जापान के आईची-नागोया में आयोजित हो रहे पैरा एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन का सिलसिला शुरू कर दिया है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारत के खाते में दो अहम पदक आए, जिनमें दीप्ति जीवनजी का स्वर्ण पदक और भाविना पटेल का कांस्य पदक शामिल है।
दीप्ति जीवनजी ने 400 मीटर टी20 में रचा इतिहास
दीप्ति जीवनजी ने महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने मंगलवार को 56.36 सेकंड का समय निकालकर यह उपलब्धि हासिल की। तेलंगाना की रहने वाली 23 वर्ष की दीप्ति इससे पहले दो बार पैरा विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी हैं, जिसमें 2024 का स्वर्ण पदक भी शामिल है। इसके अलावा उन्होंने पैरालंपिक खेलों में भी इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इस स्पर्धा में जापान की नीना कान्नो ने 58.92 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक जीता, जबकि अकाने कातो ने एक मिनट 00.26 सेकंड का समय लेकर कांस्य पदक प्राप्त किया। खेल की टी-20 श्रेणी में ऐसे बौद्धिक अक्षमता वाले एथलीट हिस्सा लेते हैं जिन्हें सूचनाओं को समझने, एकाग्रता बनाए रखने और तकनीकी रणनीतियों पर अमल करने में कठिनाई होती है।
भाविना पटेल ने टेबल टेनिस में जीता कांस्य
टेबल टेनिस के महिला एकल 4-5 वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में भाविना पटेल को चीन की आठ बार की पैरालंपिक चैंपियन झांग बियान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। पैरालंपिक की पूर्व रजत पदक विजेता भाविना को इस मुकाबले में 7-11, 5-11, 7-11 से पराजय झेलनी पड़ी। पिछले पैरा एशियाई खेलों में भी कांस्य जीतने वाली भाविना ने 2018 के खेलों में रजत पदक जीता था। मुकाबले में उनके सामने उतरीं 40 साल की झांग बियान ने पिछले पैरा एशियाई खेलों में रजत पदक अपने नाम किया था। गुजरात की 39 वर्षीय भाविना राष्ट्रमंडल खेलों की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता भी रह चुकी हैं। टेबल टेनिस के 4-5 वर्ग में वे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जिनका अपने शरीर के ऊपरी हिस्से पर पूरा नियंत्रण होता है, लेकिन पैरों या निचले हिस्से में विकार के कारण वे व्हीलचेयर का उपयोग करते हैं।



















