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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 में धांधली के दावों के बीच चुनावी नतीजों को खारिज करने वाले नेताओं की भारी हार और साधी चुप्पीराजनीति
4 नव॰ 2026, 9:13 pm (1 घंटे पहले)· 0

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 में धांधली के दावों के बीच चुनावी नतीजों को खारिज करने वाले नेताओं की भारी हार और साधी चुप्पी

वर्ष 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में धांधली का दावा करने वाले प्रमुख नेताओं को करारी शिकस्त मिली है, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले नेटवर्क और खुद नेताओं ने नतीजों को चुनौती देने के बजाय चुप्पी साध ली है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 के मतदान वाले दिन की शुरुआत चुनावी नतीजों पर सवाल उठाने वाले नेताओं और समूहों की तरफ से व्यापक फर्जीवाड़े के गंभीर दावों के साथ हुई थी। मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी, डाक मतपत्रों में हेरफेर और गैर-नागरिकों द्वारा मतदान करने के अनगिनत आरोप महीनों से लगाए जा रहे थे। जब देर शाम मतगणना के रुझान सामने आए और डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, तो चुनावी शुचिता पर सवाल उठाने वाले वही उम्मीदवार और उनके समर्थक अचानक पूरी तरह खामोश हो गए। हार का सामना करने वाले लगभग किसी भी बड़े नेता ने इस बार चुनाव में धांधली होने या नतीजों में हेराफेरी का कोई औपचारिक दावा नहीं किया।

चुनाव प्रचार के दौरान कई महीनों से चुनावी नतीजों को खारिज करने वाले नेता यह आरोप लगा रहे थे कि डेमोक्रेट्स के पक्ष में नतीजों को मोड़ने के लिए व्यवस्था में हेरफेर की जाएगी। उनका यह भी कहना था कि डाक के जरिए डाले जाने वाले वोटों से छेड़छाड़ होगी और बड़ी संख्या में गैर-नागरिक मतदान करके नतीजों की दिशा बदल देंगे। चुनाव के दिन तक इन दावों का कोई ठोस आधार या सबूत सामने नहीं रखा गया था। जब मतपेटियां खुलीं, तो पूरी तस्वीर इसके विपरीत नजर आई और मतदाताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन द्वारा लागू की गई नीतियों को सिरे से नकार दिया। राज्य और संघीय स्तर की सीटों पर उतरे सैकड़ों उम्मीदवार पिछली चुनावी प्रक्रियाओं की जांच कराने या मतदान के नियमों को पूरी तरह बदलने के वादे के साथ मैदान में थे। जब मतगणना पूरी हुई, तो इस खेमे के सबसे महत्वपूर्ण चेहरों में से लगभग सभी को हार का सामना करना पड़ा और न तो उन्होंने और न ही उनका समर्थन करने वाले सक्रिय संगठनों के नेटवर्क ने नतीजों पर कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई।

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एरिज़ोना से मिशिगन तक प्रमुख उम्मीदवारों की हार और बयान

एरिज़ोना के गवर्नर पद के कड़े मुकाबले में एंडी बिग्स मैदान में थे, जो 6 जनवरी 2021 को वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव नतीजों को कांग्रेस में चुनौती देने वाले प्रमुख सांसदों में शामिल रहे थे। जब नतीजे सामने आए, तो एंडी बिग्स ने मौजूदा डेमोक्रेट गवर्नर केटी हॉब्स के सामने अपनी पराजय स्वीकार कर ली। अपने संबोधन में उन्होंने चुनावी धांधली या मतों की हेराफेरी का कोई जिक्र नहीं किया, बल्कि कम मतदान को अपनी हार की वजह बताते हुए कहा, “हम अपने मतदाताओं को उतनी बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक नहीं ला सके, जितना हम चाहते थे।”

मिशिगन में सीनेट की सीट के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का मुकाबला डेमोक्रेट अब्दुल अल-सईद से था। माइक रोजर्स अतीत में डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले बयानों के आलोचक रहे थे, लेकिन मतदान से कुछ महीने पहले उन्होंने भी अमेरिका की चुनावी सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक रूप से संदेह जताना शुरू कर दिया था। चुनावी मैदान में यह रुख काम नहीं आया और माइक रोजर्स को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर नतीजों पर कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही उन्होंने कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।

विस्कॉन्सिन, ओहियो और नेवादा के अहम चुनावी नतीजे

विस्कॉन्सिन राज्य में टॉम टिफ़नी ने गवर्नर पद की दौड़ में हिस्सा लिया था। टॉम टिफ़नी वही नेता हैं जिन्होंने वर्ष 2020 में जो बाइडन की चुनावी जीत के प्रमाणीकरण का कड़ा विरोध किया था। मध्यावधि चुनाव से कुछ ही हफ्ते पहले उन्होंने विस्कॉन्सिन के चुनावों की एफबीआई जांच का स्वागत किया था, जिसका कोई ठोस आधार नहीं था। मतदान के बाद आए नतीजों में डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी डेविड क्राउली ने टॉम टिफ़नी को हरा दिया। मंगलवार की रात टॉम टिफ़नी ने अपनी हार स्वीकार कर ली और इस दौरान चुनावी धांधली या व्यवस्था में किसी तरह की हेराफेरी का कोई संदर्भ नहीं दिया।

ओहियो में अरबपति विवेक रामास्वामी रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से गवर्नर पद के उम्मीदवार थे। विवेक रामास्वामी पहले यह दावा कर चुके थे कि वर्ष 2020 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 'बड़ी टेक कंपनियों' ने चुरा लिया था। इस चुनावी मुकाबले में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने विवेक रामास्वामी को हरा दिया। नतीजे स्पष्ट होने के बाद मंगलवार रात विवेक रामास्वामी ने अपने समर्थकों को बताया कि उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को फोन करके अपनी हार स्वीकार कर ली है और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने भी अपने वक्तव्य में चुनावी धांधली या फर्जीवाड़े का कोई आरोप नहीं लगाया।

नेवादा में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के पद पर जिम मर्चेंट चुनाव लड़ रहे थे। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समर्थित जिम मर्चेंट लगातार चुनावी नतीजों को खारिज करने के लिए जाने जाते रहे हैं और उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में वादा किया था कि यदि वह निर्वाचित होते हैं, तो वह नेवादा के हर एक नागरिक का मतदाता पंजीकरण रद्द कर देंगे। नतीजों में मौजूदा सेक्रेटरी ऑफ स्टेट सिस्को एगुइलर ने जिम मर्चेंट को शिकस्त दे दी। हार के बाद जिम मर्चेंट ने नतीजों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की और न ही कोई प्रतिक्रिया दी।

कोलोराडो और पेंसिल्वेनिया में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों का हश्र

कोलोराडो में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार जेम्स विली, जो खुद को 'रेड फ्लेम ऑफ लिबर्टी' कहते हैं, ने चुनाव प्रणाली में जनता के भरोसे को कमजोर करने को ही अपने पूरे अभियान का मुख्य आधार बनाया था। चुनाव के दिन उन्हें डेमोक्रेट अमांडा गोंजालेज के हाथों भारी पराजय मिली। मंगलवार रात जेम्स विली ने नतीजों पर कोई सवाल उठाए बिना अपनी हार स्वीकार कर ली और घोषणा की कि वह अब कोलोराडो रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। अपनी हार स्वीकार करते हुए जेम्स विली ने कहा, “मुझे लगता है कि कोलोराडो दो-दलीय व्यवस्था से पूरी तरह निराश हो चुका है, रिपब्लिकन पार्टी से मिल रहे नतीजों से निराश है, और निश्चित रूप से बदलाव का समय आ गया है।” उन्होंने आगे कहा, “यह रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक संकेत है कि हम कुछ गलत कर रहे हैं, शायद हमें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत है, शायद पूरी तरह से लिंकन के दौर तक पीछे जाने की जरूरत है।”

पेंसिल्वेनिया में प्रतिनिधि सभा के सदस्य स्कॉट पेरी अपनी सीट गंवा बैठे। 6 जनवरी की जांच समिति ने पाया था कि स्कॉट पेरी वर्ष 2020 के चुनावी नतीजों को पलटने के प्रयासों में सीधे तौर पर शामिल थे। इस चुनाव में डेमोक्रेट जेनेल स्टेल्सन ने उन्हें पराजित कर दिया। मतदान वाले दिन सुबह जब एक स्थानीय समाचार माध्यम ने उनसे पूछा था कि क्या वह नतीजों को स्वीकार करेंगे, तो स्कॉट पेरी का जवाब था, “मुझे पूरी उम्मीद है।” हारने के बाद स्कॉट पेरी ने नतीजों पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की और उनके प्रचार अभियान दल ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

फ्लोरिडा में जीत और पूरे नेटवर्क की अचानक चुप्पी

चुनावी प्रणाली पर संदेह जताने वाले सभी उम्मीदवार हारे नहीं; कुछ को चुनावी सफलता भी मिली। इनमें फ्लोरिडा के गवर्नर पद के ट्रंप समर्थित उम्मीदवार बायरन डोनाल्ड्स शामिल हैं। वर्ष 2024 के चुनाव के दौरान बायरन डोनाल्ड्स ने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया था कि क्या वह परिणामों को स्वीकार करेंगे। मंगलवार रात जब उनकी जीत हुई और उन्होंने अपने समर्थकों का आभार व्यक्त किया, तब उन्होंने भी चुनावी धोखाधड़ी या वोटों में हेराफेरी का कोई मुद्दा नहीं उठाया।

ये राजनेता वर्ष 2020 के बाद से खड़े हुए उस व्यापक तंत्र का सिर्फ एक हिस्सा थे, जो लगातार चुनाव प्रणाली पर सवाल उठाता रहा है। मंगलवार की शाम जैसे ही चुनावी नतीजे स्पष्ट होने लगे, उन समूहों और प्रचारकों का पूरा नेटवर्क शांत पड़ गया जो कई महीनों से लगातार अमेरिकी चुनावों के लिए खतरों का राग अलाप रहे थे। 'ट्रू द वोट' नामक संगठन, जिसने वर्ष 2020 के चुनाव में मतपत्रों की कथित हेराफेरी पर बनी विवादित फिल्म '2000 म्यूल्स' के पीछे कुछ आंकड़े उपलब्ध कराए थे, ने मतदान के दौरान एक्स पर दर्जनों पोस्ट किए थे। उन पोस्टों में देश भर के मतदान केंद्रों पर कथित गड़बड़ियों के दावों को खूब बढ़ावा दिया गया था। मतगणना पूरी होने और नतीजे सामने आने के बाद के घंटों में इस संगठन के आधिकारिक खाते से पूरी तरह चुप्पी साध ली गई।

इसी तरह प्रमुख मागा कार्यकर्ता स्कॉट प्रेस्लर ने पूरे मंगलवार को देश भर के मतदान केंद्रों पर मतदान संबंधी समस्याओं के दावों का प्रचार किया। जैसे ही नतीजे आए, उन्होंने केवल इतना लिखा, “मुझे लगता है कि सेव अमेरिका एक्ट को पारित करना एक अच्छा विचार होता।” उनका यह इशारा उस कानून की तरफ था जिसे ट्रंप पारित कराने में असफल रहे थे और जिससे लाखों अमेरिकी मताधिकार से वंचित हो सकते थे।

इलेक्शन इंटीग्रिटी नेटवर्क की संस्थापक और अध्यक्ष क्लेटा मिशेल, जिन्होंने अमेरिकी चुनावों को कमजोर करने के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम किया है, ने भी चुनावी परिणाम आने के बाद सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट नहीं किया। चुनावी धांधली के दावों के चर्चित चेहरे सेठ केशल, जिन्होंने कथित तौर पर व्हाइट हाउस के अधिकारियों को मतदान की गड़बड़ियों पर जानकारी दी थी, ने मंगलवार रात नतीजों पर कई पोस्ट किए लेकिन एक बार भी परिणामों की वैधता पर सवाल नहीं उठाया। दूसरी ओर ओवरस्टॉक डॉट कॉम के संस्थापक पैट्रिक बर्न, जिन्होंने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाने वाले तंत्र के बड़े हिस्से को वित्तीय मदद दी थी, ने अपने सोशल मीडिया खातों पर मध्यावधि चुनाव परिणामों का कोई उल्लेख नहीं किया।

इस पूरे विमर्श के सबसे प्रमुख चेहरे खुद खामोश नहीं रहे। चुनाव की देर रात डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को फोन किया और डेमोक्रेट्स को उनकी जीत पर बधाई दी।

सवाल-जवाब

वर्ष 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में चुनावी धांधली का दावा करने वाले उम्मीदवारों का प्रदर्शन कैसा रहा?
इस चुनाव में चुनावी प्रक्रिया और पूर्व परिणामों पर सवाल उठाने वाले लगभग सभी प्रमुख उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा।
क्या चुनाव हारने वाले नेताओं ने मतगणना और नतीजों में धांधली का कोई औपचारिक आरोप लगाया?
नहीं, हार का सामना करने वाले लगभग सभी उम्मीदवारों ने बिना किसी धांधली का आरोप लगाए शांतिपूर्वक अपनी पराजय स्वीकार कर ली या चुप्पी साध ली।
एरिज़ोना के गवर्नर चुनाव में एंडी बिग्स ने अपनी हार का क्या कारण बताया?
एंडी बिग्स ने चुनावी धांधली के बजाय अपने मतदाताओं के कम संख्या में वोट डालने को हार की वजह बताया।
ओहियो के गवर्नर पद की दौड़ में विवेक रामास्वामी के नतीजे क्या रहे?
विवेक रामास्वामी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से चुनाव हार गए और उन्होंने फोन पर अपनी प्रतिद्वंद्वी को बधाई देते हुए हार स्वीकार कर ली।
क्या चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले किसी उम्मीदवार को जीत भी मिली?
हाँ, फ्लोरिडा के गवर्नर पद पर ट्रंप समर्थित बायरन डोनाल्ड्स ने जीत हासिल की, हालांकि उन्होंने भी अपने विजयी भाषण में धांधली का कोई जिक्र नहीं किया।
चुनाव परिणाम आने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की क्या प्रतिक्रिया रही?
डोनाल्ड ट्रंप ने देर रात फॉक्स न्यूज पर कॉल करके डेमोक्रेटिक पार्टी को उनकी ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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