एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी पुरुष हॉकी टूर्नामेंट में पांच बार की चैंपियन भारतीय टीम ने अपना दबदबा कायम रखते हुए खिताबी मुकाबले में कदम रख दिया है। सेमीफाइनल मुकाबले में भारत के फॉरवर्ड खिलाड़ियों और पेनाल्टी कॉर्नर विशेषज्ञों ने दक्षिण कोरिया के डिफेंस को पूरी तरह तहस-नहस करते हुए 8-1 की एकतरफा जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय दल ने रिकॉर्ड सातवीं बार इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने की उपलब्धि हासिल की है। पूरे 60 मिनट के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने ऐसा जबर्दस्त नियंत्रण बनाए रखा कि प्रतिद्वंद्वी टीम पूरे मुकाबले में वापसी की किसी भी कोशिश को अंजाम नहीं दे पाई। एशियाई खेलों की मौजूदा स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम अब गुरुवार को होने वाले खिताबी मुकाबले में जापान की चुनौती का सामना करेगी।
शुरुआती पलों में लाकड़ा और हरमनप्रीत का हमला
मैच का पहला सीटी बजते ही भारतीय आक्रमणकारी दक्षिण कोरियाई हाफ में सक्रिय नजर आए। मुकाबले के चौथे ही मिनट में शिलानंद लाकड़ा ने एक शानदार मैदानी गोल दागकर भारत का खाता खोला और टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिला दी। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों ने हालांकि नौवें मिनट में त्वरित पलटवार किया, जब संगजुन हान ने भारतीय डिफेंस की हल्की सी चूक का फायदा उठाकर मैदानी गोल किया और स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। कोरिया की यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी, क्योंकि उसी नौवें मिनट में भारत ने विरोधी घेरे में तीव्र हमला बोलते हुए पेनाल्टी कॉर्नर हासिल किया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने गेंद को सटीक निशाने के साथ गोलपोस्ट के जाल में उलझाकर भारत को तुरंत 2-1 की बढ़त दिला दी। दबाव को और बढ़ाते हुए खेल के 13वें मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर के रीबाउंड पर शिलानंद लाकड़ा ने तुरंत मौका भांपा और गेंद को नेट में डालकर अपना व्यक्तिगत दूसरा और टीम का तीसरा गोल पूरा किया। पहले क्वार्टर की समाप्ति तक भारतीय दल 3-1 की मजबूत बढ़त हासिल कर चुका था।
दूसरे क्वार्टर का तूफान, पांच मिनट में दागे तीन गोल
दूसरे क्वार्टर में भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने अपनी रफ्तार और आक्रामकता को दोगुना कर दिया। इस चरण में टीम ने महज पांच मिनट के अंतराल में तीन बेहतरीन मैदानी गोल दागकर दक्षिण कोरियाई टीम की कमर तोड़ दी। 21वें मिनट में सुखजीत सिंह ने सटीक तालमेल का प्रदर्शन करते हुए गेंद को गोल के भीतर पहुंचाया। सुखजीत के इस वार के कुछ ही सेकंड बाद दिलप्रीत सिंह ने शानदार मूव बनाकर भारत की तरफ से पांचवां गोल दाग दिया। दिलप्रीत की आक्रामकता यहीं शांत नहीं हुई, और 25वें मिनट में उन्होंने कोरियाई गोलकीपर को छकाते हुए एक और खूबसूरत मैदानी गोल किया, जिससे मैच में उनकी ब्रेस पूरी हो गई। हाफ टाइम तक स्थिति यह हो चुकी थी कि भारतीय टीम 6-1 की लगभग अजेय बढ़त बनाकर ड्रेसिंग रूम लौटी।
दूसरे हाफ में भी भारत का शिकंजा रहा सख्त
हाफ टाइम के बाद जब दोनों टीमें मैदान पर उतरीं, तब भी खेल का रुख बिल्कुल नहीं बदला। तीसरे क्वार्टर की शुरुआत के छह मिनट बाद, यानी मैच के 36वें मिनट में अंगद बीर सिंह ने बेहतरीन मैदानी गोल दागकर भारत की बढ़त को 7-1 तक पहुंचा दिया। अंतिम क्वार्टर में भी भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और 54वें मिनट में विवेक सागर प्रसाद ने मैदानी गोल करके स्कोरबोर्ड को 8-1 पर पहुंचा दिया। पूरे 60 मिनट के खेल में भारतीय टीम के अनुशासित खेल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने कुल चार पेनाल्टी कॉर्नर अर्जित किए, जबकि दक्षिण कोरियाई टीम पूरे मैच के दौरान एक भी पेनाल्टी कॉर्नर हासिल करने में नाकाम रही।
टूर्नामेंट में लगातार अजेय सफर और फाइनल की जंग
इस पूरे टूर्नामेंट में मेजबान भारतीय टीम का प्रदर्शन अविश्वसनीय रहा है। छह टीमों के राउंड-रॉबिन लीग चरण में भारत ने अपने सभी पांच मुकाबले जीतकर अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया था। उल्लेखनीय है कि इसी प्रतियोगिता के लीग चरण में भी भारत ने दक्षिण कोरिया को 8-0 से करारी मात दी थी, और सेमीफाइनल में भी उसी तरह का प्रदर्शन दोहराया गया। दूसरी ओर, पहले सेमीफाइनल मुकाबले में जापान ने मलेशिया को कड़े पेनल्टी शूटआउट में 5-3 से हराकर फाइनल में जगह बनाई, क्योंकि निर्धारित समय तक दोनों टीमें 0-0 की बराबरी पर रुकी हुई थीं। अब गुरुवार को अजेय भारतीय टीम जापान के खिलाफ अपना छठा एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरेगी।



















