मरुधरा के आसमान से घने बादलों का डेरा अब पूरी तरह सिमटने लगा है। मानसूनी तंत्र के कमजोर पड़ने के साथ ही राज्य भर में वर्षा की सक्रियता लगभग ठहर गई है और अधिकांश भूभाग पर शुष्क मौसमी परिस्थितियां हावी हो चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के आकलन के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी सीमा इस समय पंजाब के गुरदासपुर से शुरू होकर चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ से गुजरते हुए राजस्थान के धौलपुर तथा उदयपुर तक फैली हुई है, जिसके आगे यह गुजरात के डीसा व नलिया तक पहुंचती है। आने वाले 48 घंटों की अवधि में प्रदेश के जो थोड़े-बहुत हिस्से शेष रह गए हैं, वहां से भी मानसूनी हवाओं की रवानगी के लिए माहौल पूरी तरह मुफीद नजर आ रहा है। इसके बाद समूचे राज्य में बादलों का बरसना नगण्य हो जाएगा और धरती पर केवल तेज धूप का राज रहेगा।
बीते चौबीस घंटों का लेखा-जोखा और तापमान का मिजाज
हालिया 24 घंटों के दौरान प्रदेश का मौसम आमतौर पर शांत और वर्षाविहीन ही बना रहा। सिर्फ राजसमंद इलाके में स्थानीय बादलों के चलते छिटपुट स्थानों पर हल्की फुहारें अथवा मध्यम स्तर की वर्षा दर्ज की गई। आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे राज्य के भीतर सबसे अधिक पानी आमेट क्षेत्र में बरसा, जहां वर्षामापी यंत्र में 16 एमएम की मात्रा आंकी गई। बादलों की अनुपस्थिति और चटख धूप के कारण अधिकतम तापमान के पैमाने पर पिलानी सबसे गर्म साबित हुआ, जहां का पारा 39.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसके विपरीत रात्रि के समय सिरोही में ठंडक का अहसास बढ़ा और वहां न्यूनतम पारा गिरकर 17.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। आगामी पूरे सात दिनों तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में वातावरण मुख्यतः सूखा रहने की ही प्रबल संभावना जताई गई है। इसके अलावा अगले पांच दिनों के भीतर दिन के सर्वोच्च तापमान में किसी बड़े फेरबदल के संकेत नहीं हैं।
गांधी जयंती पर राज्यभर में ग्रीन जोन और शांत मौसम
2 अक्टूबर के दिन राजस्थान के किसी भी हिस्से में मेघगर्जन, तेज आंधी अथवा जलभराव लाने वाले बादलों की कोई चेतावनी नहीं रखी गई है। चाहे अरावली के पूरब का इलाका हो या फिर थार का पश्चिमी विस्तार, दोनों ही अंचलों में हवाएं शांत रहेंगी और वर्षा की कोई संभावना नहीं दिखेगी। मौसम के आधिकारिक नक्शे में सभी जिलों को ग्रीन यानी बिना किसी खतरे वाले दायरे में दर्शाया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर, बारां, कोटा, भरतपुर, बूंदी, जयपुर, अजमेर और उदयपुर सहित किसी भी जिले के निवासियों को मूसलाधार बारिश या तूफानी झोंकों का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि वायुमंडल की ऊपरी परतों में एक हलचल जारी है। उत्तरी हरियाणा के आसपास 3.1 से लेकर 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती हवाओं का एक दायरा मौजूद है, जिसके साथ क्षोभमंडल के मध्य और ऊपर के स्तर पर पश्चिमी हवाओं की ट्रफ भी संबद्ध है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर पर्याप्त नमी का संचार न होने से राजस्थान पर इसका कोई बड़ा अथवा व्यापक असर देखने को नहीं मिल रहा है। आधिकारिक सूचना का प्रारूप सोशल मीडिया मंच पर साझा किए गए पूर्वानुमान पत्रक में भी देखा जा सकता है।
सीजन भर में अठारह फीसदी कमजोर रही मानसूनी बौछारें
साल 2026 के मानसूनी सत्र ने राजस्थान के कई हिस्सों को प्यासा छोड़ दिया। चार महीनों की पूरी अवधि यानी 1 जून से लेकर 30 सितंबर तक के संकलित आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में निर्धारित सामान्य औसत 435.6 एमएम के एवज में महज 358 एमएम वर्षा ही रिकॉर्ड की जा सकी। इस प्रकार पूरे राज्य स्तर पर 18 फीसदी की बड़ी कमी दर्ज की गई है। भौगोलिक तौर पर देखें तो पूर्वी राजस्थान के जिलों में सामान्यतया 626.6 एमएम पानी बरसता है, किंतु इस बार वहां 533.5 एमएम वर्षा ही हो पाई, जो कि 15 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है। पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में हालात और अधिक चिंताजनक रहे, जहां 283.6 एमएम के सामान्य मानदंड के विपरीत सिर्फ 218.3 एमएम वर्षा दर्ज हुई, जिसका मतलब है कि वहां सामान्य से 23 फीसदी कम मेघ बरसे। सीजन के अंतिम सप्ताह में भी यह सुस्ती जारी रही। 25 सितंबर से 1 अक्टूबर की अवधि में समूचे राजस्थान में 5.8 एमएम के औसत के मुकाबले 4.7 एमएम पानी गिरा। इस दौरान पूर्वी अंचल में 7.8 एमएम की जगह 6.2 एमएम और पश्चिमी अंचल में 4.3 एमएम की तुलना में केवल 3.5 एमएम बारिश ही दर्ज हो सकी।
अक्टूबर के पहले पखवाड़े में मौसम का संभावित मिजाज
2 अक्टूबर से लेकर 15 अक्टूबर तक के विस्तारित अनुमानों के अनुसार शुरुआती सात दिनों में राज्य के ज्यादातर जिलों का मौसम पूरी तरह खुला और सूखा रहेगा। इस चरण में दिन और रात दोनों समय के तापमान अपने सामान्य स्तर के इर्द-गिर्द ही बने रहने की उम्मीद है। मानसूनी प्रणाली के पूरी तरह विदा हो जाने के बाद जब आकाश में बादलों का तिनका भी नहीं रहेगा, तब सीधी धूप के कारण दोपहर के समय पारे में हल्की बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ रातें लंबी होने और शुष्क पछुआ हवाओं के बहने से तड़के व देर रात के समय मंद ठंडक का अहसास होना शुरू हो जाएगा, जो गुलाबी सर्दी की दस्तक का आभास कराएगा।
अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता
अक्टूबर के पहले हफ्ते की शांति के बाद दूसरे हफ्ते में मौसम की करवट देखने को मिल सकती है। 6 अक्टूबर की ढलती शाम अथवा रात के समय उत्तरी राजस्थान के कुछ सीमित इलाकों में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ हल्की बूंदाबांदी शुरू होने का अनुमान है। इसके उपरांत 7 और 8 अक्टूबर को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, बीकानेर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर तथा जयपुर सहित उत्तर व पूर्वी राजस्थान के विभिन्न भूभागों में बिखरे तौर पर मेघ बरस सकते हैं। 9 तारीख से लेकर 11 अक्टूबर के बीच आंधी और तेज हवाओं के साथ बारिश का यह दायरा और विस्तृत हो सकता है। यदि हिमालयी क्षेत्र से आने वाले इस पश्चिमी विक्षोभ का दबाव और गहराया, तो कुछ चुनिंदा स्थानों पर तीव्र वर्षा के साथ ओले गिरने की परिस्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। संक्षेप में कहें तो राजस्थान से वर्षा की वर्तमान प्रणाली विदा हो चुकी है, जिसके बाद शुरुआती अक्टूबर शुष्क रहेगा और फिर एक नए विक्षोभ के चलते उत्तर के जिलों में मौसम फिर से पलटेगा।




















