिले का मान बढ़ाया है, बल्कि आगामी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए उनका टिकट भी पक्का कर दिया है।
खेल की विधा बदलना और तकनीक में महारत हासिल करना
राज्य स्तर पर पदक जीतने का यह शानदार सफर पिछले एक साल की निरंतर मेहनत और नई चीजों को सीखने की अद्भुत क्षमता की नींव पर खड़ा हुआ है। अपनी खेल यात्रा के शुरुआती दौर में, इस होनहार एथलीट ने अपना पूरा ध्यान 10 मीटर शूटिंग स्पर्धा पर केंद्रित किया था। यह एक ऐसा खेल है जिसमें शरीर को पूरी तरह से स्थिर रखने और सांसों पर कड़ा नियंत्रण रखने की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। हालांकि, जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि हवा में उड़ते हुए तेज लक्ष्यों को भेदने में उनकी स्वाभाविक पकड़ ज्यादा मजबूत है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने अपने करियर को शॉटगन शूटिंग की तरफ मोड़ने का एक बहुत ही रणनीतिक और चुनौतीपूर्ण फैसला लिया। इस जटिल तकनीकी बदलाव को आसान बनाने के लिए, उन्होंने अपना मुख्य ट्रेनिंग बेस पास के बड़े औद्योगिक शहर भिवाड़ी में शिफ्ट कर लिया। वहां उन्होंने एक बेहद अनुभवी शॉटगन कोच की कड़ी निगरानी में खेल की बारीकियों को गहराई से समझना शुरू किया। दोनों ने मिलकर उनके खड़े होने के तरीके, बंदूक पकड़ने की शैली और निशाना लगाने की पूरी प्रक्रिया को बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया, ताकि वह भारी बंदूकों और इस खेल की स्वाभाविक तेजी के अनुकूल खुद को ढाल सकें।
दिल्ली प्रवास के जरिए खेल की चुनौतियों को पार करना
यह महसूस करते हुए कि स्थानीय जिले की सुविधाएं उनके कौशल को एक सीमा तक ही निखार सकती हैं, इस महत्वाकांक्षी निशानेबाज ने राज्य के बाहर भी बड़े स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेने का ठोस फैसला किया। खेल के प्रति यह गहरा समर्पण उन्हें देश की राजधानी तक ले गया, जहां उन्होंने पूरे दो महीने के विशेष और गहन कोचिंग कैंप में दाखिला लिया। दिल्ली में मौजूद राष्ट्रीय स्तर के शानदार खेल बुनियादी ढांचे, मनोवैज्ञानिक कंडीशनिंग और उन्नत ड्रिल्स ने उनकी तकनीकी धार को तेज करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। अपनी इस अहम ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने दिल्ली में ही एक स्वतंत्र क्षेत्रीय टूर्नामेंट में भी पूरे आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लिया और वहां भी रजत पदक जीतकर अपनी तैयारियों की सही दिशा को साबित कर दिया। हालांकि, उनका यह पूरा सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उनके निजी व्यवसाय और अन्य पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण अक्सर उनके कड़े अभ्यास कार्यक्रम में रुकावटें आती थीं और उन्हें मजबूरन ब्रेक लेना पड़ता था। इन तमाम बड़ी लॉजिस्टिक, आर्थिक और पेशेवर मुश्किलों का सामना करने के बावजूद, खेल के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ और वह हमेशा किसी न किसी तरह से शूटिंग रेंज पर वापसी करने का रास्ता निकाल ही लेते थे।
जयपुर में हजारों खिलाड़ियों की चुनौती को पार करना
शॉटगन के खेल में हासिल की गई उनकी इन नई खासियतों का असली और सबसे बड़ा परीक्षण राजधानी जयपुर में आयोजित 24वीं राजस्थान स्टेट ओपन शॉटगन शूटिंग चैंपियनशिप के दौरान हुआ। साल 2026 के इस भव्य खेल आयोजन में पूरे मरुस्थलीय राज्य के हर कोने से आए हजारों शीर्ष निशानेबाजों और खेल प्रेमियों का अभूतपूर्व जमावड़ा देखने को मिला। इस बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा को कई अलग-अलग आयु वर्गों में बांटा गया था। इसमें मुख्य रूप से 12 से 25 वर्ष के युवा वर्ग और 35 से 65 वर्ष के अनुभवी आयु वर्ग में खिलाड़ियों की भारी भीड़ मौजूद थी। क्वालिफिकेशन राउंड के जबरदस्त मनोवैज्ञानिक दबाव और इतनी बड़ी भीड़ की उम्मीदों के बीच, खान ने अपना संयम बिल्कुल नहीं खोया। उनके स्थिर हाथों और अचूक एकाग्रता ने उन्हें सीधे रजत पदक पर निशाना साधने में मदद की। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने कई बेहद अनुभवी दिग्गजों और नए उभरते हुए होनहार खिलाड़ियों को भी प्रतियोगिता में काफी पीछे छोड़ दिया।
ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा और पटियाला पर नजर
हसनपुर वापस लौटने पर, उनकी इस बड़ी खेल विजय का सकारात्मक प्रभाव शूटिंग रेंज की सीमाओं से कहीं आगे तक फैल गया है। एक ऐसे ग्रामीण समुदाय के लिए, जिसने हमेशा सीमित खेल सुविधाओं और संसाधनों की भारी कमी का सामना किया है, उनकी यह असाधारण सफलता आने वाली युवा पीढ़ियों के लिए एक बहुत बड़े उत्प्रेरक का काम कर रही है। स्थानीय निवासियों और क्षेत्र के खेल प्रेमियों ने इस जीत को पूरे तिजारा इलाके की एक बड़ी सामूहिक उपलब्धि मानकर इसका जश्न मनाया है। समाज सेवा के कई अहम कार्यों में अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए पहले से ही पहचाने जाने वाले सुब्बी खान ने पेशेवर जिम्मेदारियों, सामाजिक कार्यों और एलीट स्पोर्ट्स के बीच जो बेहतरीन संतुलन बनाया है, उसने एक रोल मॉडल के रूप में उनका कद बहुत बड़ा कर दिया है। राज्य स्तर पर रजत पदक पक्का होने के बाद, अब उनका पूरा ध्यान भौगोलिक और मानसिक रूप से एक नई चुनौती की तरफ मुड़ गया है। वह इस समय पंजाब के पटियाला में होने वाली आगामी राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप के लिए बेहद कड़े अभ्यास में जुटे हुए हैं। इस बहुप्रतीक्षित टूर्नामेंट में उतरने से पहले, उनका मुख्य लक्ष्य अपने खेल के स्तर को और ऊंचा उठाना और पूरे भारत के सबसे बड़े मंच पर पदक जीतकर अपने राज्य का नाम रोशन करना है।




















